॥ माँ भगवती, मडबन की देवी ॥🌊 🚩 🛐 ✨ 🏝️ 👸 🙏 🗣️ 🥁 🎶 🌸 🏠 🍬 🌕 🤲 ✅ 👸 ⚔️

Started by Atul Kaviraje, January 10, 2026, 08:23:49 PM

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Atul Kaviraje

भगवती यात्रा-माडबन, जिल्हा-रत्नागिरी-

पौष पूर्णिमा के शुभ अवसर पर, शनिवार, 3 जनवरी, 2026 को, रत्नागिरी जिले के मडबन में माँ भगवती देवी की भव्य तीर्थ यात्रा को समर्पित यह भक्ति कविता:

॥ माँ भगवती, मडबन की देवी ॥

1.
रत्नागिरी के कोंकण तट पर, भगवती देवी का मंदिर, माड़बन गांव का मंदिर, जहां प्रकृति ने जन्म लिया
भक्तों के होठों पर, तेरा नाम, पौष पूर्णिमा की रोशनी, पड़ी
तीर्थ का यह त्योहार महान है, मंदिर तेरे दर्शन के लिए है
भक्तों का यह घना सैलाब 🌊 🚩 🛐 ✨

2.
अनंत सागर के किनारे, मां का यह पावन धाम बसा है, भगवती के इस रूप का दर्शन
दुनिया में यही सबसे बड़ा 'मां भगवती विजयी हो'
भक्ति के इस त्योहार में मंत्र लगातार घूमता रहता है
सबके बीच का यह फासला मिट जाता है 🏝� 👸 🙏 🗣�

3.
ढोल-नगाड़ों और झांझों के शोर के बीच पालकी धमाके के साथ निकली,
 हलचल और जागरण हुआ। चेतना भर गई,
घर-घर में फूल और नारियल बिखरे।
मंदिर भक्ति से सजे थे। भगवती के आशीर्वाद से, किस्मत के ये रास्ते खुल गए। 🥁 🎶 🌸 🏠

4.
यह शनिवार किस्मत का दिन है, पूर्णिमा मुस्कुरा नहीं रही है।
भक्ति की इस जागृति के साथ, जीवन की यह सार्थकता दिख रही है।
फल और मिठाई का प्रसाद। आइए हम उन्हें माँ के चरणों में अर्पित करें, हमें खतरे से बचाएँ।
आइए हम आपकी शक्ति पर ध्यान दें। 🍬 🌕 🤲 ✅

5.
सरल, भोले कोंकण वासियों, दुनिया के इस मोड़ पर आप ही सच्चे सहारे हैं।
हवा आपकी है, यह आपका आठ भुजाओं वाला रूप है।
आप दुष्टों का नाश करते हैं।
आज भगवती के दरबार में, यह खुशियों की बौछार है। 👸 ⚔️ 🛡� 🌟

6.
मंदिर पर झंडा लहराता है, माड़बन के इस तीर्थ में सागर की लहरें गाती हैं
विश्वास का यह बंधन जोड़ता है, खुश मन नाम लेते हैं
दुख में यह दुख माँ भगवती के सानिध्य में धुल जाता है
भाग्य की ये लहरें भर देती हैं 🚩 🌳 ❤️ 😇

7.
पौष पूर्णिमा का यह मेला, माड़बन शहर की खुशियाँ, हमेशा आपके साथ खड़ी रहें
आपकी कृपा हम पर बनी रहे कि हम अगले साल फिर आएँ
आपके नाम की याद में हमें आपका निमंत्रण मिले
यह सार्थक जीवन पूर्ण हो 🙌 🎊 🌙 😊

कविता का संक्षिप्त अर्थ:
रत्नागिरी जिले के माड़बन में समुद्र तट पर स्थित माँ भगवती देवी का स्थान बहुत जागृत माना जाता है। पौष पूर्णिमा पर यहां एक बड़ी तीर्थयात्रा होती है। पालखी समारोह, विशाल समुद्र का नज़ारा, देवी का जागरण और भक्तों की भारी भीड़ इस तीर्थयात्रा की खासियतें हैं।
यह कविता देवी भगवती के रूप और कोंकण की इस पवित्र परंपरा की महिमा करती है।

सिर्फ़ इमोजी समरी:
🌊 🚩 🛐 ✨ 🏝� 👸 🙏 🗣� 🥁 🎶 🌸 🏠 🍬 🌕 🤲 ✅ 👸 ⚔️ 🛡� 🌟 🚩 🌳 ❤️ 😇 🙌 🎊 🌙 😊

सिर्फ़ शब्द समरी:
जगह: माडबन, रत्नागिरी, कोंकण तट, समुद्र का किनारा।

देवी: माँ भगवती, अष्टभुजा, स्वामिनी, रक्षक, जागृत देवी।

यात्रा: पौष पूर्णिमा, पालकी समारोह, जागर-गोंधल, गुलाल उड़ालन।

रस्में: अर्पण, अभिषेक, जयजयकार, दर्शन, ओटी भरना।

भावनाएं: कोंकणी संस्कृति, आस्था, भक्ति का आनंद, शांति, संतोष।

--अतुल परब
--दिनांक-03.01.2026-शनिवार.
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