॥ खानोली के रक्षक: श्री गवलदेव जात्रोत्सव ॥📅 ➡️ 🚩 ➡️ 🥁 ➡️ 🎡 ➡️ 🤝 ➡️ 🙏 ➡️ ✨

Started by Atul Kaviraje, December 31, 2025, 09:17:57 PM

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Atul Kaviraje

गवळदेव जत्रा-खानोली, तालुका-वेंगुर्ला-

खानोली (तेल. वेंगुर्ला) में मंगलवार, 30 दिसंबर, 2025 को होने वाले गांव के देवता 'श्री गवलदेव जात्रे' के मौके पर पेश है एक खास भक्ति और रसीली मराठी कविता।

॥ खानोली के रक्षक: श्री गवलदेव जात्रोत्सव ॥

1. खानोली शहर में शुभ त्योहार
वेंगुर्ला की धरती पर, खानोली गांव खूबसूरत है,
आज गवलदेव के मेले से मंदिर जगमगा उठा।
30 दिसंबर, मंगलवार का यह दिन खास है,
भक्तों की इस दुनिया में, दिव्यता का मीठा स्वाद।

(मतलब: 30 दिसंबर 2025 को वेंगुर्ला तालुका के खानोली गांव में श्री गवलदेव देव का मेला बड़े जोश के साथ शुरू हो गया है।) 📅 🚩 🏘� ✨ 🛐

2. गवलदेव का शुद्ध रूप
जिनके नाम से शांति मिलती है, ये गवलदेव हैं,
भक्तों की भलाई के लिए, इन्हें जगाए रखना।
आंखों में प्यार, हाथों में आशीर्वाद,
आपके एक दर्शन से, ये दूरी शांत हो जाती है।

(मतलब: गवलदेव बहुत शांत और चौकन्ने देवता हैं, और उनके दर्शन से भक्तों के मन की सारी बेचैनी दूर हो जाती है।) 😇 🙏 🧿 🕯� 🌟

3. मेले की अनोखी रस्म
जुलूस हुंकार के साथ आया, मंदिर के आंगन में,
गुलाल और नारियल उड़ाया, आज सारे में हुआ।
शहनाई की धुन गूंजती है, भक्ति का यह नया सुर,
गावलदेव के नाम पर, भक्त, यह प्यार भरा सुर गाते हैं।

(मतलब: बाजों की आवाज़ और गुलाल उड़ाते हुए भगवान की बारात निकलती है, पूरा गाँव भक्ति में नहा जाता है।) 🥁 🎷 🚜 🌸 🚩

4. मेहमानों का जमावड़ा और खुशी
मेहमान और तीर्थयात्री आ गए हैं, तीर्थ यात्रा के इस मौके पर,
कोंकणी मिट्टी महक उठी है, स्नेह से।
बाजार खिलौनों और मिठाइयों से भरा है,
खुशियाँ आज उमड़ रही हैं, गावलदेव के इस स्थान पर।

(मतलब: तीर्थ यात्रा के मौके पर सभी रिश्तेदार एक साथ आते हैं और बाज़ार का मज़ा लेते हैं, यही कोंकणी संस्कृति का नज़ारा है।) 🎡 🍬 🤝 🏡 🎊

5. नवसाला लाने वाले देवता
जो दौड़कर बाज़ार आते हैं, वही खानोली के राजा,
भक्ति के इस दरबार में, लोग उनकी हैसियत मानते हैं।
नारियल और ओटी चढ़ाने वाले लोग, हमेशा खुश रहने की दुआ मांगते हैं,
गावलदेव के आशीर्वाद से, सारे दुख दूर भाग जाते हैं।

(मतलब: गावलदेव महाराज नवसाला लाने वाले देवता हैं और उनकी कृपा से भक्तों के जीवन में सुख-समृद्धि आती है।) 🥥 🎀 🙌 🛡� 🌈

6. संस्कृति की विरासत
पीढ़ियों की यह परंपरा, आस्था का यह अनमोल खजाना,
कोंकण के इस मेले त्योहार में, आइए भगवान की सेवा करें।
रात के उन खेलों से मेले की शान बढ़ जाती है,
भक्ति का यह लोक अनुष्ठान सभी को प्रिय लगता है।

(मतलब: यह यात्रा एक सांस्कृतिक धरोहर है और रात में होने वाले अनुष्ठानों से मेले की सुंदरता और भी बढ़ जाती है।) 🎭 🌙 📜 🚩 💫

7. चरणों में झुककर प्रार्थना करना
सबको खुश रखना, हे भगवान, यही अंदर की उम्मीद है,
अगले साल फिर आना, भक्ति की चाहत के साथ।
गावलदेव के नाम पर, यह दुनिया हमेशा खुशहाल रहे,
इन होठों पर तुम्हारा नाम लेकर, हम खुशी के गीत गाएंगे।

(मतलब: कवि भगवान से प्रार्थना करता है कि सबका भला करें और हमें हर साल आपके दर्शन का मौका दें।) 🙏 💖 🛐 🚩 🕊�

॥ इमोजी समरी (इमोजी समरी) ॥
📅 ➡️ 🚩 ➡️ 🥁 ➡️ 🎡 ➡️ 🤝 ➡️ 🙏 ➡️ ✨

--अतुल परब
--दिनांक-30.12.2025-मंगळवार.
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