॥ शक्ति का जागरण: शाकंभरी और कालरात्रि ॥🙏 🚩 🕉️ ✨ 🥬 🌿 🍎 📦 ⚔️ 🔥 🛡️ 🔱 🥦

Started by Atul Kaviraje, January 10, 2026, 08:20:22 PM

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Atul Kaviraje

शाकंभरी व कालरात्री नवरात्र समIप्ती-

पौष पूर्णिमा, शनिवार, 3 जनवरी, 2026 के शुभ अवसर पर, शाकंभरी नवरात्रि और कालरात्रि नवरात्रि के शुभ अवसर पर, यह भक्तिपूर्ण लंबी कविता इस अवसर को समर्पित है:

॥ शक्ति का जागरण: शाकंभरी और कालरात्रि ॥

1.
पौष पूर्णिमा आज हुई, शाकंभरी और कालरात्रि का यह दिव्य उत्सव
समाप्त हुआ, अष्टमी से नौ दिन का मेला शुरू हुआ, व्रत आज पूरा हुआ
आज भक्तों, भक्ति की यह फसल आई है 🙏 🚩 🕉� ✨

2.
शाकंभरी माता प्रकट हुईं, सब्ज़ियों और फलों से सृष्टि को सहारा दिया
माँ ने हरी शॉल ओढ़कर, सूखे को पूरी तरह खत्म कर दिया
अन्नपूर्णा के आशीर्वाद से अन्न के भंडार भर गए 🥬 🌿 🍎 📦

3.
रात का भयानक रूप, दुष्टों का नाश, यह अंधकार को चीर दे
भक्ति की यह दिव्य ज्योति, हाथ में तलवार और निडर मुद्रा लिए,
माँ इस मुसीबत के समय में हमारी रक्षा करने आए, माँ हमारे साथ रहे ⚔️ 🔥 🛡� 🔱

4.
शकोत्सव का चरण अनोखा है, साठ सब्जियों का यह भोग माँ के चरणों में चढ़ाया जाता है
सभी कठिन रोग टल जाएँगे, शनिवार का यह योग साथ आया है
इस भक्ति की खुशबू से ग्रहों की कृपा मिले, भाग्य का यह कमल खुला रहे 🥦 🍛 🪐 ✅

5.
हमारी यह सरल भक्ति, मंत्र जाप से हम स्तब्ध हो जाएँ, अपना अहंकार त्याग दें
आइए हम माँ के चरणों में समर्पित हों, पवित्र भोजन का सम्मान करें
आइए हम सब्जियों के इस रूप में प्रकृति को बचाएँ, आइए हम चेतना के दर्शन करें 🪔 🧘�♂️ 🌳 ❤️

6.
आज नवरात्रि का अंत है, यह आनंद हर घर में आया है,
पूजा की इस शक्ति के साथ, आध्यात्मिक उत्साह आया है,
हम हमेशा दान, पुण्य और परोपकार के मार्ग पर चलेंगे,
माँ के इस आशीर्वाद से, हम दुनिया की यह गाड़ी भर देंगे 🤲 💰 🏠 🌟

7.
यह पूर्णिमा एक उत्सव है, चांदनी छा गई है,
शाकंभरी और कालरात्रि की ठंडक देखो,
हमारे साथ खड़े रहो, अगले साल फिर आओ,
हम तैयार रहें, भक्ति के रस में अपने दिलों को भिगोएं,
और जीवन को सार्थक बनाएं 🌕 🌸 🙌 😊

कविता का छोटा मतलब:
पूर्णिमा के दिन दो नवरात्रि, शाकंभरी और कालरात्रि मनाई जाती हैं।
शाकंभरी देवी प्रकृति और अन्न की देवी हैं, जिन्होंने सूखे में दुनिया को बचाया था।
जबकि कालरात्रि देवी आपदाओं को नष्ट करने वाली आदि शक्ति हैं।
इस दिन देवी को सब्जियों का भोग (शकोत्सव) लगाया जाता है। यह कविता प्रकृति संरक्षण, भक्ति और शक्ति की जीत का प्रतीक है।

सिर्फ़ इमोजी समरी:
🙏 🚩 🕉� ✨ 🥬 🌿 🍎 📦 ⚔️ 🔥 🛡� 🔱 🥦 🍛 🪐 ✅ 🪔 🧘�♂️ 🌳 ❤️ 🤲 💰 🏠 🌟 🌕 🌸 🙌 😊

सिर्फ़ वर्ड समरी:
देवी के रूप: शाकंभरी माता, कालरात्रि, अन्नपूर्णा, आध्याशक्ति, रक्षकर्ति।

त्यौहार: समापन समारोह, नवरात्रि का अंत, शाकोत्सव, पौष पूर्णिमा।

प्रसाद: साठ तरह की सब्ज़ियाँ, फल, खाना, सात्विक भोग।

भक्ति: मंत्रघोष, व्रत, दान, दान, समर्पण।

प्रकृति: हरियाली, सूखा निवारण, धरणी माता, पौधे, चेतना।

दिन: शनिवार, शुभ ग्रह योग, ठंडी चांदनी।

--अतुल परब
--दिनांक-03.01.2026-शनिवार.
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