"तुकोबा के विट्ठल सोहला"🙏🚩📿🕺✨🌊🕉️🤝👑🌍🌞🤝👑🌍🌞🌌⚛️💖 🌌⚛️💖

Started by Atul Kaviraje, December 24, 2025, 07:01:00 PM

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Atul Kaviraje

संत तुकाराम महाराज अभंग गाथा-
अभंग क्र.२४
जन विजन जालें आम्हां । विठ्ठलनामा प्रमाणें ॥१॥

पाहें तिकडे बापमाय । विठ्ठल आहे रखुमाई ॥ध्रु.॥

वन पट्टण एकभाव । अवघा ठाव सरता जाला ॥२॥

आठव नाहीं सुखदुःखा । नाचे तुका कौतुकें ॥३॥

अर्थ:-

भक्तीचेप्रेम प्राप्त झाल्यामुळे जन आणि अरण्य आम्हाला समान भासते .जिकडे पहावे तिकडे आम्हाला विठ्ठल-रखमाईच दिसते .जनात आणि वनात आम्हाला काहीच फरक जाणवत नाही; कारण माझे मन देहावर नाही सर्वत्र माझी समदृष्टी झाली आहे .तुकाराम महाराज म्हणतात मी विठ्ठलाच्या नामसंकीर्तनामधे तन्मय झालो त्यामुळे मला सूखदुःखाची आठवनहि राहत नाही .

॥  कविता: विट्ठलमय हे जागा जाहे ॥

शीर्षक: "तुकोबा के विट्ठल सोहाला"

1.
कविता:
विट्ठल नाम के ये छंद, मेरा मन स्तब्ध रह गया,
लोगों के बीच मेरा जीवन मेरा है, अब यह एक दृष्टि बन गया है।
कोई भेदभाव नहीं बचा, विट्ठल प्रबल हो गया है,
नाम की इस धुन में, लोगों की हलचल गायब हो गई है।

अर्थ:
नाम के प्रभाव से, भीड़ और अकेलेपन का अंतर मिट गया है। 🙏📿🕉�🚩🙏📿🕉�🚩

2.
कविता:
जहां भी देखता हूं, सामने विट्ठल मौली दिखाई देती है,
छाया में रखुमाई का रूप है, प्रेम की यह महान बाढ़।
माता-पिता मेरे हो गए हैं, अब परिवार संवर गया है,
विट्ठल के चरणों में, मेरी चिंताएँ और दुख मिट गए हैं।

अर्थ:
भीड़ के बीच में, माता-पिता के रूप में विट्ठल और रखुमाई दिखने लगे हैं। 👩�❤️�👨👣✨🌷👩�❤️�👨👣✨🌷

3.
कविता:
चाहे शहर हो या घना जंगल, एक ही एहसास है,
विट्ठल के होने से, मुश्किल रास्ते आसान हो जाते हैं।
कुछ नहीं बचता, विट्ठल ने तीनों लोकों को ढँक लिया है,
भक्ति के इस सागर में, मेरा मन डूब गया है।

अर्थ:
जंगल और शहर अब एक जैसे लगते हैं क्योंकि विट्ठल हर जगह हैं। 🌳🏘�🌊💎🌳🏘�🌊💎

4.
कविता:
सुख-दुःख की याद न रही, द्वन्द्व अब समाप्त हो गया,
विट्ठल के दर्शन से मेरा भाग्य खिल उठा।
देह का यह भान मिट गया, आत्म-सुख की मिठास आ गई,
पंढरी के मत का यह भ्रम मुझ पर छा गया।

अर्थ:
मैं सुख-दुःख से परे होकर आत्म-सुख का अनुभव कर रहा हूँ। 🧘�♂️🌈🙌🕊�🧘�♂️🌈🙌🕊�

5.
कविता:
आनन्द की धारा बहती है, प्रेम से तुका नाचती है,
ताल-मृदंग की लय पर, नाम की आहट बजती है।
भक्ति की ये विचित्र तारीफ़, भगवान भी पागल हो जाते,
तुकोबा के अभंग से, भक्ति की ये अमृत-धारा।

अर्थ:
तुकाराम महाराज विट्ठल के प्रेम में डूबे नाच रहे हैं। 🕺🎵🥁🔥🕺🎵🥁🔥

6.
कविता:
अब मुझे कुछ नहीं चाहिए, अब मुझे ये दुनिया नहीं चाहिए,
विट्ठल ही मेरी जान है, वो जीवन का सहारा है।
वो कण-कण में बसते हैं, कण-कण में उनका नाम है,
तुकोबा के हृदय में, विट्ठल की शाश्वत हवा है।

अर्थ:
अब दुनिया का आकर्षण नहीं, बल्कि विट्ठल ही जीवन का एकमात्र सहारा है। 🌌⚛️💖
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7.
कविता:
भक्त और यह भगवान, अब एक हो गए हैं, जाने जाते हैं,
उस अँधेरे पांडुरंग में, पूरी दुनिया समाई हुई है।
आप कहते हैं विट्ठलनाम, मैं आपके चरणों में समर्पित हो गया हूँ,
आज मैं धन्य हो गया हूँ, भक्ति का यह सरल कार्य।

अर्थ:
भक्त और भगवान एक हो गए हैं, और दुनिया विट्ठल से भर गई है। 🤝👑🌍🌞🤝👑🌍🌞

कविता सारांश इमोजी: 🙏🚩📿🕺✨🌊🕉�

--अतुल परब
--दिनांक-19.12.2025-शुक्रवार.
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