॥ मुनगे गाँव की चैतन्यमयी भगवती ॥🌊 🚩 🛐 ✨ 🏝️ 👸 🙏 🗣️ 🥁 🎶 🌸 🏠 🥥 🌕 🤲 ✅

Started by Atul Kaviraje, January 10, 2026, 08:25:18 PM

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Atul Kaviraje

देवी भगवती यात्रा-मुणगे, तालुका-देवगड-

पौष पूर्णिमा के शुभ अवसर पर, शनिवार, 3 जनवरी, 2026 को, देवगढ़ तालुका के मुनगे में ग्राम देवता आई भगवती देवी के भव्य तीर्थ को समर्पित यह भक्ति कविता:

॥ मुनगे गाँव की चैतन्यमयी भगवती ॥

1.
देवगढ़ का यह कोंकण तट, मुनगे गांव बहुत सुंदर है, आई भगवती का मंदिर है
भक्ति की ठंडी हवा चलती है, पौष पूर्णिमा की रोशनी पड़ती है
तीर्थयात्रा का यह त्यौहार महान है, मंदिर
आपके दर्शन के लिए भक्तों का यह घना सैलाब 🌊 🚩 🛐 ✨

2.
अथाह सागर की गोद में बसा,
मां का यह पावन धाम मुनगेकरों की आस्था का केंद्र है, ऐसा है महान 'आई भगवती विन'
निरंतर भक्ति के इस त्यौहार में घूमता मंत्र
सबके बीच की यह दूरी मिट जाती है 🏝� 👸 🙏 🗣�

3.
पालकी धमाके के साथ निकली, ढोल-नगाड़ों की आवाज में लहरें और झंडे लहराए
चेतना भर गई, हर घर में फूल और नारियल बिखरे
मंदिर को भक्ति से सजाया गया भगवती की कृपा से
भाग्य का यह मार्ग खुल गया 🥁 🎶 🌸 🏠

4.
यह शनिवार सौभाग्य का दिन है, पूर्णिमा इस भक्ति जागरण से मुस्कुरा नहीं रही है
यही जीवन का अर्थ है, फल और जई का प्रसाद
आइए इन्हें मां के चरणों में अर्पित करें, घर में सुख-समृद्धि आए
आइए इस मन और भक्ति को थामे रखें 🥥 🌕 🤲 ✅

5.
जीवन के इस मार्ग पर इस सीधे-सादे और भोले-भाले नागरिक का सच्चा सहारा आप ही हैं
हवा आपकी है, यह आपकी कृपा है, यह आपका जागृत मंदिर है
आशीर्वाद का हाथ थामे, आप बुलावे पर दौड़े चले आते हैं
खुशी का तोहफा आप ही देते हैं 👸 🛡� 🤝 🌟

6.
मंदिर पर झंडा लहराता है, मुनगे के इस तीर्थ में हवा खुशी से खेलती है
गांव नताले के गीत के साथ, खुश मन ले जाते हैं नाम
ये दुख में दुख माँ भगवती के साथ बहता है
ये किस्मत की लहरें हवा में भर जाती हैं 🚩 🐎 ❤️ 😇

7.
पौष पूर्णिमा का ये मेला, मुनागे शहर की खुशी, हमेशा आपके साथ खड़ा रहे
आपकी कृपा हम पर बनी रहे कि अगले साल फिर आएँ
आइए हम आपके नाम को याद रखने के लिए आपका निमंत्रण बनाएँ
ये सार्थक जीवन भरा हो 🙌 🎊 🌙 😊

कविता का छोटा अर्थ:
सिंधुदुर्ग जिले के देवगढ़ तालुका में 'मुनागे' में माँ भगवती देवी का स्थान बहुत ही जागृत और दर्शनीय है।
इस देवी की सालाना तीर्थयात्रा पौष पूर्णिमा पर बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है।
समुद्र तट पर स्थित यह मंदिर, पालकी समारोह और भक्तों का अटूट विश्वास इस तीर्थयात्रा की विशेषताएँ हैं।
यह कविता देवी के रूप और कोंकण की समृद्ध परंपरा का वर्णन करती है।

सिर्फ़ इमोजी समरी:
🌊 🚩 🛐 ✨ 🏝� 👸 🙏 🗣� 🥁 🎶 🌸 🏠 🥥 🌕 🤲 ✅ 👸 🛡� 🤝 🌟 🚩 🐎 ❤️ 😇 🙌 🎊 🌙 😊

सिर्फ़ शब्द समरी:
जगह: मुंगे, देवगढ़, सिंधुदुर्ग, बीच.

देवी: माँ भगवती, गाँव की देवी, मौली, रक्षक, जागृति शक्ति.

यात्रा: पौष पूर्णिमा, पालकी समारोह, लहरें, गुलाल उड़लन, मेला.

रस्में: ओटी भरना, चढ़ावा, जयकारा, दर्शन, नामस्मरण।

भावनाएं: कोंकणी आस्था, परंपरा, भक्ति का आनंद, शांति, गांव की शान।

--अतुल परब
--दिनांक-03.01.2026-शनिवार.
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