॥ भगवत एकादशी: वैकुंठ पाने की चाहत ॥🙌 💎 🌺 🕉️⛩️ 🚶‍♂️ 🍯 ❤️

Started by Atul Kaviraje, December 31, 2025, 10:35:58 PM

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Atul Kaviraje

भागवत एकादशी-
भगवत एकादशी / वैकुंठ एकादशी: कुछ पंचांगों के अनुसार, इस दिन को भगवत एकादशी या वैकुंठ एकादशी के रूप में मनाया जाता है। दक्षिण भारत में इसका विशेष महत्व है।

31 दिसंबर, 2025 को आने वाली भगवत एकादशी (वैकुंठ एकादशी) के मौके पर भगवान विष्णु के चरणों में समर्पित एक भक्ति कविता यहाँ है।

॥ भगवत एकादशी: वैकुंठ पाने की चाहत ॥

1. आज भगवत एकादशी का पावन दिन है।
वैकुंठ के दरवाज़े खुल गए हैं, आओ विष्णु के चरणों में पूजा करें।
मार्गशीर्ष का महीना पवित्र है, आओ श्री हरि का नाम याद करें।
सारे संकट दूर भाग जाएं, इस आत्मा का भाग्य चमक जाए।
🌅 🏛� 🔔 🕉�

2. दक्षिण देश कहता है 'वैकुंठ'
उत्तर देश कहता है 'भागवत'।
उपवास और सतर्कता से मन को पूरी शांति मिले।
आओ हम पूरे दिल से इस आठ अक्षरों वाले मंत्र का जाप करें।
जन्म-मरण का चक्कर खत्म, हरि के चरणों में बस जाएं।
🕯� 📿 ✨ 🙏

3. सुबह उठकर नहाएं।
विष्णु के रूप को अपने दिल में बसाएं।
आज भगवान को तुलसी और चंदन की खुशबू चढ़ाएं।
पाप और गर्मी आपके समूल नाश हों।
परम सुख का यह प्रकाश आपके भीतर चमके।
🚿 🌿 🕯� 🌟

4. श्याम और सुंदर नारायण
जो शंख-चक्र चलाते हैं।
भक्तों की इस पुकार के लिए वे हमेशा चौकन्ने रहें।
अहंकार छोड़ने से आपको विष्णु का आशीर्वाद मिलेगा।
दुनिया के सभी झगड़े और झगड़े खत्म हो जाएंगे।
🐚 ☸️ 🛡� 🤝

5. आज वैकुंठ का द्वार पार करें।
भक्ति का यह मार्ग अपनाएं।
काम, क्रोध और लोभ को त्यागकर, इस शरीर को हरि के चरणों में समर्पित कर दो।

प्रह्लाद और ध्रुव की तरह हमारी आसक्ति अटूट हो।

विट्ठल और विष्णु एक हैं, भक्ति का यह स्वाद बहुत मीठा है।

⛩️ 🚶�♂️ 🍯 ❤️

6. आज साल का अंत है

और यह भक्ति की सुबह है।

हे भगवान, आने वाले साल में भी आपके सुंदर कदम हों।

भागवत धर्म का झंडा, हमेशा ऊंचा, लहराता रहे।

नाम के इस मीठे रस से, हम अपने जीवन को सजाएं।

7. आपको वैकुंठपति की कृपा मिले

इस जीवन में क्या कमी है?

इस एकादशी के व्रत से, आपकी आत्मा को पूर्ण मुक्ति मिले।

'ॐ नमो नारायण' कहने से यह जन्म धन्य हो जाएगा।
विष्णु के चरणों में अर्पण करने से जीवन का अर्थ समझ में आ जाएगा।
🙌 💎 🌺 🕉�

कविता का छोटा अर्थ
यह कविता भागवत (वैकुंठ) एकादशी का महत्व बताती है, जो 31 दिसंबर, 2025 को पड़ती है। इस दिन को वैकुंठ के द्वार खुलने का दिन माना जाता है। साल के आखिर में आने वाली यह एकादशी हमें पुरानी गलतियों को छोड़कर भगवान की भक्ति का नया रास्ता अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। इस कविता का सार यह है कि मनुष्य उपवास और भगवान के नाम का जाप करके मोक्ष प्राप्त करता है।

इमोजी समरी
🌅 (गुड मॉर्निंग) • 🏛� (वैकुंठ मंदिर) • 🔔 (घंटी बजाना) • 📿 (रोज़री) • ✨ (दिव्यता) • 🙏 (प्रार्थना) • 🌿 (तुलसा) • 🐚 (शंख) • ☸️ (सुदर्शन चक्र) • ⛩️ (पवित्र द्वार) • 🚩 (भागवत धर्म पताका) • 🌺 (भक्ति फूल) • 🗓� (साल का अंत)

--अतुल परब
--दिनांक-31.12.2025-बुधवार.
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