धरती की आवाज़: ग्लोबल वार्मिंग और हमारी ज़िम्मेदारी-🌍 ​​🔥 🏔️ 🌊 🏢 🪓 💨 ⛈️

Started by Atul Kaviraje, January 04, 2026, 07:25:51 PM

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Atul Kaviraje

ग्लोबल वार्मिंग और उत्तरदायित्व-

ग्लोबल वार्मिंग की गंभीर समस्या पर कमेंट करने वाली और हमें हमारी ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाने वाली यह ज्ञान बढ़ाने वाली कविता है:

धरती की आवाज़: ग्लोबल वार्मिंग और हमारी ज़िम्मेदारी

कड़वा 1:
धरती माँ गर्म हो रही है, टेम्परेचर बढ़ रहा है,
नेचर के इस गुस्से का बहाव बदल रहा है।
बर्फ की चोटियाँ पिघलने लगी हैं, समुद्र का पानी बढ़ रहा है,
अब, जानवरों और पक्षियों के ये गाने खतरे में हैं।
(मतलब: बढ़ती गर्मी की वजह से धरती का टेम्परेचर बढ़ रहा है और नेचर का बैलेंस बिगड़ रहा है। जैसे-जैसे बर्फ के पहाड़ पिघल रहे हैं और समुद्र का लेवल बढ़ रहा है, सभी जीव-जंतु खतरे में हैं।) 🌍 🔥 🏔� 🌊 🐧

कड़वा 2:
जंगल कट गए हैं और कंक्रीट के ये बड़े-बड़े शहर बन गए हैं,
पक्षी आसरा ढूंढते फिरते हैं, वे कहाँ होंगे?
कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ गई है, साँस लेना मुश्किल हो गया है,
साइंस की तरक्की में, नेचर पिछड़ रही है।
(मतलब: इंसानों ने पेड़ काटकर सीमेंट के जंगल बना लिए, पक्षियों के बसेरे खत्म कर दिए। बढ़ते प्रदूषण की वजह से हवा में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ गई है, जिसका इंसानी सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है।) 🏢 🪓 🦜 💨 😷

कड़वा 3:
मौसम बदल गए हैं अब, ये बारिश बेवक्त आती है,
लेकिन इंसान भूल गया है, ये सब अपनी मर्ज़ी।
कभी गीला, कभी सूखा, सूखा दरवाज़े पर आता है,
धरती की ये गर्म सांसें हमें चेतावनी देती हैं।
(मतलब: ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बारिश का शेड्यूल बदल गया है। बार-बार सूखा और साइक्लोन आना इंसानों को कुदरत की तरफ से दी गई खतरे की चेतावनी है।) ⛈️ 🌪� 🍂 🏜� ⚠️

कड़वा 4:
पानी की ये बर्बादी, प्लास्टिक का ये पहाड़,
प्रदूषण के इस अजगर ने सृष्टि को खा लिया है।
नदियाँ अब ज़हरीली हो गई हैं, कचरे का ये साम्राज्य,
इंसान की इस गलती की वजह से, प्रकृति का ये साम्राज्य ढह गया है।
(मतलब: प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल और पानी के गलत इस्तेमाल की वजह से प्रकृति प्रदूषित हो गई है। नदियों में कचरा फेंकने से पानी के जानवरों और पर्यावरण को बहुत नुकसान हुआ है।) 💧 🚫 🚮 🐍 🐟

कड़वे 5:
अभी समय नहीं बीता है, चलो संभल जाएं,
इस आने वाली पीढ़ी के लिए, चलो नई वनस्पतियां लगाएं।
पेड़ लगाएं, पेड़ जिएं, चलो अब ये मंत्र रखें,
इस धरती की सुरक्षा के लिए, चलो अब थोड़ा सा करें। (मतलब: समय अभी भी हमारे हाथ में है, अगर हम अभी पेड़ लगाने जैसे कदम उठाएँ, तो हम आने वाली पीढ़ी को बेहतर भविष्य दे सकते हैं। हमें पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए।) 🌳 🌱 🤝 👶 🛡�

कड़वे 6:
आइए हम सोलर एनर्जी और साइकिल का इस्तेमाल बढ़ाएँ,
आइए हम सब मिलकर प्रदूषण के इस राक्षस को खत्म करें।
बिजली का यह सावधानी से इस्तेमाल, और सोलर एनर्जी का यह साथ,
पर्यावरण की सुरक्षा के साथ, यही हमारी सफलता होगी।

(मतलब: सोलर एनर्जी का इस्तेमाल करना और गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण कम करना समय की ज़रूरत है। एनर्जी बचाकर हम पर्यावरण को बचा सकते हैं।) ☀️ 🚲 🔋 🚭 ✅

कड़वे 7:
प्रकृति हमारी दोस्त है, आइए हम इसकी रक्षा करें,
खुशी के इस रास्ते पर, आइए हम शांति से रहें।
आइए, एक-एक कदम बढ़ाएं, धरती को ठंडा करने के लिए,
यह खूबसूरत रचना हमारी है, यह ऐसे ही रहे, हमेशा मुस्कुराती रहे।
(मतलब: प्रकृति हमारी सच्ची दोस्त है। हम सभी को मिलकर धरती का तापमान कम करने के लिए काम करना चाहिए, ताकि यह ग्रह हमेशा हरा-भरा और खुश रहे।) 🍃 🌏 🕊� 🚶�♂️ 🌟

समरी इमोजी: 🌍 ��🔥 🏔� 🌊 🏢 🪓 💨 ⛈️ 🌪� 🏜� 🚫 🚮 🌳 🌱 ☀️ 🚲 🌏 🌟

पर्यावरण की रक्षा सिर्फ़ एक नारा नहीं है, यह हमारी ज़िंदगी का तरीका बन जाना चाहिए। अपने ग्रह को बचाना हम सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।

--अतुल परब
--दिनांक-29.12.2025-सोमवार. 
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