॥ अन्नपूर्णा शाकंभरी: सृष्टि का हरा-भरा सहारा ॥🗓️ 🙇‍♂️ 💎 🌈🙌 🍎 🚩 🕉️

Started by Atul Kaviraje, December 31, 2025, 10:41:07 PM

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Atul Kaviraje

शाकम्भरी नवरात्रि: शाकम्भरी देवी की नवरात्रि पौष महीने में शुरू होती है। इस दौरान महाराष्ट्र के कई देवी मंदिरों (जैसे बनशंकरी, कोल्हापुर के अंबाबाई) में खास धार्मिक रस्में और त्योहार मनाए जाते हैं।
शाकम्भरी नवरात्रि फेस्टिवल: पौष की अष्टमी (28 दिसंबर) को शुरू हुआ शाकम्भरी देवी का नवरात्रि फेस्टिवल आज भी जारी रहेगा।
शाकम्भरी नवरात्रि: कोल्हापुर (अंबाबाई मंदिर) और महाराष्ट्र के दूसरे देवी मंदिरों में शाकम्भरी फेस्टिवल (शाकम्भरी नैवेद्य) के मौके पर देवी को अलग-अलग तरह की सब्जियां चढ़ाई जाती हैं।

31 दिसंबर, 2025 से शुरू हो रहे 'शाकंभरी नवरात्रि' त्योहार के मौके पर, शाकंभरी की आदि शक्ति देवी शाकंभरी के चरणों में समर्पित एक रसीली और मीठी कविता।

॥ अन्नपूर्णा शाकंभरी: सृष्टि का हरा-भरा सहारा ॥

1. पौष का महीना आ गया है, अपने साथ प्रकृति माँ का उत्सव लेकर आया है।
शाकंभरी का यह त्योहार भक्तों का जमावड़ा लेकर आता है।
अष्टमी को जो शुरू हुआ था, वही चेतना आज भी बह रही है।
देवी की कृपा से, देखो, ये अनाज मिट्टी से उग आए हैं।
🌱 🕉� 🔱 🌿

2. आज बनशंकरी और अंबाबाई के मंदिर सजे हुए हैं।
देवी को तरह-तरह की सब्ज़ियाँ और फल चढ़ाए गए।
शाकंभरी मेरी माँ हैं, जिन्होंने दुनिया की भूख मिटाई।
वह कोनों में रहती हैं, इस शरीर का सहारा। 🍎 🥬 🏛� ✨

3. देवी ने उस भयानक सूखे को अपने दम पर पार किया।
अपने शरीर के अन्न से उन्होंने पूरे ब्रह्मांड की रक्षा की।
उन्होंने अपने भक्तों की पीड़ा को हज़ार आँखों से देखा।
इसीलिए वे प्रेम के इस उफान को 'शताक्षी' कहती हैं।
👁� 🛡� 🌾 🙏

4. बहुत सारी सब्ज़ियाँ चढ़ाई गईं
यह उनका प्रसाद है।
माँ हरी-भरी प्याज़ में पैदा हुई थीं, मानो वे सृष्टि का आधार हों।
कोल्हापुर की गहराइयों में अंबाबाई के रूप का उत्सव मनाया गया।
भक्ति की इस खुशबू से मेरा मन बाज़ार बन गया।
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5. सब्ज़ियों की इस नवरात्रि में
आइए हम प्रकृति की पूजा करें।
आइए हम पेड़ों, घाटियों और औषधियों का ध्यान करें।
अपने रूप में, धरती माँ हरियाली का आशीर्वाद देती हैं।
फिर दुनिया की मुश्किलों पर माया का फूँक मारती है।
🌳 🧘�♀️ 🎋 💖

6. साल के इस आखिरी दिन
देवी के चरणों में प्रणाम।
जीवन की हर किताब उनके प्यार से रोशन हो।
अगले साल की फसलें भी खुशियों से लहलहाएँ।
शाकम्भरी का आशीर्वाद और घर खुशहाली से खिले।
🗓� 🙇�♂️ 💎 🌈

7. जय जय दुर्गा शाकम्भरी
आप पूरे ब्रह्मांड की माँ हैं।
आपके नाम का जाप निरंतर हो, इस भक्त के मुँह में रहे।
नैवेद्य आपका स्वास्थ्य देने वाला, मन को शुद्ध करने वाला मंत्र है।
यह भेंट आपके चरणों में अर्पित हो, यही मेरी जीवन-मशीन है। 🙌 🍎 🚩 🕉�

कविता का छोटा मतलब
यह कविता देवी शाकंभरी के नवरात्रि त्योहार के बारे में बताती है। पौष महीने में जब दुनिया पर संकट आया, तो देवी ने अपने शरीर से अलग-अलग पौधे और सब्जियां पैदा करके दुनिया को बचाया, इसलिए उन्हें 'शाकंभरी' कहा जाता है। इस दौरान कोल्हापुर की अंबाबाई और बनशंकरी देवी को सब्जियों का प्रसाद चढ़ाया जाता है। यह कविता प्रकृति और भक्ति के बीच के खूबसूरत रिश्ते को दिखाती है।

इमोजी समरी
🌱 (अंकुर/प्रकृति) • 🕉� (आदिम शक्ति) • 🔱 (त्रिशूल) • 🌿 (पौधा) • 🍎 (फल) • 🥬 (सब्जियां/हर्ब्स) • 🏛� (मंदिर) • 🌾 (अनाज) • 👁� (शताक्षी देवी) • 🚩 (भक्ति ध्वज) • 🥗 (प्रसाद) • 🗓� (31 दिसंबर) • 🙌 (अनाज)

--अतुल परब
--दिनांक-31.12.2025-बुधवार.
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