॥ चांदूर नगरीचा सखा सिद्धेश्वर ॥⛰️ 🚩 🛐 ✨ 🙏 🔱 🗣️ 💖 🥁 🎶 🌸 🏠 🍛 🌕 🤲 ✅

Started by Atul Kaviraje, January 10, 2026, 08:27:37 PM

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Atul Kaviraje

चांदूर यात्रा-तालुका-हातकणंगले-

पौष पूर्णिमा, 3 जनवरी 2026, शनिवार के मौके पर, कोल्हापुर ज़िले के हातकणंगले तालुका के चांदूर में गांव के देवता श्री सिद्धेश्वर (चांदूर यात्रा) को समर्पित यह खास भक्ति कविता:

॥ चांदूर नगरीचा सखा सिद्धेश्वर ॥

1.
हातकणंगले तालुका पवित्र है, चांदूर गांव सिद्धेश्वर भगवान का बहुत सुंदर मंदिर है।
भक्तों के होठों पर पौष पूर्णिमा की रोशनी पड़ गई है।
तीर्थयात्रा का यह त्योहार महान है। आपके दर्शन के लिए मंदिर भक्तों से भरा है।
भक्तों का यह घना सैलाब ⛰️ 🚩 🛐 ✨ है

2.
कोल्हापुर की यह पवित्र धरती, आपका यह धाम जाग रहा है। आप चांदूर शहर के कैवारी हैं।
भक्तों के दिलों में आपका सम्मान है।
'चंगभालम' का दिव्य अलार्म वह मंत्र है जो निरंतर भक्ति के इस उत्सव में घूमता है।
सभी की यह दूरी मिट जाती है। 🙏 🔱 🗣� 💖

3.
पालकी धमाके के साथ निकली, ढोल-नगाड़ों की आवाज़ में डंडे और झंडे लहराए
मन खुशी से भर गया, घर-घर फूल और नारियल बिखरे
मंदिर भक्ति से भर गया, सिद्धेश्वर के आशीर्वाद से
भाग्य का यह मार्ग प्रशस्त हुआ 🥁 🎶 🌸 🏠

4.
यह शनिवार भाग्य का दिन है, पूर्णिमा की यह ठंडी रात भगवान को बहुत प्यारी है
भक्ति पूरनपोली के सभी प्रसादों का सक्रिय अर्पण थी
आइए भगवान को प्रसन्न करें, घर सुखी और समृद्ध हो
आइए इस मन को थामे रखें और ध्यान लगाएं 🍛 🌕 🤲 ✅

5.
जीवन के इस मार्ग पर इस सीधे-सादे और भोले नागरिक का सच्चा सहारा आप ही हैं
हवा आपकी है, यह आपकी कृपा है, यह आपका जागा हुआ मंदिर है
आप बुलावे पर दौड़े चले आते हैं, थामे आपके आशीर्वाद का हाथ
आप देते हैं खुशियों की सौगात 🛡� 🤝 🌟 🔱

6.
मंदिर पर झंडा लहराता है, चांदूर गांव के इस तीर्थ में हवा खुशी से खेलती है
गांव नटले के गीत के साथ, खुश मन नाम लेता है
मां और भगवान के साथ में यह दुख का दुख दूर हो जाता है
भाग्य की ये बेलें भरी हुई हैं 🚩 🐎 ❤️ 😇

7.
पौष पूर्णिमा का यह मेला, चांदूर शहर का आनंद, हमेशा आपके साथ खड़ा रहे
आपकी कृपा हम पर बनी रहे कि अगले साल फिर आएं
आइए हम आपके निमंत्रण को आपके नाम का स्मरण करें
यह सार्थक जीवन पूर्ण हो 🙌 🎊 🌙 😊

कविता का संक्षिप्त अर्थ:
कोल्हापुर जिले के हातकणंगले तालुका में 'चांदूर' में श्री सिद्धेश्वर देव का एक प्राचीन और जागृत मंदिर है।
पौष पूर्णिमा पर इस देवता की एक बड़ी तीर्थ यात्रा होती है।
दक्षिण महाराष्ट्र की संस्कृति की तरह, पालकी समारोह, भंडारा का प्रदर्शन और भयंकर कुश्ती का अखाड़ा इस तीर्थ यात्रा की खासियतें हैं।
यह कविता भक्तों के दिलों की चाहत और चांदूर यात्रा के आध्यात्मिक आनंद के बारे में बताती है।

सिर्फ़ इमोजी समरी:
⛰️ 🚩 🛐 ✨ 🙏 🔱 🗣� 💖 🥁 🎶 🌸 🏠 🍛 🌕 🤲 ✅ 🛡� 🤝 🌟 🔱 🚩 🐎 ❤️ 😇 🙌 🎊 🌙 😊

सिर्फ़ वर्ड समरी:
जगह: चंदूर, हातकणंगले, कोल्हापुर ज़िला, दक्षिण महाराष्ट्र.

भगवान: श्री सिद्धेश्वर, महादेव स्वरूप, गाँव के देवता, रक्षक, कैवारी.

यात्रा: पौष पूर्णिमा, पालकी समारोह, भंडार-गुलाल उद्घलन, चंगभालम.

रस्में: नैवेद्य, अभिषेक, जागर, जयजयकार, दर्शन।

भावनाएँ: भक्ति, कोल्हापुरी परंपरा, खुशी, शांति, गाँव की संस्कृति।

--अतुल परब
--दिनांक-03.01.2026-शनिवार.
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