शीर्षक: सच्चा रहबर और सियासी शतरंज-🇮🇳⚖️👑🚫🎭🤝🔥👏

Started by Atul Kaviraje, January 07, 2026, 09:02:01 PM

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Atul Kaviraje

नवजोत सिंह सिद्धू -THOKO TALI SHAYARI- 🚩 राजनीति और नेतृत्व (Politics & Leadership)=
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ईमानदारी: "ठोकरें खाकर भी जो सीधा चले, असली इंसान वही है।"

शीर्षक: सच्चा रहबर और सियासी शतरंज-

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सियासत की गलियों में अब किरदार ढूंढता हूँ,
मैं काँच के महलों में वफादार ढूंढता हूँ!
यहाँ ज़ुबान से चाशनी और दिल में खंज़र रखते हैं,
मैं तो बंजर ज़मीन पर भी गुलज़ार ढूंढता हूँ!

ये कुर्सी, ये रुतबा तो आनी-जानी माया है,
जो जनता के काम आए, वही असली साया है!
ठोक दो ताली, कि वतन की मिट्टी गवाह रहे,
ईमान बेचकर जो जीता, उसने सब कुछ गंवाया है!
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राजनीति में नैतिकता का अकाल-

विवेचन:

किरदार और वफादारी की खोज: इन पंक्तियों के माध्यम से कवि राजनीति के वर्तमान पतन पर कटाक्ष कर रहा है। आज की राजनीति एक 'काँच के महल' जैसी हो गई है, जो बाहर से तो चमकती है पर अंदर से अत्यंत नाजुक और अस्थिर है। यहाँ 'किरदार' (चरित्र) और 'वफादार' लोगों का मिलना दुर्लभ हो गया है। हर तरफ स्वार्थ की चकाचौंध है।

कथनी और करनी का अंतर: शायर कहता है कि नेताओं की 'ज़ुबान पर चाशनी' यानी मीठी बातें होती हैं, लेकिन उनके 'दिल में खंज़र' छिपा होता है। यह पाखंड और धोखेबाजी पर प्रहार है। एक सच्चा नायक वह है जो कठिन परिस्थितियों (बंजर ज़मीन) में भी उम्मीद और विकास (गुलज़ार) के फूल खिलाने का जज्बा रखता हो।

सत्ता की नश्वरता: 'कुर्सी और रुतबा' को महज एक 'माया' (भ्रम) बताया गया है। सिद्धू का दर्शन यह है कि सत्ता स्थायी नहीं है। असली नेता वह नहीं जिसके पास पद है, बल्कि वह है जो जनता के लिए 'साया' (रक्षक) बनकर खड़ा रहे। जो दुःख में काम आए, वही वास्तविक नेतृत्व है।

ईमानदारी की जीत: अंतिम पंक्तियों में 'ठोको ताली' के उद्घोष के साथ यह संदेश दिया गया है कि जो व्यक्ति अपने 'ईमान' का सौदा करके जीत हासिल करता है, वह वास्तव में हार चुका होता है। इतिहास और 'वतन की मिट्टी' केवल उन्हीं को याद रखती है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपना जमीर नहीं बेचा।

निष्कर्ष: यह शायरी राजनीति में नैतिकता, सेवा भाव और अटूट ईमानदारी का आह्वान करती है। यह याद दिलाती है कि दुनियावी पद से कहीं ऊँचा इंसान का अपना चरित्र और जनता का भरोसा होता है।

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--संकलन
--अतुल परब
--दिनांक-07.01.2026-बुधवार.
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