॥ बेघर आसमान: रिफ्यूजी और इंसानियत का दुख ॥🏚️ ➡️ 🚧 ➡️ 🧒 ➡️ ⛺ ➡️ 🤝 ➡️ ⚖️ ➡️

Started by Atul Kaviraje, December 31, 2025, 09:22:33 PM

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Atul Kaviraje

शरणार्थी समस्या और मानवीय दृष्टिकोण-

यहाँ रिफ्यूजी की समस्याओं और मानवतावाद के गंभीर विषय पर आधारित एक दिल दहला देने वाली और इमोशनल मराठी कविता है।

॥ बेघर आसमान: रिफ्यूजी और इंसानियत का दुख ॥

1. खोया घर और गाँव
अपना घर और अपने लोग, एक पल में पीछे छूट गए,
रिफ्यूजी की किस्मत आई, आँखों में बस आँसू।
चाहे जंग हो या संकट बड़ा, मिट्टी हमें छोड़ ही जानी चाहिए,
वो सारे जाने-पहचाने रास्ते, किसी पराई ज़मीन में ढूँढ़ने चाहिए।
(मतलब: जब जंग या संकट की वजह से लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ता है, तो उनकी ज़िंदगी में सिर्फ़ दुख रह जाता है और उन्हें किसी पराई जगह सहारा ढूँढ़ना पड़ता है।) 🏚� 🚶�♂️ 🌍 💔 😢

2. ये वजूद की लड़ाई
कोई हाथ नहीं, कोई सहारा नहीं,
ये बेबस बॉर्डर की उस बाड़ के पास खड़ा है।
डॉक्यूमेंट्स के जाल में, इंसान यहीं खो जाता है,
इस वजूद की लड़ाई में, सवाल कहाँ उठता है?

(मतलब: रिफ्यूजी के पास अपनी पहचान साबित करने के लिए कुछ नहीं होता, वो बॉर्डर पर खड़े होकर सिर्फ मदद की उम्मीद करते हैं।) 🚧 📄 👤 ❔ 🚫

3. बचपन का ये बोझ
खिलौनों की जगह, बच्चों पर सफर का बोझ है,
भविष्य के ये सारे सपने, डर के बोझ तले दबे हैं।
स्कूल खत्म हो गया, दोस्त छूट गए, पेट में ये भूख बड़ी है,
छोटों की इन आंखों में, डर अब बड़ा दिखता है।
 (मतलब: रिफ्यूजी परिवारों के बच्चे अपना बचपन खो देते हैं। उनकी पढ़ाई-लिखाई के बजाय, उनके सामने जीने और भूख का सवाल बड़ा होता है।) 🧸 🎒 🏃�♂️ 🧒 📉

4. पनाह ढूंढते हुए...
उस छोटे से टेंट हाउस में, उन्हें बारिश और धूप झेलनी पड़ती है,
इज्जत से जीने के लिए, दुनिया के सामने हाथ फैलाने के लिए।
कुछ यहां पनाह देते हैं, कुछ नफरत से देखते हैं,
इंसान होते हुए भी, उनकी ज़िंदगी कितनी मुश्किल है।
(मतलब: इन लोगों को पनाह के लिए टेम्पररी टेंट में रहना पड़ता है और ज़िंदा रहने के लिए दूसरों की मदद पर निर्भर रहना पड़ता है।) ⛺ ⛈️ 🤲 😔 🏚�

5. इंसानियत का नज़रिया
बॉर्डर लाइन के पार, इंसानियत का धर्म हो,
पीड़ितों के इन ज़ख्मों पर प्यार की ये सांस बसने दो।
जाति, धर्म और देश को भूलकर, आओ हम मदद का हाथ बढ़ाएं,
आओ हम शरणार्थियों की ज़िंदगी में भी उम्मीद की नई किरणें लाएं।
(मतलब: हम सबको देश और धर्म की दीवारें लांघकर इंसानियत दिखानी चाहिए और शरणार्थियों की मदद करनी चाहिए।) 🤝 ❤️ 🌍 ✨ 🕊�

6. साइंस और दुनिया की भूमिका
शांति का यह साइंस कहता है, हमें जंग नहीं, तरक्की चाहिए,
हमें बेघर हुए लोगों के पुनर्वास का नया नज़रिया चाहिए।
कानून सुरक्षा के लिए होने चाहिए, किसी पर ज़ुल्म न हो,
हर किसी को इंसान की तरह जीने का हक़ होना चाहिए।
(मतलब: हमें दुनिया भर में शांति के लिए कोशिश करनी चाहिए और बेघर हुए लोगों को फिर से इज्ज़त से जीने के लिए कानून और मदद देनी चाहिए।) ⚖️ 🏛� 🛡� 🌿 ✅

7. कल की धूप
जिन रूहों ने दुख झेले हैं और थक गई हैं, अब खुशियों की हवा बहे,
इस दुनिया की छत के नीचे, उन्हें उनकी सही जगह मिले।
इंसानियत के तौर पर, आइए हम उनके दुख दूर करें,
आइए हम इन बेघर हुए भाइयों के साथ खड़े हों।
(मतलब: हम सभी को शरणार्थियों के साथ मज़बूती से खड़ा होना चाहिए और उन्हें एक खुशहाल ज़िंदगी देने की कोशिश करनी चाहिए।) 🌞 🫂 🏘� 🌈 🚩

॥ इमोजी समरी (इमोजी समरी) ॥
🏚� ➡️ 🚧 ➡️ 🧒 ➡️ ⛺ ➡️ 🤝 ➡️ ⚖️ ➡️ 🌞

--अतुल परब
--दिनांक-30.12.2025-मंगळवार.
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