॥ आदिमाया शाकंभरी अवतार ॥🙏 🍚 🧠 😇🪐 🔯 📈 🚩

Started by Atul Kaviraje, January 10, 2026, 08:11:12 PM

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Atul Kaviraje

शाकंभरी पौर्णिमा-
शाकंभरी पूर्णिमा / पौष पूर्णिमा व्रत – इस व्रत का खास महत्व है क्योंकि आज पूर्णिमा है।
शाकंभरी पूर्णिमा: पौष पूर्णिमा को 'शाकंभरी पूर्णिमा' कहते हैं। इस दिन देवी शाकंभरी की खास पूजा की जाती है।
शाकंभरी पूर्णिमा (पौष पूर्णिमा): आज साल की पहली पूर्णिमा है और इसे 'शाकंभरी पूर्णिमा' कहते हैं। इस दिन देवी शाकंभरी का जन्मोत्सव मनाया जाता है।

पौष पूर्णिमा, शनिवार, 3 जनवरी, 2026 के अवसर पर 'शाकंभरी देवी' और 'पौष पूर्णिमा' के महत्व पर आधारित यह विशेष भक्ति कविता:

॥ आदिमाया शाकंभरी अवतार ॥

1.
पौष महीने की इस पूर्णिमा को, प्रकृति हरी-भरी हो गई
माँ शाकंभरी प्रकट हुईं, यह दिव्य अवतार लिया
सूखे के इस संकट को पूरी तरह खत्म करने के लिए, देवी कर्ण ने विनाश किया
अन्नपूर्णा के इस रूप में, उन्होंने दुनिया को यह सहारा दिया 🥬 🌿 🔱 ✨

2.
आँखों से बहते आँसुओं से, उन्होंने सृष्टि को जीवन दिया
उस चिलचिलाती गर्मी में, हरी घास उग आई
अनाज और उन फलों ने खाली अन्न भंडार भर दिए
भक्तों के कल्याण के लिए, माँ के इस रूप ने अवतार लिया 💧 🌱 🍎 📦

3.
आइए शाकंभरी देवी का जन्मोत्सव बड़ी खुशी से मनाएँ
हम माँ के चरणों में तरह-तरह की सब्ज़ियाँ और फल, प्रसाद चढ़ाएँगे
आदि माया शुभ देवी हैं, आइए हम उन्हीं का ध्यान करें
मुसीबतों के इस अंधेरे से, भक्ति से, हम नीचे उतरेंगे 🥦 🍌 🕯� 🛶

4.
यह शनिवार खास दिन है, पौष पूर्णिमा व्रत का दिन
देवी लक्ष्मी की कृपा मिले, जहाँ नेक भावनाएँ निवास करती हैं
चाँदनी की ठंडक से, मन का यह गुस्सा शांत हो
शाकंभरी की इस याद से, जीवन का यह सार्थक खेल 🌕 💰 🧘�♂️ ✅

5.
दान, पुण्य और परोपकार से, आत्मा को वह शांति मिले
माँ के इस आशीर्वाद से, भाग्य का यह कमल खुले
आपका शताक्षी देवी का रूप, स्नेह की यह ममता बहे
भक्ति की इस खुशबू से, हमारा आँगन हमेशा महके 🤲 🪷 🤱 🏡

6.
बुध, बृहस्पति और मिथुन, शुभ फल बरसाएँ
ग्रहों और नक्षत्रों की यह अनुकूलता हर घर में खुशियाँ फैलाए
शांति और समृद्धि बनी रहे, आपका यश खूब बढ़े
पूर्णिमा के इस पावन दिन पर, विनम्र रहें देवी के द्वार 🪐 🔯 📈 🚩

7.
माँ शाकंभरी, हमारी यह सीधी सी प्रार्थना सुन लो
हमें अन्न-जल की कोई कमी न हो, इसका आशीर्वाद दो
हमें हमेशा सत्य के मार्ग पर चलने की बुद्धि दो
हमें भक्ति के रस में सराबोर करो, और जीवन में यह संतोष दो 🙏 🍚 🧠 😇

कविता का अर्थ:
शाकंभरी पूर्णिमा देवी शाकंभरी के प्रकट होने का दिन है।
जब धरती पर भयंकर सूखा पड़ा था, तो देवी ने अपने शरीर से कई तरह की सब्ज़ियाँ, फल और अनाज पैदा करके सृष्टि को बचाया था।
यह कविता देवी के दयालु रूप के बारे में बताती है और पौष की पूर्णिमा के दिन मिलने वाले ग्रहों के शुभ फलों और आध्यात्मिक शांति का ज़िक्र करती है।

शब्दों और इमोजी की खास बातें:
सब्ज़ी: 🥬 (पालक), 🌿 (हरियाली), 🌱 (अंकुर), 🥦 (पत्तागोभी) — देवी के सब्ज़ी वाले रूप के निशान।

पवित्रता और भक्ति: 🔱 (त्रिशूल), 🙏 (सलाम), 🕯� (दीपक), 🚩 (झंडा) — देवी की पूजा और आस्था।

खुशहाली और खाना: 🍎 (फल), 📦 (खलिहान), 💰 (लक्ष्मी/पैसा), 🍚 (खाना) — अनाज की खुशहाली।

ग्रह और प्रकृति (कॉस्मिक): 🌕 (पूर्णिमा), 🪐 (ग्रह), 🔯 (शुभ योग), ✨ (चमक) — शुभ समय।

शांति: 💧 (जीवन/जल), 🧘�♂️ (ध्यान), 🪷 (कमल), 😇 (पवित्र आत्मा).

--अतुल परब
--दिनांक-03.01.2026-शनिवार.
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