.. घोटगे-भेडशी का धारेश्वर: मेला और प्रकृति उत्सव।🙌 👑 🌹 🎊 ✨🤲 🍲 🤝 ☮️ 🕯️

Started by Atul Kaviraje, January 02, 2026, 10:45:14 PM

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Atul Kaviraje

श्री धारेश्वर जत्रा-घोटगे-भेडशी, जिल्हा-सिंधुदुर्ग-

सिंधुदुर्ग जिले के घोटगे-भेडशी में शुक्रवार, 2 जनवरी, 2026 को लगने वाले श्री धारेश्वर मेले के मौके पर, कोंकणी संस्कृति की खुशबू से खास तौर पर सराबोर एक लंबी और इमोशनल मराठी कविता पेश है:

.. घोटगे-भेडशी का धारेश्वर: मेला और प्रकृति उत्सव।

कड़वी 1
मेले का पावन दिन और कोंकण की धरती
शुक्रवार, 2 जनवरी, कोंकण की यह पवित्र धरती,
घोटगे-भेडशी के जंगलों में, भक्ति का यह झरना बहता है।
श्री धारेश्वर मेला आ गया है, खुशियां आ गई हैं, सिंधुदुर्ग के इस राजा को देखो, अपने भक्तों से मिलने निकल पड़े हैं। 🚩 🗓� 🌊 🏔� ✨

मतलब: शुक्रवार, 2 जनवरी, 2026 को सिंधुदुर्ग ज़िले के घोटगे-भेडशी में श्री धारेश्वर मेला है। इस दिन, सुंदर कोंकण की धरती भक्ति के लिए अपार उत्साह से भर जाती है।

कड़वा 2
प्रकृति की गुफाएँ और धारेश्वर रूप
पहाड़ की श्रृंखलाएँ, हरे-भरे पेड़, सफ़ेद किनारे वाला यह पहाड़,
धारेश्वर के दर्शन से, दूरियाँ खुशनुमा हो जाती हैं।
शिव का यह दिव्य रूप, चट्टान के रूप में खड़ा है, जहाँ भक्तों के पैर मुड़ते हैं, आस्था के इस रास्ते पर। 🌳 ⛰️ 💧 🕉� 🧘�♂️

मतलब: घने पेड़ों और पहाड़ से गिरती पानी की धारा के कारण इस जगह को 'धारेश्वर' कहा जाता है। प्रकृति की गोद में बसे महादेव के इस रूप को देखकर मन खुश हो जाता है।

कड़वा 3
मेले की शान और पालकी की रस्म
ढोल-नगाड़ों और झांझ की आवाज़ के बीच, भगवान की पालकी निकलती है,
घोटगे और भेड़शी के सभी लोग, यह कीमती सेवा करते हैं।
भक्त अबीर-गुलाल के रंगों में नहाते हैं, धारेश्वर के चरणों में आते हैं, दुख का यह बोझ उतार देते हैं। 🥁 🎆 🤝 🚩 🛤�

मतलब: पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर भगवान की पालकी निकाली जाती है। भक्त बड़ी खुशी से फूल फेंकते हैं और अपनी सारी मुश्किलें भूलकर भगवान के चरणों में सिर झुकाते हैं।

कड़वा 4
कोंकणी मेला और प्रेम मेला
मिठाई की दुकानें सजी हैं, खिलौने और पालने घूम रहे हैं,
महेरवासिनी घर आती हैं, यह खुशी का रिश्ता है। सटेरी-अम्बा संगे देव, यही मेले का मंच है, सिंधुदुर्ग की इस मिट्टी का, यही सच्ची भक्ति की घट है। 🎡 🍭 🏠 👨�👩�👧�👦 🍬

मतलब: मेले में बच्चों के लिए खिलौने और पालने होते हैं। यह मेला रिश्तेदारों के एक साथ आने का एक शानदार मौका है, जहाँ कोंकणी संस्कृति की गर्माहट देखी जा सकती है।

कड़वे 5
धारेश्वर की महिमा और मन्नत
धारेश्वर वो हैं जो मन्नत पूरी करते हैं, जो मुसीबत में दौड़े चले आते हैं,
जो आस्था की इस एक पुकार पर पल भर में दौड़े चले आते हैं।
उस पानी की धारा में, भक्त पुण्य से नहाते हैं, पाप धोते हैं और जीवन और खुशियों के इस भंडार को भरते हैं। 🛡� 💪 🚿 🌊 🍀

मतलब: धारेश्वर को मन्नत पूरी करने वाला देवता माना जाता है। यहां पवित्र जलधारा में नहाने से मन की गंदगी दूर होती है और भक्त को नई एनर्जी मिलती है।

कड़वे 6
गांव की एकता और धार्मिक एकता
भेड़शी और घोटगे गांव, मिलकर पूजा करते हैं,
सारे भेदभाव छोड़कर, भक्ति का यह दीया जलता है।
अन्नदान की यह सेवा धारेश्वर को प्यारी है, प्यास और भूख मिट जाती है, जब उनके रूप के दर्शन होते हैं। 🤲 🍲 🤝 ☮️ 🕯�

मतलब: घोटगे और भेड़शी दोनों गांवों के लोग एक साथ आकर यह त्योहार मनाते हैं। यहां की सामाजिक एकता और अन्नदान की परंपरा भगवान के आशीर्वाद से और भी समृद्ध है।

कड़वे 7
कृतज्ञता और भक्ति की विदाई
हर हर महादेव की गरज, कोंकण की धरती दुमदुमाली से भरी है,
धारेश्वर मौली, तुम हमारे हो, हमेशा हमारे साथ खड़े रहना।
अगले साल फिर आएंगे, घोटगे-भेदशी भगवान के चरणों में सिर रखेंगे, बिना रुके कहानी गाएंगे। 🙌 👑 🌹 🎊 ✨

मतलब: कोंकण का आसमान भक्तों के 'हर हर महादेव' के नारों से भर जाता है। भक्त अगले साल फिर आने और भगवान का आशीर्वाद लेने का संकल्प लेकर विदा लेते हैं।

इमोजी समरी:
🚩 (लैंडमार्क) • 🗓� (डेट) • 🌊 (कोंकण कोस्ट) • 🏔� (माउंटेन) • 🌳 (नेचर) • ⛰️ (माउंटेन) • 💧 (वाटर) • 🕉� (शिव) • 🧘�♂️ (पीस) • 🥁 (ड्रम) • 🎡 (क्रैडल) • 👨�👩�👧�👦 (फैमिली) • 🛡� (प्रोटेक्शन) • 🚿 (बाथ) • 🤲 (हेल्प) • 🍲 (प्रसाद) • 🙌 (सलाम) • 🎊 (उत्सव)

--अतुल परब
--दिनांक-02.01.2026-शुक्रवार.
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