॥ सतरदा गांव के रक्षक कालोबा ॥🌴 🚩 🛐 ✨ 🙏 🔱 🗣️ 💖 🥁 🎶 🌸 🏠 🥥 🌕 🤲 ✅ 🛡️

Started by Atul Kaviraje, January 10, 2026, 08:26:52 PM

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Atul Kaviraje

काळोबा जत्रा-सातार्डा-तालुका-सावंतवाडी-

पौष पूर्णिमा के शुभ दिन, शनिवार, 3 जनवरी, 2026 को सिंधुदुर्ग जिले के सावंतवाड़ी तालुका के सतरदा में गांव के देवता श्री कालोबा (कालभैरव) के बड़े मेले के मौके पर यह भक्ति कविता:

॥ सतरदा गांव के रक्षक कालोबा ॥

1.
कोंकण की इस खूबसूरत धरती पर, सतरडा गांव कालोबा भगवान की इस भक्ति के लिए बहुत प्यारा है
कुछ भी कमी नहीं, पौष पूर्णिमा की रोशनी देखो
यह मेला भक्तों के लिए एक शानदार दर्शन है
आज भक्तों का सैलाब किले में भर गया है 🌴 🚩 🛐 ✨

2.
कालभैरव का यह जागृत रूप, आप ही सतरडा शहर के राजा हैं, आपके नाम के स्मरण से मन को एक नई ताजगी मिलती है `भगवान कालोबा की जीत हो'
यह मंत्र इस आस्था के सागर में लगातार घूमता रहता है
सभी के बीच की यह दूरी मिट जाती है 🙏 🔱 🗣� 💖

3.
पालकी धमाके के साथ निकली, ढोल और झांझ की आवाज़ में लहरें और झंडे लहराए
हर घर में गुलाब और नारियल की खुशबू से मन भर गया
मंदिर भक्ति से भर गया, कालोबा के आशीर्वाद से
यह किस्मत का रास्ता बना 🥁 🎶 🌸 🏠

4.
यह शनिवार किस्मत का दिन है, पूर्णिमा की यह ठंडी रात भगवान को बहुत प्यारी है
सबके मन में भक्ति थी, फल-मेवे चढ़ाए
आइए आपके चरणों में चढ़ाएं, गांव में सुख-समृद्धि आए
आइए इस मन को थामकर ध्यान लगाएं 🥥 🌕 🤲 ✅

5.
जीवन की इस राह पर इस सीधे-सादे और भोले-भाले नागरिक के सच्चे सहारे आप ही हैं
हवा आपकी है, यह आपकी कृपा है, यह आपका जागा हुआ मंदिर है
आप बुलावे पर दौड़े चले आते हैं, आशीर्वाद का हाथ थामे
आप खुशियों की सौगात देते हैं 🛡� 🤝 🌟 🔱

6.
मंदिर पर झंडा लहराता है, हवा सातरदा गांव के मेले में खुशी से खेलती है
लोग इस गाने से खुश होते हैं, नाम लेते हैं कोंकणी परंपरा के अनुसार,
इस मेले का मुख्य आकर्षण तरंग डांस होता है, पालकी की रस्म और उसके साथ होने वाला 'अवसर'।
यह कविता गांव वालों की भगवान के प्रति भक्ति और गांव की सुरक्षा के लिए कालोबा देव से की गई प्रार्थनाओं के बारे में है।

सिर्फ़ इमोजी समरी:
🌴 🚩 🛐 ✨ 🙏 🔱 🗣� 💖 🥁 🎶 🌸 🏠 🥥 🌕 🤲 ✅ 🛡� 🤝 🌟 🔱 🚩 🐎 ❤️ 😇 🙌 🎊 🌙 😊

सिर्फ़ वर्ड समरी:
जगह: सतरदा, सावंतवाड़ी, सिंधुदुर्ग, तेरेखोल नदी का इलाका।

देवता: श्री कालोबा, कालभैरव, गांव के देवता, रक्षक, जगाने वाली शक्ति।

मेला: पौष पूर्णिमा, पालकी समारोह, तरंग, गुलाल उड़ान, अवसरी।

रस्में: प्रसाद, मंत्रोच्चार, जयकारा, दर्शन, ओट भरना।

भावनाएं: कोंकणी आस्था, गांव का जीवन, परंपरा, खुशी, सुरक्षा।

--अतुल परब
--दिनांक-03.01.2026-शनिवार.
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