॥ उत्तरायण शुरू: अयन पुण्यकाल और सूर्य गाथा ॥📅 🌌 🌗 🔭 ✨ 🌅 🧭 ☀️ 🚶‍♂️ 🔅 💧

Started by Atul Kaviraje, January 01, 2026, 04:54:57 PM

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Atul Kaviraje

अयन करिदिन-अयन पुण्यकाल-सूर्योदय ते सूर्यास्त-

सोमवार, 22 दिसंबर, 2025 को आने वाले 'अयन करिदीन' और **'अयन पुण्यकाल'** पर आधारित खगोलीय और आध्यात्मिक महत्व बताने वाली एक रसीली कविता

॥ उत्तरायण शुरू: अयन पुण्यकाल और सूर्य गाथा ॥

1. पहला कदम: यह सोमवार, 22 दिसंबर, कुदरत का एक बड़ा चमत्कार है,
आज अयन करिदीन आ गया है, सूरज का बदलता रास्ता बहुत बड़ा है।
रात सबसे लंबी होगी, और दिन छोटा होगा,
खगोलीय घटना, मन को बहुत खुशी होती है।

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(मतलब: 22 दिसंबर को साल का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात होती है, जो खगोलीय बदलाव का गवाह है।)

2. दूसरा चरण: अयन पुण्यकाल शुरू हो गया है, सूर्योदय का यह समय,
दक्षिणायन अब खत्म हो गया है, उत्तरायण का चरण आ गया है।
सूरज धीरे-धीरे उत्तर की ओर कदम बढ़ाएगा,
अंधेरे के साम्राज्य से, प्रकाश की चमक बढ़ेगी।

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(मतलब: आज से सूरज दक्षिण से उत्तर की ओर बढ़ना शुरू कर देगा, जिसे हम उत्तरायण कहते हैं। इस वजह से, दिन लंबे होने लगेंगे।)

3. तीसरा चरण: इसे करिदीन माना जाता है, संक्रांति से पहले का समय,
प्रकृति अपना काम करती है, सृष्टि का यह चक्र बदलता है।
सूर्य देव की पूजा करने का यह बहुत ही शुभ समय है,
आइए हम श्रद्धा से अपना जीवन जिएं और अर्घ्य दें।

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(मतलब: सूर्य के राशि बदलने का यह समय पूजा के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है। हम सूर्य देव को अर्घ्य देकर अपना आभार व्यक्त करते हैं।)

4. चौथा चरण: सूर्योदय से सूर्यास्त तक, आज, इस ऊर्जा को इकट्ठा करें,
नेगेटिविटी को जलाएं, प्रकाश के इस स्रोत को लें।
आइए हम प्रकृति के इस चक्र को अपने दिल से नमन करें,
हमें ब्रह्मांड के इन सभी रहस्यों को अपनी आंखों में संजोना चाहिए।

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(मतलब: इस समय सूर्योदय से सूर्यास्त तक, हमें प्रकृति की ऊर्जा को स्वीकार करना चाहिए और खुद से नकारात्मक विचारों को दूर करना चाहिए।)

5. पाँचवाँ कदम: जैसे सूरज बदलता है, वैसे ही इंसानों का यह नज़रिया बदलना चाहिए,
अज्ञान से ज्ञान की ओर, हम सब तरक्की करें।
ठंड की इस लहर में, हम सबको प्यार की गर्मी दें,
नई उम्मीद के साथ, हम सफलता के इस शिखर पर पहुँचेंगे।

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(मतलब: जैसे सूरज अपनी दिशा बदलता है, वैसे ही हमें अज्ञान से प्रकाश (ज्ञान) की ओर बढ़ना चाहिए।)

6. छठा कदम: पुण्यकाल धैर्य और स्थिरता का संदेश देता है,
अंधेरा भले ही बड़ा हो, प्रकाश जीतता है।
साइंस की यह कीमिया, इसमें स्पिरिचुअलिटी का मिलाप,
22 दिसंबर का यह दिन, ज़िंदगी को एक नया जोश देता है।

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(मतलब: यह दिन सिखाता है कि अंधेरा (दुख) कितना भी बड़ा क्यों न हो, आखिर में रोशनी (खुशी) की ही जीत होती है।)

7. सातवां कदम: आपको सूरज जैसी चमक और चांद जैसी शांति मिले,
अमावस्या के शुभ दिन, खुशियों की यह क्रांति हो।
आइए हम इस ब्रह्मांड के शासक के चरणों में सिर झुकाएं,
सभी प्राणी खुश रहें, धन की सभी इच्छाएं पूरी हों।

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(मतलब: अयन के इस शुभ दिन पर सभी खुश और शांत रहें और ब्रह्मांड के निर्माता ईश्वर की कृपा सभी पर बनी रहे।)

इमोजी समरी
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--अतुल परब
--दिनांक-22.12.2025-सोमवार.
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