॥ मालवण की काइवारी: श्री दंडेश्वर यात्रा समारोह ॥🌊 ➡️ 🔱 ➡️ 🥁 ➡️ 🎡 ➡️ 🎭 ➡️

Started by Atul Kaviraje, December 31, 2025, 09:16:22 PM

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Atul Kaviraje

श्री दांडेश्वर यात्रा-मालवण-

मंगलवार, 30 दिसंबर, 2025 को होने वाली मालवण (सिंधुदुर्ग) के ग्राम देवता की 'श्री दंडेश्वर महाराज यात्रा' के मौके पर पेश है एक खास भक्ति और रसीली मराठी कविता।

॥ मालवण की काइवारी: श्री दंडेश्वर यात्रा समारोह ॥

1. मालवण की पवित्र धरती
सागर की लहरों पर, मालवण का खूबसूरत शहर,
दंडेश्वर के जयकारे, आज घर-घर गूंज रहे हैं।
दिसंबर का यह आखिरी मंगलवार आ गया है,
भक्तों की इस दुनिया में, खुद दंडेश्वर की सांसें।

(मतलब: मालवन के समुद्र किनारे बसे इस शहर में श्री दंडेश्वर महाराज का मेला शुरू हो गया है और हर तरफ उत्साह का माहौल है।) 🌊 🚩 ⛪ 🐚 ✨

2. दंडेश्वर का दिव्य रूप
हाथ में डंडा लिए खड़े, रक्षक हैं भगवान,
भक्तों का यह संकट, पल भर में दूर हो जाता है।
आपकी मूरत मनमोहक है, आंखों में प्यार बसा है,
आपके चरणों में, अपना यह शरीर अर्पित करता हूं।

(मतलब: हाथ में डंडा लिए यह रक्षक भगवान सबकी रक्षा करते हैं और उनके रूप को देखकर मन को बड़ी शांति मिलती है।) 🔱 🛡� 👁� 🙏 🕯�

3. तीर्थयात्रा का अभूतपूर्व उत्साह
पालकी फूलों से सजी, मालाएं उड़ाई गईं,
'दंडेश्वर' के नाम पर सारे लोग पागल हो गए।
सनाई-चौघड़ की धुन, और ढोल की थाप,
मालवन की हर सड़क, लाल हो गई है।

(मतलब: फूलों और मालाओं से सजी पालकी उड़ाई गई, और आसमान साज़ों की आवाज़ से गूंज रहा है।) 🥁 🎷 🚜 🌸 🚩

4. कोंकणी संस्कृति की विरासत
मालवन का यह मेला त्योहार, आस्था का यह मेला,
सारे मेहमान और भक्त इकट्ठा हुए हैं, चलो यह रस्म देखें।
बाजार खाने-पीने और खिलौनों से भरा है,
आज, दंडेश्वर की यह धरनी खुशियों में नहाई हुई है।

(मतलब: यह यात्रा कोंकण की परंपरा की एक झलक है, जहाँ रिश्तेदार एक साथ आते हैं और मेले का आनंद लेते हैं।) 🎡 🍬 🤝 🏡 🎊

5. नया साल लाने वाले भगवान
दौड़े चले आते हैं, मेरे दंडेश्वर राजा,
भक्ति के इस दरबार में, भक्त का रुतबा।
पूरी तरह से दुआ मांगता हूँ, खुशियाँ हमेशा रहें,
आपकी कृपा से इंसान की ज़िंदगी के दुख दूर हों।

(मतलब: दंडेश्वर महाराज नया साल लाने वाले भगवान हैं, और उनकी कृपा से भक्तों की ज़िंदगी के सारे दुख दूर हो जाते हैं।) 🥥 🎀 🙌 🧿 🌈

6. रात में दशावतार का खेल
उस रात में, दशावतार का खेल रंगीन होता है,
उन पौराणिक कहानियों में, भक्त का मन विचलित होता है।
मालवणी की उस बोली में अभिनय की कला रंगीन है,
दंडेश्वर की छाया में, यह देश खुशहाल रहे।

(मतलब: मेले की रात कोंकण की मशहूर कला 'दशावतार' का प्रदर्शन होता है, जिसमें लोग भक्ति और अभिनय का आनंद लेते हैं।) 🎭 🌙 📜 🎙� 🌟

7. चरणों में झुककर प्रार्थना करते हुए
अगले साल, हम फिर आएंगे, इसी भक्ति के साथ,
आपके बिना, हमारा जीवन बहुत सूखा है।
दंडेश्वर महाराज, आप हमेशा स्वस्थ रहें,
आपका नाम इन होठों पर, जीवन भर हमारे साथ रहे।

(मतलब: कवि भगवान से प्रार्थना करता है कि आपका नाम हमेशा मुंह में रहे और आप स्वस्थ रहें।) 🙏 💖 🛐 🚩 ✨

॥ इमोजी समरी (इमोजी समरी) ॥
🌊 ➡️ 🔱 ➡️ 🥁 ➡️ 🎡 ➡️ 🎭 ➡️ 🙏 ➡️ 🚩

--अतुल परब
--दिनांक-30.12.2025-मंगळवार.
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