गांव का त्योहार: मेले का समापन और पालकी की रस्म-🚩 🥁 🥥 🏵️ 🏠 🏮 🌸 🔱 🤝 🦁

Started by Atul Kaviraje, January 04, 2026, 05:30:18 PM

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Atul Kaviraje

मेला और पालकी: मार्गशीर्ष सांगते के मौके पर महाराष्ट्र में अलग-अलग लोकल गांव के देवी-देवताओं का मेला और पालकी समारोह इस रविवार को बड़े जोश के साथ खत्म होगा। 🚩 🥁 🥥 🏵� 🏠

यह इमोशनल कविता मार्गशीर्ष महीने के खत्म होने और इस मौके पर महाराष्ट्र के गांवों में लगने वाले मेले और पालकी की रस्म पर आधारित है:

गांव का त्योहार: मेले का समापन और पालकी की रस्म
तारीख: 28.12.2025, रविवार

मौका: मार्गशीर्ष का समापन - गांव के देवता का मेला और पालकी की रस्म

कड़वी कविता 1:
मार्गशीर्ष महीना बीत गया, ये गीतों की हवा है,
ये गांव के देवता का मेला है, बाढ़ जैसा है।
इस रविवार की छुट्टी पर, गांव के बच्चे इकट्ठा हुए,
भक्ति के इस सुर में, वे अपनी प्यास और भूख भूल गए।
(मतलब: मार्गशीर्ष का महीना खत्म हो रहा है और गांव के मेले में बाढ़ आ गई है। छुट्टी का दिन होने की वजह से, छोटे-बड़े सभी भक्ति में डूबे हुए हैं।) 🚩 🥁 🥥 🏵� 🏠

कड़वे 2:
फूलों से सजी पालकी, फूलों की ये थाली,
भक्तों के मन में, भक्ति का ये भंडार।
देवताओं के कंधों पर इसे उठाए, देवता चल रहे हैं,
उड़ो-उड़ो के जयकारों के साथ, खुशी छाई हुई है।
(मतलब: भगवान की पालकी फूलों से सजी हुई है और देवता उसे भक्ति भाव से अपने कंधों पर उठाए हुए हैं। भगवान के जयकारों से पूरे गांव में खुशी का माहौल है।) 🏮 🌸 🔱 🤝 🦁

कड़वे 3:
ढोल-नगाड़ों की धुन पर मंदिर गूंज रहा है,
मेले की इस भीड़ में भक्त बेसब्र हो गए हैं।
गुलाल और भंडारे की खुली बहार है,
अब भगवान की पालकी गेट पर आ गई है।
(अर्थ: मंदिर परिसर वाद्य यंत्रों की ध्वनि से भर गया है। गुलाब की शोभा में नहाया हुआ भगवान का पालकी अब गांव के द्वार पर पहुंच गया है।) 🥁 📢 🔴 ✨ 🎊

कड़वे 4:
पेढ़े और रेवड़ियां, हाथ में प्रसाद है,
मेले की यह भीड़, मन को धोखा दे रही है।
खिलौने और पालने, प्रदर्शन की चमक,
भक्त आए हैं, केवल दर्शन की अभिलाषा।
(अर्थ: मेला प्रसाद से भरा है और आंखें पालने और रोशनी से चमक रही हैं। हर भक्त केवल अपने भगवान के दर्शन के लिए आया है।) 🍬 🎡 🍭 🧸 🌟

कड़वे 5:
आज विदाई देते हुए, हे भगवान, मैं गढ़ने प्रस्तुत करता हूं,
अगले साल हम फिर आएं, यह भक्ति गीत लेकर।
यहां हर घर में खुशियां और खुशहाली आए,
इस मिट्टी के इस बच्चे को आपका आशीर्वाद मिले।
(मतलब: मेले को विदा करते हुए, भक्त भगवान से गांव को खुशहाल रखने की प्रार्थना कर रहे हैं। प्रार्थना है कि अगले साल फिर से ऐसा ही उत्साह हो।) 🙌 🌾 🏡 🛡� 💎

कड़वे 6:
परंपरा की यह विरासत, गांव ने इसे सहेज कर रखा है,
मार्गशीर्ष संग का त्योहार इससे भरा है।
एकता के इसी धागे से, परिवार की परंपरा बुनी है,
विश्वास की इसी राह से, पूरी दुनिया बही है।
(मतलब: गांव ने अपनी संस्कृति और परंपरा को बचाकर रखा है। इस मेले की वजह से समाज की एकता मजबूत होती है और दुनिया के दुख दूर होते हैं।) 📜 🤝 🌍 ❤️ ✨

कड़वे 7:
आज, 28 दिसंबर, रविवार, एक सुनहरा दिन है,
पालकी समारोह की याद हमेशा हमारे दिलों में रहेगी।
आपके चरणों में सिर झुकाकर, हमें वरदान दीजिए,
हमारा पूरा जीवन आपकी कृपा से रोशन हो।
(मतलब: 28 दिसंबर के इस सुनहरे रविवार को होने वाला यह समारोह हमेशा याद रखा जाएगा। भगवान का आशीर्वाद सभी के जीवन को रोशन करे, यही मेरी शुभकामना है।) 🗓� 🙇�♂️ 🚩 🍯 🌈

समरी इमोजी: 🚩 🥁 🥥 🏵� 🏠 🏮 🌸 🔱 🤝 🦁 📢 🔴 ✨ 🎊 🎡 🍭 🧸 🌟 🙌 🌾 🏡 🛡� 💎 📜 🌍 ❤️ 🗓� 🙇�♂️ 🍯 🌈

महाराष्ट्र में ग्राम दैवत जात्रा और पालकी समारोह के अवसर पर सभी भक्तों को शुभकामनाएं!

--अतुल परब
--दिनांक-28.12.2025-रविवार.
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