॥ मालेवाड़ का भक्ति समारोह: घोड़ेमुख जात्रे की महिमा ॥🐴 ➡️ 🚩 ➡️ 🥁 ➡️ 🎡 ➡️ 🎭

Started by Atul Kaviraje, December 31, 2025, 09:15:43 PM

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Atul Kaviraje

घोडेमुख जत्रा-मालेवाड-

मंगलवार, 30 दिसंबर, 2025 को मालेवाड़ (ता. सावंतवाड़ी) में होने वाली मशहूर 'घोड़ेमुख जात्रे' के मौके पर पेश है एक खास और भक्ति से भरी मराठी कविता।

॥ मालेवाड़ का भक्ति समारोह: घोड़ेमुख जात्रे की महिमा ॥

1. मेले की शुभ शुरुआत
दिसंबर का महीना और मंगलवार का दिन खास होता है,
घोड़ेमुख की सांस मालेवाड़ की धरती पर घूमती है।
मंदिर का रास्ता भक्तों की भीड़ से भरा होता है,
आज, घोड़ेमुख जात्रे का दिव्य नजारा दिखता है।

(मतलब: मालेवाड़ में 30 दिसंबर 2025 को घोडेमुख जात्रे का त्योहार शुरू हो गया है और हर जगह भक्ति का माहौल है।) 📅 🚩 ⛪ 👣 ✨

2. भगवान घोडेमुख का रूप
अश्वमुख की चमक तेज है, सिर पर छत्र चमकता है,
दर्शन से बीमारियां दूर होती हैं, भक्तों का भाग्य चमकता है।
उस पत्थर की मूर्ति में दिव्य शक्ति जमा है,
उसका माथा विश्वास से झुका है, और उसका मन भक्ति से भरा है।

(मतलब: घोड़े जैसे चेहरे वाले भगवान का रूप बहुत चमकीला है और उनके दर्शन से सभी परेशानियां और बीमारियां दूर हो जाती हैं।) 🐴 🔱 💎 🕯� 🙏

3. मेले की रौनक
मंदिर के दरवाजों पर ढोल, शहनाई और नगाड़े बजते हैं,
पालकी पर गुलाल-खोबरा बिखेरना भारी होता है।
खिलौनों और मिठाइयों से सजा मालेवाड़ का बाजार,
छोटे से लेकर बूढ़े तक, दुनिया खुशियों से भर जाती है।

(मतलब: मेले में देवी-देवताओं की पालकी वाद्य यंत्रों की धुन पर निकलती है और बाजार उत्साह से भर जाता है।) 🥁 🎷 🍬 🎡 🎊

4. कोंकणी परंपरा और मन्नतें
कोंकण की इस संस्कृति का आधार, घोड़े जैसे चेहरे वाले भगवान,
दुल्हन को जन्म देने वाले भगवान, दुखों का नाश करने वाले।
भरे पेट औरतें परिवार की भलाई मांगती हैं,
भक्ति के इस सागर में, तन की सुध खो जाती है।

(मतलब: यह भगवान मनोकामना पूरी करने वाला माना जाता है, इसलिए भक्त अपने परिवार की खुशी के लिए आस्था के साथ प्रार्थना करते हैं।) 🥥 🌾 👪 🛡� 💖

5. लोक त्योहार और मेले
गांव के मेहमान आते हैं, मेले के इस मौके पर,
कोंकणी मिट्टी के प्यार के साथ, स्नेह की भावना के साथ।
रात के उन खेलों में, दशावतार रंगारंग होते हैं,
भक्ति का यह लोक अनुष्ठान हर किसी को प्रभावित करता है।

(मतलब: तीर्थ यात्रा के मौके पर रिश्तेदार इकट्ठा होते हैं और रात में दशावतार नाटकों जैसे कोंकणी आर्ट फॉर्म का मज़ा लेते हैं।) 🎭 🤝 🌙 🏡 🍲

6. आस्था की पालकी की रस्म
पालकी को फूलों से सजाया जाता है, गांव यात्रा पर निकलता है,
यह मेला पीढ़ियों के नाम का गवाह है।
घोड़ेमुख के जयकारे, आसमान में गूंजे,
मालेवाड़ का हर कोना, आज भक्ति में नहाया हुआ था।

(मतलब: जब फूलों से सजी पालकी का जुलूस शुरू होता है, तो पूरा गांव भगवान के जयकारों से भर जाता है।) 🚜 🌸 🚩 📢 🌟

7. चरणों में सेवा और आशीर्वाद
अगले साल फिर आएं, यही मुंह से दुआ है,
सभी भक्तों को हमेशा खुश रखना, हे भगवान। घोडेमुख देवराया पर आपकी कृपा बनी रहे,
मालेवाड़ के इस मेले का आनंद महसूस हो।

(मतलब: भक्त भगवान से प्रार्थना करते हैं कि सभी को खुश रखें और हमें हर साल आने के लिए बुलाएं।) 🙏 🌈 🕊� 🚩 🛐

॥ इमोजी समरी (इमोजी समरी) ॥
🐴 ➡️ 🚩 ➡️ 🥁 ➡️ 🎡 ➡️ 🎭 ➡️ 🙏 ➡️ ✨

--अतुल परब
--दिनांक-30.12.2025-मंगळवार.
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