"दूसरों से मंज़ूरी लेना बंद करें"🌟💫🚶‍♀️👣💖🌿🔑💪🌟✨🎨👏🏆🙌

Started by Atul Kaviraje, December 25, 2025, 03:52:03 PM

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Atul Kaviraje

"दूसरों से मंज़ूरी लेना बंद करें"

दूसरों से मंज़ूरी लेना बंद करें

पद 1:
आस-पास वालों से मंज़ूरी न लें,
क्योंकि आपकी कीमत उनकी बातों में नहीं है।
आप जैसे हैं, वैसे ही काफी हैं,
अपनी रोशनी चमकाएँ, अपने खुद के सितारे बनें। 🌟💫
(मतलब: आपकी कीमत दूसरों की राय से तय नहीं होती। आप जैसे हैं, वैसे ही खुद को अपनाएँ, और अपनी रोशनी को अंदर से चमकने दें।)

पद 2:
दुनिया बोलेगी, वे अपनी राय देंगे,
लेकिन उनकी बातों को अपने जूते न बनने दें।
अपना रास्ता सिर ऊँचा करके चलें,
क्योंकि आपकी यात्रा आपकी है, आपको ही इसे आज़माना है। 🚶�♀️👣
(मतलब: लोगों की राय हमेशा रहेगी, लेकिन यह आपकी यात्रा है। खुद पर भरोसा रखें और अपने रास्ते पर कायम रहें।)

पद 3:
जब आप मंज़ूरी ढूंढते हैं, तो आप अपना रास्ता खो देते हैं,
क्योंकि आप दूसरों का पीछा करते हैं, अपनी मर्ज़ी का नहीं।
अपने मार्गदर्शक खुद बनें, अपने दिल पर भरोसा करें,
अपनी आत्मा को शुरू से ही आगे बढ़ने दें। 💖🌿
(मतलब: मंज़ूरी ढूंढने से आप अपनी सहज बुद्धि पर भरोसा करने के बजाय दूसरों का पीछा करते हैं। अपने दिल पर भरोसा करें और उसे आपका मार्गदर्शन करने दें।)

पद 4:
मंज़ूरी फीकी पड़ जाती है, यह आती-जाती रहती है,
लेकिन आपका सच हमेशा मज़बूत रहता है।
क्षणिक तारीफ के पीछे न भागें,
अपने सच्चे तरीकों पर ध्यान दें। 🔑💪
(मतलब: बाहरी मंज़ूरी अस्थायी होती है। जो सच में मायने रखता है वह है अपने सच और मूल्यों से जुड़े रहना।)

पद 5:
ताकत आपकी आत्मा के अंदर है,
आपको पूरा करने के लिए दूसरों की ज़रूरत नहीं है।
जब आप खुद पर विश्वास करते हैं,
तो आप अपने खुद के चमकते सितारे बन जाते हैं। 🌟✨
(मतलब: सच्ची ताकत और पूर्णता अंदर से आती है। जब आप खुद पर विश्वास करते हैं, तो आप आत्मविश्वास और ताकत बिखेरते हैं।)

पद 6:
आप अनोखे हैं, एक मास्टरपीस,
कोई और आपको शांति नहीं दे सकता।
तो अब दूसरों से मंज़ूरी लेना बंद करें,
आपने इसे पहले ही कमा लिया है, झुककर सलाम करें। 🎨👏
(मतलब: आप एक अनोखे इंसान हैं, और आपकी शांति दूसरों की मंज़ूरी से नहीं, बल्कि खुद को अपनाने से आती है।)

पद 7:
सीधे खड़े हों, गर्व से खड़े हों, बस आज़ाद रहें,
आपकी कीमत उनके देखने के लिए नहीं है। जब आप अपनी खुद की परछाई को अपनाते हैं,
तो आपको किसी और की मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं होती। 🏆🙌
(मतलब: अपनी सच्चाई में आत्मविश्वास से खड़े रहें। जब आप खुद पर विश्वास करते हैं, तो आपको बाहरी मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं होती।)

छोटा मतलब:
यह कविता हमें दूसरों से मंज़ूरी लेना बंद करने और अपनी अनोखी पहचान को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। यह हमें याद दिलाती है कि सच्ची कीमत अंदर से आती है और यह सफ़र हमारा है जिसे हमें खुद तय करना है। आत्म-स्वीकृति और अंदर की ताकत एक संतुष्ट जीवन जीने की कुंजी हैं।

तस्वीरें और इमोजी:
🌟💫🚶�♀️👣💖🌿🔑💪🌟✨🎨👏🏆🙌

"दूसरों से मंज़ूरी लेने से बचें" हमें सिखाता है कि हम जैसे हैं वैसे ही काफ़ी हैं। सच्ची शांति और ताकत अंदर से आती है, और जब हम खुद को पूरी तरह से अपनाते हैं, तो हमें पूरा महसूस करने के लिए दूसरों से मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं होती।

--अतुल परब
--दिनांक-25.12.2025-गुरुवार.
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