॥ शिंगवे गांव के राजा श्री थापलिंग ॥⛰️ 🚩 🛐 ✨ 🟡 🗣️ 🎊 🏔️ 🥁 🎶 🌸 🏠 🍛 🌕

Started by Atul Kaviraje, January 10, 2026, 08:22:28 PM

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Atul Kaviraje

थापलिंग यात्रा-शिंगवे, तालुका-आंबेगाव, जिल्हा-पुणे-

पौष पूर्णिमा के शुभ अवसर पर, 3 जनवरी 2026, शनिवार, पौष पूर्णिमा के शुभ अवसर पर, शिंगवे, अंबेगांव तालुका में गांव के देवता श्री थापलिंग देव की भव्य तीर्थ यात्रा को समर्पित यह भक्ति कविता:

॥ शिंगवे गांव के राजा श्री थापलिंग ॥

1.
अंबेगांव का यह इलाका पवित्र है, शिंगवे गांव में थापलिंग देव का बहुत सुंदर मंदिर है।
पौष पूर्णिमा की रोशनी भक्तों के होठों पर पड़ी।
यह तीर्थ यात्रा समारोह महान है। आपके दर्शन के लिए किले पर।
भक्तों का यह घना सैलाब ⛰️ 🚩 🛐 ✨

2.
पहाड़ पर बसा यह मंदिर, प्रकृति की गोद में शांति से बसा, थापलिंग देव के रूप के दर्शन। भक्तों के मन में लगातार 'थापलिंगा का नाम अच्छा है' मंत्र गूंज रहा है।
पहाड़ की श्रृंखला खजाने के संदूक की उमंग से भर गई।
यह पूरी धरती सोने जैसी हो गई है 🟡 🗣� 🎊 🏔�

3.
पालकी धमाके के साथ निकली, लाठी और झंडे लिए भक्त
ढोल और झांझ की आवाज़ पर खुशी से नाच रहे थे।
पुणे जिले के शिंगवे शहर को आज चैतन्य का आशीर्वाद मिला।
थापलिंगा के आशीर्वाद से दुख की यह जंजीर टूट गई। 🥁 🎶 🌸 🏠

4.
इस शनिवार का योग आया है, पूर्णिमा खुल गई है,
पूरनपोली के भोग का समय खुल गया है।
आइए इस भावना को नमन करें, हमें खतरे से बचाएं।
आइए भगवान की इस भक्ति को थामे रहें। 🍛 🌕 🙏 ✅

5.
इस सीधे-सादे और भोले-भाले नागरिक का सच्चा सहारा तुम हो।
ज़िंदगी की इस राह पर, हवा तुम्हारी है। चोटी पर लहराता यह झंडा।
थापलिंगा के दरबार में आज हवा खुशी से खेलती है।
खुशी का यह गीत आया है। 🚩 🐎 🔱 ����🌟

6.
गांव के देवता की इस यात्रा में, आस्था के इस पवित्र रास्ते पर एकता का यह नज़ारा दिखे
भक्तों के खुश मन आगे बढ़ें, पॉल का नाम लेकर
पापों के ये पहाड़ छूट जाएं, मां और भगवान का साथ
भाग्य की ये बेलें खुशियों से भर जाएं 🤝 ❤️ 🛤� 😇

7.
पौष पूर्णिमा का यह मेला, शिंगवे शहर की खुशी, आप हमेशा हमारे साथ खड़े रहें
आपकी कृपा हम पर बनी रहे कि हम अगले साल फिर आएं
आपके नाम की याद में हमें आपका निमंत्रण मिले
यह सार्थक जीवन पूर्ण हो 🙌 🎆 🌙 😊

कविता का छोटा अर्थ:
पुणे जिले के अंबेगांव तालुका में शिंगवे में श्री थापलिंग देव का एक जीवंत मंदिर है। पौष पूर्णिमा पर यहां एक बड़ी तीर्थयात्रा होती है, जिसमें 'चंगभालम' की ध्वनि, पालकी की रस्म और भंडारा तोड़ना मुख्य आकर्षण होते हैं।
यह कविता गांव वालों की भगवान के प्रति आस्था और तीर्थयात्रा की आध्यात्मिक चेतना के बारे में बताती है।

सिर्फ़ इमोजी समरी:
⛰️ 🚩 🛐 ✨ 🟡 🗣� 🎊 🏔� 🥁 🎶 🌸 🏠 🍛 🌕 🙏 ✅ 🚩 🐎 🔱 ����🌟 🤝 ❤️ 🛤� 😇 🙌 🎆 🌙 😊

सिर्फ़ वर्ड समरी:
जगह: शिंगवे, अम्बेगांव, पुणे ज़िला, डोंगरदारी.

भगवान: श्री थापलिंग, गांव के भगवान, रक्षक, भगवान.

यात्रा: पौष पूर्णिमा, पालखी, भंडार उद्धालन, चंगभालम, काठी-निशान.

रस्में: नैवेद्य, अभिषेक, जागरण, जयजयकार, नमन।

भावनाएँ: आस्था, परंपरा, एकता, शुभता, भक्ति का आनंद।

--अतुल परब
--दिनांक-03.01.2026-शनिवार.
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