गांव कैवारी: ग्रामदैवत जात्रा समारोह-🦁 🚩 🥁 🥥 🏵️ 🏡 ✨ 🙏 🎡 🛤️ 🎨 🔴 🌟

Started by Atul Kaviraje, January 04, 2026, 05:27:33 PM

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Atul Kaviraje

ग्रामदैवत यात्रा: इस दौरान महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में कई लोकल मेले और पालकी समारोह होते हैं। 🦁 🚩 🥁 🥥 🏵�

यह रसीली और भक्ति से भरी कविता 'ग्रामदैवत जात्रा' और पालकी समारोह के मौके पर है, जो महाराष्ट्र में ग्रामीण संस्कृति की आत्मा हैं:

गांव कैवारी: ग्रामदैवत जात्रा समारोह
तारीख: 28.12.2025, रविवार

मौका: लोकल मेला, पालकी समारोह और ग्रामदैवत उत्सव

कड़वे 1:
महाराष्ट्र की गोद में, गांव मीठा है,
भक्त ग्रामदैवत मेले में खिंचे चले आते हैं।
आज रविवार है, त्योहार खुशियों का है,
भक्ति और विश्वास की खुशबू फैल रही है।
(मतलब: आज महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में बसे गांवों में ग्रामदैवत मेले का उत्साह है। रविवार होने की वजह से छुट्टी की खुशी और भक्ति की खुशबू हर जगह फैल रही है।) 🏡 🚩 ✨ 🙏 🗓�

कड़वे 2:
गांव की ये खूबसूरत सड़कें रंगोली से सजी हैं,
आज ये सड़कें भगवान से मिलने के लिए भक्त बन गई हैं।
नौवारी नेसुनी माता, जाने को तैयार,
सब दौड़े चले आए, भगवान से मिलने के लिए।
(मतलब: गांव की सड़कों पर रंगोली बनाई गई है और सभी भक्त भगवान के दर्शन करने चले गए हैं। महिलाएं नौवारी साड़ी पहनकर खुशी-खुशी देवी के रास्ते को भरने में शामिल हुई हैं।) 🎨 👗 🥥 🛤� 🚶�♂️

कड़वे 3:
घंटियों की आवाज़ के बीच, अंबर झिलमिला रहा है,
पालकी को देखते ही यह पहाड़ खड़ा है।
गुलाल और फूल, आप छलकते हुए देख सकते थे,
भक्तों के दिल, भगवान के चरणों में मिल रहे थे।
 (मतलब: आसमान वाद्य यंत्रों की आवाज़ से भर गया है और प्रकृति भी पालकी के स्वागत के लिए तैयार है। सभी भक्त गुलाल के छलकने में डूबे हुए हैं।) 🥁 📢 🌸 ⛰️ 🔴

कड़वे 4:
पालकी को कंधों पर उठाए ये गणमान्य लोग चल पड़े,
'उड़ो-उड़ो' के नारों के साथ, खुशी छा गई।
अब्दगिरी और निशान, गांव के देवता के रूप में,
गांव को खुश करते हैं।
 (मतलब: भक्त भक्ति के साथ भगवान के रथ या पालकी को अपने कंधों पर उठाए हुए हैं। जयकारों और पारंपरिक संकेतों से मेले की सुंदरता बढ़ गई है।) 🚩 🦁 🤝 🏆 🔱

कड़वे 5:
पेढ़े-रेवड़ी का यह चढ़ावा, और नारियल का तोहफ़ा,
भक्ति की यह डोर, हे भगवान, सीधे आपके पास है।
छोटे-बड़े सब इकट्ठा हुए हैं, इस मेले के खेल में,
खुशियों का यह झरना, इस मेले में बह रहा है।
 (मतलब: मेले में प्रसाद और खिलौनों का जुलूस निकलता है, और छोटे से लेकर बड़े तक सभी इस मेले का पूरा मज़ा ले रहे हैं।) 🍬 🥥 🎡 👨�👩�👧�👦 🍭

कड़वे 6:
भगवान का गाया हुआ गीत है, इस गांव को,
इस मिट्टी के बच्चों को सुख और समृद्धि दो।
यह मेले की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है,
तुम्हारे नाम आपस में जुड़े हैं, यह सुंदर गीत हमारा।
(मतलब: गांव वाले भगवान से गांव को खुशहाल रखने की प्रार्थना कर रहे हैं। यह मेले की परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और हमारी सांस्कृतिक विरासत है।) 🙌 🌾 🏠 🛡� 📜

कड़वे 7:
आज, 28 दिसंबर, रविवार, यादगार है,
गांव के देवता का यह मेला, हम उन्हें सलाम करते हैं।
हम अगले साल वापस आने की उम्मीद करते हैं,
भगवान आपका भला करे, हमेशा आपके साथ रहे।
(मतलब: इस खूबसूरत रविवार को, हम भगवान को प्रणाम करते हैं। हम अगले साल फिर से इस मेले का अनुभव करें और भगवान का आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ रहे।) 🗓� 🙇�♂️ 🚩 🍯 🌟

सारांश इमोजी: 🦁 🚩 🥁 🥥 🏵� 🏡 ✨ 🙏 🎡 🛤� 🎨 🔴 🌟

हमारे गांव में ग्रामदैवत मेले की सभी गांव वालों को हार्दिक शुभकामनाएं!

--अतुल परब
--दिनांक-28.12.2025-रविवार.
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