॥ शाकम्भरी नवरात्रि समापन समारोह ॥🙏 🚩 🕉️ ✨ 🌿 👸 🤲 💎 🥬 🥦 🍎 🍛 👁️ 🛡️ 🔱

Started by Atul Kaviraje, January 10, 2026, 08:12:38 PM

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Atul Kaviraje

शाकंभरी देवी नवरात्र समारोप-
शाकंभरी नवरात्रि खत्म: पौष शुद्ध की अष्टमी से शुरू हुई शाकंभरी देवी की नवरात्रि आज खत्म हो रही है।
शाकंभरी नवरात्रि खत्म: पौष शुद्ध की अष्टमी से शुरू हुई शाकंभरी नवरात्रि आज खत्म हो रही है। आज देवी को कई तरह की पत्तेदार सब्जियों (शकोत्सव) का भोग लगाया जाता है।

पौष पूर्णिमा, शनिवार, 3 जनवरी, 2026 के शुभ अवसर पर, 'शाकम्भरी नवरात्रि समामति' और 'शकोत्सव' के अवसर पर, यह विशेष भक्ति कविता 'शाकम्भरी नवरात्रि समामति' और 'शकोत्सव' के अवसर के लिए है:

॥ शाकम्भरी नवरात्रि समापन समारोह ॥

1.
आज अष्टमी से माँ का यह दिव्य व्रत शुरू हुआ
पूर्णिमा के दिन नवरात्रि का समापन हुआ
लगातार नौ दिनों तक भक्तों, मैंने आपकी महिमा का गुणगान किया
हे माँ शाकंभरी, आपकी महिमा दुनिया से भी बड़ी है 🙏 🚩 🕉� ✨

2.
हरी-भरी प्रकृति, आपका रूप कितना मनमोहक है
आपने ही सूखे को खत्म करने के लिए कृपा का गीत गाया
अन्नपूर्णा का यह रूप, भक्तों को हमेशा दान देता है
आपके दर्शन से, जीवन का यह कल्याण अद्भुत है 🌿 👸 🤲 💎

3.
आज सब्ज़ियों का त्यौहार है, सब्ज़ियों का यह पर्व भारी है
साठ तरह की सब्ज़ियों से, माँ की यह बारात
सब्ज़ियों और फलों का, आपको चढ़ाया गया भोग
संतुष्टि की यह मीठी घास, दुनिया को आज फ़ायदा हुआ है 🥬 🥦 🍎 🍛

4.
आप एक लाख साल की देवी हैं, आप हज़ारों आँखों से देखो
भक्तों के इस संकट में, तुम हमेशा दौड़े चले आते हो
हथियारों की जगह तुम्हारे हाथों में, ये सब्ज़ियों के बोझ सजते हैं
माँ के इस रूप में, लोगों के मन का दुख दूर होता है 👁� 🛡� 🔱 🌸

5.
शनिवार के इस पावन योग में, पूर्णिमा की रोशनी पूरब में है
शाकंभरी का नाम लेने से, मन का दर्द दूर होगा
आज हर घर में, माँ का घंटा बज रहा है
आशीर्वाद की छाया में, तुम हमेशा खुश रहो 🌕 🏠 🔔 😊

6.
आज व्रत का अंत है, खाने का यह आनंद बड़ा है
यही दान का भाव है, इंसानों को न हो कोई कमी
यही प्रकृति की पूजा है, यही देवी की सच्ची सेवा है
पेड़ों और लताओं को बचाकर, आइए सृष्टि के इस अनमोल खजाने को बचाएँ 🌳 🤝 ✅ 🍱

7.
इस त्योहार को अलविदा कहते हुए भक्तों की आंखों में पानी आ गया
अगले बरस जल्दी आना, होठों पर यही शब्द रह गए
शाकंभरी देवी, आपकी, तीनों लोकों की जय-जयकार हो
सुख, शांति और समृद्धि हो, हमारा दान हमारी झोली में आए 🙌 🕯� 🎊 🛐

कविता का छोटा मतलब:
पौष अष्टमी से शुरू हुए शाकंभरी नवरात्रि आज पूर्णिमा पर खत्म हो रहे हैं।
इस दिन को 'शकोत्सव' कहा जाता है, क्योंकि देवी को कई तरह की सब्जियों का महाभोग लगाया जाता है।
यह त्योहार इस बात का आभार जताने के लिए मनाया जाता है कि देवी ने अपने शरीर से पौधे बनाए और दुनिया की भूख मिटाई।
प्रकृति का संरक्षण और खाने का सम्मान इस त्योहार का मुख्य मकसद है।

सिर्फ़ इमोजी समरी:
🙏 🚩 🕉� ✨ 🌿 👸 🤲 💎 🥬 🥦 🍎 🍛 👁� 🛡� 🔱 🌸 🌕 🏠 🔔 😊 🌳 🤝 ✅ 🍱 🙌 🕯� 🎊 🛐

सिर्फ़ वर्ड समरी:
त्योहार: शाकंभरी नवरात्रि, शकोत्सव, शकट सेरेमनी, पौष पूर्णिमा।

प्रसाद: पत्तेदार सब्ज़ियाँ, साठ तरह की सब्ज़ियाँ, फल, अन्नपूर्णा, तृप्ति।

देवी के रूप: शताक्षी, प्रकृति रूप, आदिमाया, ममता, जगदम्बा।

भक्ति: जाप, अर्पण, नाम जपना, आशीर्वाद, आभार।

प्रकृति: हरियाली, पेड़-लताएं, सृजन, अनाज, सूखा राहत।

--अतुल परब
--दिनांक-03.01.2026-शनिवार.
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