॥ समानता के योगी: श्री गजानन ॥🚩 🕉️ 🙏 ✨🤝 ❤️ 🌍 🕊️

Started by Atul Kaviraje, December 25, 2025, 08:33:41 PM

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Atul Kaviraje

श्री गजानन महाराज एवं सामाजिक जातिवाद का विरोध-
(श्री गजानन महाराज और जातिगत भेदभाव पर उनका विरोध)
श्री गजानन महाराज और समाज में जातिगत भेदभाव का उनका विरोध-
(Shree Gajanan Maharaj and His Opposition to Caste Discrimination)
Shri Gajanan Maharaj and opposition to casteism in society-

यहाँ एक दिल को छू लेने वाली और रसीली कविता है जो श्री गजानन महाराज और जाति-भेद के उनके विरोध को दिखाती है:

॥ समानता के योगी: श्री गजानन ॥

शेगावनी के सिद्ध योगी, मूर्ति सचमुच भगवान हैं,
जाति-पाँत की दीवारें तोड़ीं, प्रेम की शिक्षा दी।
उन्होंने कोई भेद नहीं माना, मानवता का धर्म सबसे ऊपर है,
भक्तों की इस दुनिया में, कोई छोटा या बड़ा नहीं है।
🚩 🕉� 🙏 ✨

मतलब: शेगाव के समर्थ गजानन महाराज सचमुच भगवान का रूप थे। उन्होंने समाज में जाति-पाँत की दीवारें तोड़ीं और सिर्फ़ प्रेम और मानवता की शिक्षा दी। उनके लिए सभी भक्त बराबर थे, कोई छोटा या बड़ा नहीं था।

मैंने पवित्रता का वह एहसास, एक टुकड़े का वह अपनापन देखा,
मैंने अद्वैत का मंत्र बताया, मैंने भक्ति की लड़ाई शुरू की।
स्पर्श एक झूठा खेल है, इंसान का इंसान के साथ,
मन में कभी न हो द्वेष, जानें कि ईश्वर सबके साथ है।
🤝 ❤️ 🌍 🕊�

अर्थ: महाराज ने सिर्फ़ हृदय के भाव देखे। उनका मानना ��था कि शिव-शिव या स्पर्श इंसान का इंसान के साथ खेला जाने वाला एक झूठा खेल है। हर इंसान में ईश्वर का वास है, इसलिए उन्होंने संदेश दिया कि किसी से द्वेष मत करो।

कभी किसी की जाति मत मिटाओ, न पूछो गोत्र कौन है,
भक्ति देखकर वे प्रसन्न हुए, उस मन को आशीर्वाद दिया।
उष्ट्य पत्रावली में उन्होंने अन्न के उस पवित्र कण को ��खोजा,
इस समानता के सिद्धांत को प्रज्वलित किया, अहंकार के मन को भंग किया।
🍽� 🙌 🧘�♂️ 💫

अर्थ: महाराज ने कभी किसी की जाति या गोत्र नहीं पूछा। उन्होंने सिर्फ़ भक्त की भक्ति देखी। उष्ट्य पत्रावली में खाना खाकर उन्होंने साबित कर दिया कि अन्न और आत्मा में कोई भेदभाव नहीं है, जिससे लोगों का अहंकार गिर गया।

ब्राह्मण हो या शूद्र, सबकी एक माँ है,
जो चिलचिलाती गर्मी में तपते हैं, उन्हें कृपा की वो ठंडी छाया।
भास्कर की भक्ति पहले थी, और बंकट की भावना,
जातिवाद के कीचड़ में, समानता का यही नाम है।
☀️ 🌳 ⛵ 💓

मतलब: महाराज सबके लिए माँ (माँ) जैसे थे। जाति का विचार किए बिना, उन्होंने हर उस व्यक्ति को अपनी कृपा की छाया दी जो मुसीबत में था। चाहे भास्कर हो या बंकटलाल, उन्होंने समानता के नाम पर सभी को एक स्थान दिया।

उन्होंने पाखंडी और मेहनती लोगों को शुद्ध शिक्षा दी,
महाराज ने जातिवाद के जहर का कड़ा विरोध किया।
विचार शुद्ध होने चाहिए, हृदय शुद्ध होना चाहिए,
तभी संतों के पवित्र, शुभ चरणों का लाभ मिलता है। 🚫 🐍 💡 👣

मतलब: महाराज ने समाज में उन लोगों को सख्त समझाइश दी जो जातिवाद की बेड़ियों में जकड़े हुए थे। जातिवाद ज़हर की तरह है और उन्होंने हमेशा इसका विरोध किया। संतों के पैर छूने से पहले, सोच और मन से पवित्र होना पड़ता है।

'गनि गण गणत बोते', यह मुखी का दिया हुआ मंत्र है,
जो भेदभाव छोड़ देगा, वही दुनिया में सुखी रहेगा।
उन्होंने इस दुनिया में इंसानियत का झंडा बुलंद किया,
इस बराबरी के रास्ते पर चलकर मोक्ष की गति मिलेगी।
🚩 🗣� 😊 🌈

मतलब: 'गनि गण गणत बोते' मंत्र के ज़रिए उन्होंने जीवन और शिव की एकता को बताया। जो इंसान भेदभाव भूल जाता है, वही सच्चा सुखी होता है। उन्होंने दुनिया में इंसानियत का झंडा बुलंद किया और बराबरी के रास्ते से मोक्ष का रास्ता दिखाया।

धन्य, धन्य राजा गजानन, समानता के महान मेरु,
आप इस भक्ति के सागर के सहारे और लंगर हैं।
जाति-भेद खत्म हो, यही मेरे चरणों में प्रार्थना है,
आपकी कृपा से लोगों की यह भावना पवित्र हो।
🙏 👑 🌊 🌹

अर्थ: समानता के पहाड़ गजानन महाराज की जय हो। वे इस भक्ति के सागर में हमारा सहारा हैं। समाज में जाति-भेद पूरी तरह खत्म हो और सभी के विचार पवित्र हों, यही हमारी उनके चरणों में प्रार्थना है।

इमोजी समरी:
🚩 (भक्ति/धर्म) • 🕉� (आध्यात्मिकता) • 🙏 (नमन) • ✨ (उज्ज्वलता) • 🤝 (एकता) • ❤️ (प्रेम) • 🌍 (ब्रह्मांड) • 🕊� (शांति) • 🍽� (प्रसाद/भोजन) • 🙌 (समर्पण) • 🧘�♂️ (ध्यान) • 💫 (ईश्वरत्व) • ☀️ (ज्ञान) • 🌳 (ठंडी छाया) • ⛵ (रक्षक) • 💓 (करुणा) • 🚫 (विरोध) • 🐍 (जातिवाद का ज़हर) • 💡 (जागरूकता) • 👣 (पवित्र चरण) • 😊 (आनंद) • 🌈 (समानता/विविधता) • 👑 (राजा/शक्तिशाली) • 🌊 (भक्ति का सागर) • 🌹 (बलिदान)

--अतुल परब
--दिनांक-25.12.2025-गुरुवार.
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