॥ शाकंभरी माता: बादामीनगर की अन्नपूर्णा ॥🌸 🚩 🛐 ✨ 🥬 🌿 🍎 👸 🥦 🍛 🥥 🎶 🌕

Started by Atul Kaviraje, January 10, 2026, 08:31:16 PM

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Atul Kaviraje

शाकंभरी उत्सव-बदामीनगर, जिल्हा-सातारा-

यह खास भक्ति कविता सतारा जिले के बादामीनगर में पौष पूर्णिमा, शनिवार, 3 जनवरी, 2026 के पावन अवसर पर मनाए जाने वाले श्री शाकंभरी उत्सव के अवसर पर है:

॥ शाकंभरी माता: बादामीनगर की अन्नपूर्णा ॥

1.
सतारा शहर के बादामीनगर में भक्ति की
यह खास खुशबू शाकंभरी माता के दर्शन के साथ खत्म हो जाती है।
पौष पूर्णिमा का यह पावन उत्सव
आज शक्ति की इस शुभ चमक के साथ खुशी के साथ खत्म होता है।
मन का यह अंधेरा दूर हो गया है। 🌸 🚩 🛐 ✨

2.
हरी शॉल ओढ़े मां, प्रकृति का यह सुंदर रूप,
शाकंभरी का यह दर्शन मन को खुशी देता है।
उन्होंने खुद सृष्टि को सहारा दिया। फलों और सब्जियों की यह खान बनकर,
बादामीनगर का यह मंदिर मां का बहुत सम्मान बढ़ाता है। 🥬 🌿 🍎 👸

3.
साठ तरह की सब्ज़ियों का चढ़ावा, आज अर्पुणी माता के चरणों में, सब्ज़ियों का यह त्योहार शुभ हो
अन्नपूर्णा के इस आशीर्वाद से ब्रह्मांड पर आपका राज टल गया है
भक्तों से सूखे का यह डर टल गया है।
इन भक्तों के चेहरे पर हमेशा माँ की खुशी बनी रहे। 🥦 🍛 🥥 🎶

4.
यह शनिवार सौभाग्य का दिन है, यह पूर्णिमा शीतल है,
माँ के इस पवित्र नाम में, जीवन लंबा होगा।
आओ हम पवित्र विश्वास का यह दीया जलाएं।
आओ हम दिल की रोशनी जगाएं। शाकंभरी के इस त्योहार में, आओ हम इंसानियत के रिश्ते को बचाकर रखें। 🌕 🪔 🙏 ✅

5.
इस साधारण भक्ति में,
शक्ति का यह महान प्रकटीकरण माँ की इसी एक कृपा के कारण है।
जीवन का यह उद्धार माँ की इसी कृपा से होता है।
आइए हम पेड़-पौधों और प्रकृति को भगवान मानकर पूजें।
आइए बादामीनगर के इस मंदिर में भक्ति के रस में डूब जाएं।

🌳 🤝 🌟 🛡�

6.
खलिहान अनाज से भरे हैं और हर घर में जो शांति है,
वह मां की कृपा से है। जीवन में यह नई क्रांति आती है।
वह दुष्टों का नाश करती हैं। वह भक्तों को सुरक्षा देती हैं।
शाकंभरी माता हमारी मां के रूप में हमारे साथ आती हैं। 🏠 🛡� ❤️ 😇

7.
पौष पूर्णिमा का यह मेला, मां का यह विजयोत्सव,
बादामीनगर के इस आंगन में भक्तों का यह जमावड़ा,
आइए हम सब शाकंभरी के आशीर्वाद के साथ
अगले साल फिर आने के लिए तैयार रहें।
खुशियों की बयार बहे। 🙌 🎊 🌙 😊

कविता का छोटा मतलब:
सतारा के बादामीनगर में, शाकंभरी नवरात्रि पौष पूर्णिमा को 'शकोत्सव' के साथ खत्म होती है।

माना जाता है कि शाकंभरी माता पौधों की देवी हैं और उन्होंने सूखे के दौरान अपने शरीर से सब्जियां बनाकर दुनिया को बचाया था।

इस दिन देवी को 60 तरह की सब्जियां चढ़ाई जाती हैं।

यह कविता प्रकृति की रक्षा और मां अन्नपूर्णा के रूप की महिमा करती है।

सिर्फ़ इमोजी समरी:
🌸 🚩 🛐 ✨ 🥬 🌿 🍎 👸 🥦 🍛 🥥 🎶 🌕 🪔 🙏 ✅ 🌳 🤝 🌟 🛡� 🏠 🛡� ❤️ 😇 🙌 🎊 🌙 😊

सिर्फ़ वर्ड समरी:
जगह: बादामीनगर, सतारा ज़िला, शाकंभरी मंदिर.

देवी: शाकंभरी माता, अन्नपूर्णा, प्रकृति देवी, पौधा लक्ष्मी.

त्यौहार: पौष पूर्णिमा, शकोत्सव, शाक्त सेरेमनी, 60 सब्ज़ियों का भोग.

रस्में: अर्पण, ओटी भरना, पूजन, भक्ति जागर, जयजयकार।

भावनाएँ: आभार, प्रकृति संरक्षण, समृद्धि, शांति, भक्ति आनंद।

--अतुल परब
--दिनांक-03.01.2026-शनिवार.
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