॥ कुल चर ही सच्चा धर्म है ॥🙏 🚩 🏠 ✨ 🥁 🪔 🕯️ 📈 🍛 🥥 🥣 🔱 🌕 🤝 📖 ✅ 🤱 🛡️

Started by Atul Kaviraje, January 10, 2026, 08:15:28 PM

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Atul Kaviraje

कुलधर्म-

शनिवार, 3 जनवरी, 2026, पौष पूर्णिमा के अवसर पर, यह विशेष भक्ति कविता 'कुल धर्म और कुल चर' का महत्व बताती है:

॥ कुल चर ही सच्चा धर्म है ॥

1.
पुरखों की बचाई हुई परंपरा, वही हमारा कुल चार है
कुल देवता के चरणों में सिर झुकाकर, हमें जीवन का सहारा मिलता है
पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है, भक्ति की यह पवित्र गंगा
कुल धर्म का पालन करने से मन का दंगा दूर होता है 🙏 🚩 🏠 ✨

2.
साल में कम से कम एक बार, हमें देवताओं के लिए गाना चाहिए
कुल धर्म के अनुष्ठान करके, हमें भगवान का पैसा जमा करना चाहिए
तालाब भरना, भ्रम पैदा करना, यही हमारी संस्कृति है
कुल देवता की कृपा से ही, हमारा यश बढ़ता है 🥁 🪔 🕯� 📈

3.
माँ भवानी, खंडोबा या जो भी कुल स्वामी हैं
उनकी एक पुकार पर, हम हमेशा मशहूर रहें
प्रसाद चढ़ाने की भावना के साथ, मीठा और रसीला
कुल धर्म के प्रकाश से, हमारा समय उज्ज्वल होगा 🍛 🥥 🥣 🔱

4.
हमारा यह सरल और सीधा तरीका, वंश का यह सम्मान
कुल के रीति-रिवाजों को मानने से, घर का यह सम्मान बढ़ेगा
शनिवार का योग आया है, यह पूर्णिमा
आइए अपने कुल का यह मंत्र श्रद्धा से जपें 🌕 🤝 📖 ✅

5.
यह कुल सुरक्षित रहे, मुसीबतें टलें
कुल देवता का प्यार हमें हमेशा मिलता रहे
गर्व से, सबको सुनाएं, अपने कुल की यह कहानी
विश्वास से, उस देवता को शीश झुकाएं 🤱 🛡� 🙇�♂️ 🌟

6.
आइए अपने बच्चों को संस्कारों का यह तोहफा दें
कुल की इस विरासत को हमेशा आगे बढ़ाएं
आइए हम सब मिलकर रहें, यही मांगें
धर्म के इस रास्ते पर, सच्चाई के साथ चलें 👨�👩�👧�👦 🌱 🛤� ❤️

7.
पौष पूर्णिमा के पावन दिन पर, आइए हम अपना संकल्प दोहराएँ
आइए अपने घरों को कुल की संस्कृति से भर दें
ऐ तुलजा, काल भैरव, जो कुल का सहारा हैं
आइए उनके चरणों में सिर झुकाएँ, आइए हम अपनी जान बचाएँ 🔔 🌸 🏠 😇

कविता का छोटा मतलब:
'कुल धर्म' का मतलब है हमारे पुरखों से चली आ रही कुल की धार्मिक परंपरा और रीति-रिवाजों का पालन।
हर परिवार का एक कुल देवता होता है, जिनकी पूजा से परिवार में सुख, शांति और खुशहाली आती है।
यह कविता अपनी जड़ों से जुड़ने, संस्कृति को बचाने और कुल देवता के प्रति आभारी होने का संदेश देती है।
पौष पूर्णिमा जैसे पावन दिन पर यह रस्म करना बहुत फलदायी माना जाता है।

सिर्फ़ इमोजी समरी:
🙏 🚩 🏠 ✨ 🥁 🪔 🕯� 📈 🍛 🥥 🥣 🔱 🌕 🤝 📖 ✅ 🤱 🛡� 🙇�♂️ 🌟 👨�👩�👧�👦 🌱 🛤� ❤️ 🔔 🌸 🏠 😇

सिर्फ़ शब्द समरी:
परंपरा: कबीले का रिवाज़, कबीले का धर्म, विरासत, पूर्वज, संस्कृति।

भक्ति: कबीले का देवता, कबीले का स्वामी, तालाब भरना, उलझन, चढ़ावा।

फल: सुख-समृद्धि, शोहरत, सुरक्षा, संतुष्टि, संस्कार।

दिन: पौष पूर्णिमा, शनिवार, शुभ मुहूर्त, संकल्प।

चिह्न: देवहरा, मालवत, प्रसाद, आशीर्वाद, एकता।

--अतुल परब
--दिनांक-03.01.2026-शनिवार.
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