॥ आई कालूबाई के पहाड़ गूंजें ॥⛰️ 🚩 🛐 ✨ 🥁 🌸 🎊 🗣️ 🪔 🤱 🕯️ ❤️ 🍋 🌕 🙏 ✅ 🌳

Started by Atul Kaviraje, January 10, 2026, 08:14:47 PM

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Atul Kaviraje

काळुबाई यात्रा-मंIढरगाव-
श्री काळुबाईदेवी यात्रा-मंIढरगाव-

यह भक्ति कविता पौष पूर्णिमा के मौके पर सतारा जिले के मशहूर तीर्थस्थल मांधरदेव (मांधारगांव) की 'आई कालूबाई' देवी की भव्य तीर्थयात्रा को समर्पित है:

॥ आई कालूबाई के पहाड़ गूंजें ॥

1.
सतारा जिले की पहाड़ की चोटी, मांढरगढ़ का खूबसूरत गांव
कालूबाई मौली तुजी, भक्तों की जुबान पर तेरा नाम
पौष पूर्णिमा की रोशनी पड़ी, तीर्थ यात्रा का ये समारोह बड़ा है
किले पर तेरे दर्शन के लिए, भक्तों का ये घना सैलाब ⛰️ 🚩 🛐 ✨

2.
आज किला फूलों से लदा है, चोटियां खुशी से नहाई हैं
'कालूबाई के नाम से, मेरा कल्याण होगा', मंत्र लगातार जप रहे हैं
पालकी धूम-धाम से निकली, ढोल-झांझों की गड़गड़ाहट देखो
मां के इस पावन दरबार में, भक्ति में डूबो 🥁 🌸 🎊 🗣�

3.
माथे पर, नई साड़ी, नया पादर पहने,
खुशबूदार औरत करती है पूजा,
मन में बसाए, नंदादीप है अखंड ज्योति,
गर्भगृह में वो तेजस्वी रूप,
संकट से तूने मुझे बचाया,
तू ही मेरी माँ है, तू ही अनूप है 🪔 🤱 🕯� ❤️

4.
ये शनिवार सौभाग्यशाली दिन है,
कालूबाई को अति प्रिय, पूर्णिमा की इस ठंडी रात में,
भक्ति सबकी सक्रिय है, नींबू और प्रसाद का मान,
माँ के चरणों में चढ़ाऊँगा, अन्याय का नाश करूँगा,
तेरी शक्ति पर ध्यान लगाऊँगा 🍋 🌕 🙏 ✅

5.
इन सरल, भोले भक्तों की, तू ही सच्ची माँ है,
दुनिया की इस चिलचिलाती धूप में, तेरे प्यार की छाया,
माँ कालूबाई, पहाड़ों की मालकिन, तू बुलाने पर दौड़ी आती है,
आशीर्वाद का हाथ थामे, खुशियों की सौगात देती है, 🌳 🤱 🤝 🛡�

6.
शिखर पर झंडा लहराता है, हवा खेलती है खुशी
ये खजाने का जश्न है, भक्ति के गीत के साथ
खुश मन नाम लेते हैं, ये दुख के पहाड़ छोड़ जाते हैं
माँ के इस दरबार में, ये किस्मत के खेत भर जाते हैं 🚩 🟡 🎶 😊

7.
पौष पूर्णिमा की ये तीर्थयात्रा, मंधारदेवी का गुणगान
आई कालूबाई हमेशा आपकी, हम आभारी रहें
अगले साल, जल्दी आओ, हम आपका आशीर्वाद मांगते हैं, हे माँ
हमारी पूरी दुनिया को खुशियों और शांति से भर दो 🙌 🏠 🎇 😇

कविता का छोटा मतलब:
पौष पूर्णिमा पर मंधारदेव (मांधारगांव) में आई कालूबाई की तीर्थयात्रा बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है।
इस दिन, पहाड़ों पर **'चंगभालम'** बजाया जाता है और गुलाब के फूल उड़ाए जाते हैं।
देवी कालूबाई वो शक्ति हैं जो मुसीबत से बचाती हैं और भक्तों की रक्षा करती हैं। यह कविता माँ के चरणों में एक श्रद्धांजलि है और उनके प्रति आभार व्यक्त करती है।

सिर्फ़ इमोजी समरी:
⛰️ 🚩 🛐 ✨ 🥁 🌸 🎊 🗣� 🪔 🤱 🕯� ❤️ 🍋 🌕 🙏 ✅ 🌳 🤱 🤝 🛡� 🚩 🟡 🎶 😊 🙌 🏠 🎇 😇

सिर्फ़ वर्ड समरी:
जगह: मंधारदेव, मंधारगढ़, सतारा, पहाड़ की चोटी, पीक।

अलार्म: चंगभाला, जयजयकार, कालूबाई के नाम पर ढोल-ताशा।

रस्म: ओटी पूजन, मालवत, नैवेद्य, लिंबू, पालकी समारोह।

रूप: माँ कालूबाई, मौली, स्वामिनी, शक्ति, रक्षककर्ती।

समारोह: पौष पूर्णिमा, यात्रा, गुलाल उड़लन, भंडारा, नंदादीप।

--अतुल परब
--दिनांक-03.01.2026-शनिवार.
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