॥ देवबाग का पवित्र मेला: विठु-रखुमाई का समारोह ॥🌊 🚩 🥁 🙌 ✨ 🏝️ 🐚 🕉️ 🖼️ 💙

Started by Atul Kaviraje, January 01, 2026, 04:55:40 PM

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Atul Kaviraje

विठ्ठल-रखुमाई जत्रा-देवबाग, तालुका-मालवण-

सोमवार, 22 दिसंबर, 2025 को कोंकण के खूबसूरत देवबाग (मालवन) में लगने वाले विट्ठल-रखुमाई मेले के मौके पर एक रसीली और भक्ति से भरी कविता

॥ देवबाग का पवित्र मेला: विठु-रखुमाई का समारोह ॥

1. पहला कदम: आज मालवन की मिट्टी में भक्ति की ये खुशबू फैली है,
देखो देवबाग के किनारे, विठु-रखुमाई का मेला सजा है।
ये सोमवार खास दिन है, मेला बड़ा उत्सवी है,
भक्तों के ये कदम मुड़े हैं, विट्ठल के इस दर की ओर।

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(मतलब: मालवन तालुका के देवबाग में विट्ठल-रखुमाई मेला शुरू हो गया है, और बीच पर भक्ति का ज़बरदस्त जोश दिख रहा है।)

2. दूसरा कदम: विशाल सागर गवाह है, लहरों का यह संगीत गाता है,
देवबाग के पांडुरंग को देखो, यह भक्तों को दर्शन देता है।
विट्ठल और रखुमाई की मूर्तियाँ, देखने में कितनी लुभावनी हैं,
अब ज़िंदगी का यह सारा दर्द नज़र आने के साथ ही गायब हो गया है।

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(मतलब: देवबाग के विट्ठल समुद्र की लहरों के संगीत में अपने भक्तों को दर्शन दे रहे हैं, जिनके मोहक रूप से मन के सारे दुख दूर हो रहे हैं।)

3. तीसरा पड़ाव: मेले का यह पड़ाव अनोखा है, खिलौनों और मिठाइयों की दुकानें,
भजन-कीर्तन गूंज रहे हैं, भक्ति का यह सुंदर गीत।
कोंकणी लोगों का यह त्योहार, आस्था का यह बड़ा पहाड़,
विठु राया के चरणों का प्यार, भक्तों का यह सागर।

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(मतलब: मेले में खिलौनों और मिठाइयों की अलग-अलग दुकानें लग गई हैं, और भजन-कीर्तन की धुनों से पूरा इलाका भक्ति से भर गया है।)

4. चौथा कदम: नारियल और फूलों की मालाएं लेकर, महिलाएं श्रद्धांजलि देने आईं,
घंटियों को भी धुन मिल गई, विट्ठल को श्रद्धांजलि देने के लिए।
परंपरा की यह विरासत, मालवन का यह गौरव,
विट्ठल-रखुमाई के चरणों में, हर कोई झुकता है।

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(मतलब: परंपरा के अनुसार, भक्त नारियल और फूलों से भगवान की पूजा कर रहे हैं। यह मेला मालवण की सांस्कृतिक विरासत का एक अहम हिस्सा है।)

5. पांचवां कदम: सोमवार को इस मेले में, किस्मत का यह मेल हुआ,
भक्तों की इस भीड़ से, देवबाग का इलाका खिल उठा।
विट्ठल-रखुमाई की कृपा हमेशा हम पर बनी रहे,
दुख दूर हो, और हर घर में खुशियां छा जाएं।

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(मतलब: जब से यह मेला सोमवार, 22 दिसंबर को आया है, भक्तों की भारी भीड़ लगी है, और सभी ने भगवान से खुशहाली की प्रार्थना की है।)

6. छठा कदम: मंदिर समुद्र किनारे है, रूप शांत और शीतल है,
मन में भक्ति का दीया जलता है, और यह धूप बिखरती है।
आत्मा पांडुरंग से मिलने को खिंची चली आती है,
इस मेले के मौके पर, जीवन को मतलब मिला है।

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(मतलब: समुद्र किनारे विट्ठल मंदिर में मिलने वाली शांति भक्तों को खींच लाती है। मेले के मौके पर विट्ठल के चरणों में आकर मन को संतुष्टि मिलती है।)

7. सातवां चरण: बोल पुंडलिक वरदे हरि विट्ठल, जय जय रखुमाई,
देवबाग के मेले का महत्व बताया नहीं जा सकता।
अगले साल फिर आना, यही धरुणी मणि ध्यास,
पूरा विठु राया, यही हम सबकी आस।

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(मतलब: भक्त 'पुंडलिक वरदे हरि विट्ठल' के जाप के साथ अगले साल फिर आने का संकल्प लेकर भगवान का आशीर्वाद ले रहे हैं।)

इमोजी समरी
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--अतुल परब
--दिनांक-22.12.2025-सोमवार.
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