॥ लोक संस्कृति की घुड़ो जात्रा - अवेदे ॥🌴 🚩 🛐 ✨ 🥁 🎶 🙏 🌊 🌸 🎊 🤝 🚩 🌕 🧠

Started by Atul Kaviraje, January 10, 2026, 08:17:30 PM

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Atul Kaviraje

घुडो-अवेडे जत्रा-गोवा-

पौष पूर्णिमा, 3 जनवरी 2026, शनिवार के मौके पर, गोवा के सत्तारी तालुका के अवेदेम में मनाई जाने वाली अनोखी 'घुड़ो जात्रा' के मौके पर एक खास भक्ति कविता:

॥ लोक संस्कृति की घुड़ो जात्रा - अवेदे ॥

1.
गोवा की इस कुदरती गोद में, सत्तारी का यह प्रांत कहलाता है
आवेडे के गांव घुड़ो जात्रा का मंच आज खास अंदाज में दिखता है
पौष पूर्णिमा के पावन दिन, परंपरा का यह जागरण
आदि और गांव के देवी-देवताओं की, भक्त गाते हैं 🌴 🚩 🛐 ✨ की महिमा

2.
घुड़ो इस संस्कृति का केंद्र है, ध्यान का केंद्र है बड़ा
लहरों की इस लय पर, पूरा गांव दिखता है बड़ा
पीढ़ियां बीत गईं, रीति-रिवाज हमारे पुरखे हैं
भक्ति के इस त्योहार में, मन मीठा हो गया है 🥁 🎶 🙏 🌊

3.
मेले का उत्साह बड़ा है, आसमान फूलों से भर गया है
ढोल-नगाड़ों और झांझों की आवाज के बीच, भक्तों की यह रंग-बिरंगी भक्ति
स्थानीय रीति-रिवाजों और परंपराओं से सजा यह दरबार
आवेडेकरों की इस आस्था को, हमारा सलाम 🌸 🎊 🤝 🚩

4.
शनिवार के इस पवित्र दिन, पूर्णिमा पड़ गई है
पुराने जानकार लोगों का यह अनुभव एक शब्द बन गया है
परंपरा की इस विरासत को हमें गर्व के साथ सहेज कर रखना चाहिए
घुड़ो मेले के अवसर पर, हमें सभी खुशियों का आनंद लेना चाहिए 🌕 🧠 📜 ✅

5.
लोगों के सीधे-सादे और मासूम जीवन में, भगवान हमेशा निवास करते हैं
विश्वास की इस एक गांठ में, पूरा समाज हंसता है
आइए हम भगवान को फल और पत्तों का प्रसाद चढ़ाएं
आइए हम सब मिलकर रहें और इस गांव को खुशहाल बनाएं 🥥 🍃 🏠 🌟

6.
लोक कला का यह खूबसूरत नजारा, गोमांतक का यह गहना
एवेदेम के इस मेले में, कोई थक नहीं सकता
खुश मन से, सभी परेशानियां टल जाएंगी
दैवीय शक्ति के इस आशीर्वाद से, हमारी किस्मत खिलेगी 🎨 💃 🛡� 😇

7.
पौष पूर्णिमा का यह मेला, खुशी का यह बड़ा त्योहार
अगले साल फिर आने के लिए, आओ तैयार रहें
अवेदेम के घुड़ो मेले की, भक्ति और संस्कृति की यह तस्वीर हमारे मन में बस जाए, आओ पवित्र सत्र को सहेज कर रखें 🙌 🎆 🌙 😊

कविता का छोटा मतलब:
गोवा के सत्तारी तालुका में 'अवेदेम' में लगने वाला घुड़ो मेला वहां की लोकल लोक संस्कृति और परंपरा का आईना है।
पौष पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह मेला लोगों की एकता और प्रकृति के साथ उनके रिश्ते का प्रतीक है।
इसमें घुड़ो (किसी लोकल देवता या धार्मिक रस्म का प्रतीक) की पूजा की जाती है और गांव की खुशहाली के लिए प्रार्थना की जाती है।
यह कविता उसी पारंपरिक विश्वास और त्योहार की खुशी को समर्पित है।

सिर्फ़ इमोजी समरी:
🌴 🚩 🛐 ✨ 🥁 🎶 🙏 🌊 🌸 🎊 🤝 🚩 🌕 🧠 📜 ✅ 🥥 🍃 🏠 🌟 🎨 💃 🛡� 😇 🙌 🎆 🌙 😊

सिर्फ़ शब्द समरी:
जगह: आवेदे (माशेल-सत्तारी), गोवा, नेचर, कोंकण लैंड।

परंपरा: घुड़ो मेला, लोक संस्कृति, पुश्तैनी रीति-रिवाज, विरासत।

भक्ति: गांव के देवता, आस्था, नाम-पुकार, आशीर्वाद, प्रसाद।

त्योहार: पौष पूर्णिमा, गुलाल, ढोल-ताशा, मेला, लोक कला।

भावना: एकता, खुशी, समृद्धि, शुभता, आभार।

--अतुल परब
--दिनांक-03.01.2026-शनिवार.
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