॥ माँ यमाई, औंध की माता ॥⛰️ 🚩 🛐 ✨ 🛕 🟡 🗣️ 🧘‍♂️ 👸 🛡️ 🪔 🌸 🌕 🥁 🏠 ✅ 🙇‍♂

Started by Atul Kaviraje, January 10, 2026, 08:16:09 PM

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Atul Kaviraje

यमाई यात्रा-औंध, जिल्हा-सातारा-

पौष पूर्णिमा के शुभ अवसर पर, 3 जनवरी 2026, शनिवार को, सतारा जिले के औंध में श्री यमाई देवी के भव्य तीर्थ को समर्पित यह भक्ति कविता:

॥ माँ यमाई, औंध की माता ॥

1.
सतारा जिले में औंध शहर, पहाड़ की चोटी पर तेरा धाम
ऐ यमाई, तेरी माँ, तेरा रूप बहुत महान है
पौष पूर्णिमा का उजाला पड़ा, किले पर बहुत बड़ी भीड़ जमा हुई
भक्तों के इस जमावड़े से भक्ति का दिव्य समारोह सजा ⛰️ 🚩 🛐 ✨

2.
ऊँची चोटी और शानदार सीढ़ियाँ, सभी भक्त आस्था से चढ़े
'माँ यमाई के नाम से, मैं ठीक हूँ', अलार्म लगातार बज रहा है
गुलाल-नारियल के फूल बिखरे, आसमान सुनहरा हो गया
आपके दर्शन से, मन की ये सारी चिंताएँ शांत हो गईं 🛕 🟡 🗣� 🧘�♂️

3.
आपका चार भुजाओं वाला रूप तेजस्वी है,
आपके हाथ में हथियार बाघिन जैसा है।
आपने दुष्टों का नाश किया। आपका ऐश्वर्य बाघिन जैसा है।
साड़ी, चोली और गहनों से, आप कृपा से भरी हैं।
अपने भक्तों की पुकार पर दौड़ती हुई,
आप हमेशा मुझे अपने प्यार की छाया देती हैं। 👸 🛡� 🪔 🌸

4.
यह शनिवार एक भाग्यशाली दिन है, पूर्णिमा मुस्कुरा नहीं रही है।
औंध की इस पवित्र भूमि पर, चेतना की यह खुशबू मौजूद है।
तालाब कोहराम से भरा है, आपकी याद हर घर में है।
आपके आशीर्वाद से, माँ, दुनिया का रथ चलता है। 🌕 🥁 🏠 ✅

5.
कड़ेपाथर की स्वामिनी हो तुम, पंत कुल की देवी हो तुम
न्याय और सत्य देने वाली हो तुम, सबको ये समानता
अहंकार त्याग कर, हम तुम्हारे चरणों में शीश झुकाते हैं
भाग्य का ये द्वार खुल गया, जब हमने भक्ति की पोथी पढ़ी 🙇�♂️ ⚖️ 📚 🌟

6.
शिखर पर लहराता वो ध्वज, आनंद से खेलती हवा
तीनों लोकों में है तुम्हारी कीर्ति, भक्तों ने गीतों से गाया
मृतकों की बलि का अर्पण, तुम तृप्त हो माँ
संकट से हमारी रक्षा करके, हम सुख के राम हैं 🚩 🐎 🍛 😇

7.
पौष पूर्णिमा का ये तीर्थ, औंध का ये बड़ा तीर्थ है
हम पर सदा तुम्हारी कृपा बनी रहे, हे माँ यमाई
अगले साल फिर आना, हमें अपनी निमंत्रण
हम आपके नाम की याद में रहें, यह सार्थक जीवन पूरा हो 🙌 🎊 🌙 😊

कविता का छोटा मतलब:
सतारा जिले के औंध की श्री यमाई देवी कई लोगों की कुलदेवी हैं और पौष पूर्णिमा पर अपनी भव्य तीर्थयात्रा करती हैं।
पहाड़ पर उनका शानदार मंदिर और वहां की कलाकारी बेमिसाल है।
भक्त 'चंगभालम' की धुन पर गुलाब फेंकते हैं।
यह कविता देवी के शक्तिशाली रूप और भक्तों की असीम आस्था के बारे में बताती है, और यह भी प्रार्थना करती है कि वह सभी का भला करे।

सिर्फ़ इमोजी समरी:
⛰️ 🚩 🛐 ✨ 🛕 🟡 🗣� 🧘�♂️ 👸 🛡� 🪔 🌸 🌕 🥁 🏠 ✅ 🙇�♂️ ⚖️ 📚 🌟 🚩 🐎 🍛 😇 🙌 🎊 🌙 😊

सिर्फ़ शब्द समरी:
जगह: औंध, सतारा, डोंगर मठ, शिखर, कड़ेपत्थर।

जागर: चंगभाला, जागर, कन्फ्यूजन, उड़े उड़े यमाई के नाम पर।

रूप: यमई माता, चतुर्भुजी, तेजस्वी, मौली, रक्षक।

यात्रा: पौष पूर्णिमा, गुलाल-खोबर, मेला, ताली भरना, पालकी।

चिह्न: ध्वजा, वरु (घोड़ा), मालवत, नैवेद्य, आशीर्वाद।

--अतुल परब
--दिनांक-03.01.2026-शनिवार.
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