॥ अचिरने गांव की माता रसाई॥⛰️ 🚩 🛐 ✨ 🙏 👸 🗣️ 💖 🥁 🎶 🌸 🏠 🥥 🌕 🤲 ✅ 👸 🛡️

Started by Atul Kaviraje, January 10, 2026, 08:24:30 PM

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Atul Kaviraje

रासाईदेवी यात्रा-आचिर्णे, तालुका-वैभववाडी-

पौष पूर्णिमा के शुभ दिन, 3 जनवरी 2026, शनिवार को, सिंधुदुर्ग जिले के वैभववाड़ी तालुका में अचिरने की ग्राम देवी श्री रसाईदेवी के पवित्र तीर्थ को समर्पित यह खास भक्ति कविता:

॥ अचिरने गांव की माता रसाई॥

1.
सह्याद्रियों की गोद में बसा, अचिरने गांव रसाईदेवी का बहुत सुंदर मंदिर है।
पौष पूर्णिमा की रोशनी भक्तों के होठों पर पड़ी।
तीर्थयात्रा का यह त्योहार महान है। मंदिर आपके दर्शन के लिए है।
भक्तों का यह घना सैलाब यहां है। ⛰️ 🚩 🛐 ✨

2.
अचिरने शहर की मालकिन, आपने भक्तों की इस मां को मीठी मुसीबतों से बचाया है।
किसी और का नहीं है आपका कनेक्शन, 'मां रसाईदेवी विजयी हों'। भक्ति के इस त्यौहार में मंत्र लगातार घूमता रहता है।
सबके बीच का यह अंतर मिट जाता है। 🙏 👸 🗣� 💖

3.
पालकी धूम-धाम से चली, ढोल-नगाड़ों की धुन में लहराए झंडे-लहरियां
चेतना भर गई, घर-घर फूल-नारियल बिखर गए
भक्ति रस से मंदिर सजाए गए, रसाई के आशीर्वाद से
भाग्य का यह मार्ग खुल गया 🥁 🎶 🌸 🏠

4.
यह शनिवार भाग्य का दिन है, पूर्णिमा मुस्कुरा नहीं रही, भक्ति के इस जागरण से
जीवन की यह सार्थकता दिखती है, फल-ओट्स का प्रसाद
आइए इन्हें मां के चरणों में चढ़ाएं, घर में सुख-समृद्धि आए
आइए इस मन-भक्ति को थामे रहें 🥥 🌕 🤲 ✅

5.
जीवन के इस पथ पर इस सीधे-सादे और भोले-भाले नागरिक के सच्चे सहारे आप ही हैं
हवा आपकी है, यह आपकी कृपा है, यह आपकी जागा हुआ मंदिर
बुलावे पर दौड़े चले आते हो, थामे आशीर्वाद का हाथ
खुशियों की सौगात देते हो 👸 🛡� 🤝 🌟

6.
मंदिर पर झंडा लहराता है, हवा खुशी से खेलती है अचिरने के इस तीर्थ में
गांव नाताले के गीत से, खुश मन नाम लेता है
मां रसाई के सानिध्य में बहता है ये दुख में दुख
भाग्य की ये लहरें भर देती हैं 🚩 🐎 ❤️ 😇

7.
पौष पूर्णिमा का ये मेला, अचिरने शहर की खुशियां, हमेशा तुम्हारे साथ खड़ी रहें
अगले साल फिर आने के लिए तुम्हारी कृपा हम पर बनी रहे
आइए हम तुम्हारा निमंत्रण याद रखें तुम्हारा नाम
ये सार्थक जीवन पूर्ण हो 🙌 🎊 🌙 😊

कविता का संक्षिप्त अर्थ:
सिंधुदुर्ग जिले के वैभववाड़ी तालुका में 'अचिरने' की श्री रसाई देवी मानी जाती हैं बहुत जागृत देवी होने के नाते।
इस देवी की एक बड़ी सालाना तीर्थयात्रा पौष पूर्णिमा पर होती है। पालकी की रस्म, लहरों का नाच और भक्तों की भारी भीड़ इस तीर्थयात्रा की शान है।
यह कविता माँ रसाईदेवी के चरणों में एक श्रद्धांजलि है, और प्रार्थना करती है कि वह सभी के जीवन में खुशी और समृद्धि लाए।

सिर्फ़ इमोजी समरी:
⛰️ 🚩 🛐 ✨ 🙏 👸 🗣� 💖 🥁 🎶 🌸 🏠 🥥 🌕 🤲 ✅ 👸 🛡� 🤝 🌟 🚩 🐎 ❤️ 😇 🙌 🎊 🌙 😊

सिर्फ़ वर्ड समरी:
लोकेशन: अचिरने, वैभववाड़ी, सिंधुदुर्ग, सह्याद्री पर्वत।

देवी: श्री रसाईदेवी, ग्राम देवता, मौली, स्वामिनी, रक्षककर्ती।

यात्रा: पौष पूर्णिमा, पालकी समारोह, तरंग, गुलाल उड़लन, मेला।

रस्में: ओटी भरना, नैवेद्य, जयजयकार, दर्शन, नमस्कार।

भावनाएं: आस्था, कोंकणी परंपरा, खुशी, शांति, गांव की संस्कृति।

--अतुल परब
--दिनांक-03.01.2026-शनिवार.
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