॥ योग गुरु परमहंस: क्रांति की दिव्य ज्योति ॥🌟 👶 🙏 ✨ 🕉️ 🙇‍♂️ 🛐 🧬 🧘‍♂️ 🕯️

Started by Atul Kaviraje, January 13, 2026, 07:06:32 PM

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Atul Kaviraje

परमहंस श्री योगानंद जयंती-

सोमवार, 5 जनवरी, 2026 को आने वाली परमहंस योगानंदजी की जयंती पर उन्हें यह भावभीनी श्रद्धांजलि:

॥ योग गुरु परमहंस: क्रांति की दिव्य ज्योति ॥

1. अवतार का आगमन
गोरखपुर की धरती पर, प्रकाश हुआ, मुकुंद नाम का एक बालक दिव्य कार्य को आया।
माता-पिता के संस्कार में, भक्ति का बीज अंकुरित हुआ, योग के मार्ग की खोज में, फिर, संसार का फंदा टूट गया।
(मतलब: मुकुंद (योगानंदजी का नाम) गोरखपुर में पैदा हुए थे। बचपन से ही उनमें एक दिव्य इच्छा थी, जिसके कारण उन्होंने सत्य की खोज में दुनिया छोड़ दी।) 🌟 👶 🙏 ✨ 🕉�

2. गुरु दर्शन समारोह
परम शिष्य युक्तेश्वर गिरि के चरणों में उन्होंने सिर झुकाया, हृदय की यह अपार भावना गुरु दर्शन से खिल उठी।
आध्यात्मिकता और विज्ञान का एक सुंदर मेल बना, क्रिया योग का दिव्य मंत्र गुरु ने सुनाया।
(मतलब: उन्हें श्री युक्तेश्वर गिरि के रूप में सही गुरु मिले। गुरु ने उन्हें साइंस को मिलाकर क्रिया योग की दीक्षा दी।) 🙇�♂️ 🛐 🧬 🧘�♂️ 🕯�

3. सात समंदर पार का सफ़र
उन्होंने भारत का संदेश पश्चिम की धरती तक पहुँचाया, योग की खुशबू पूरी दुनिया में फैल गई।
'बोस्टन' में हुए उस कॉन्फ्रेंस में सच की आवाज़ गूंजी, जिसने दुनिया को शांति और प्यार का रास्ता दिखाया।
 (मतलब: गुरु के आदेश पर योगानंद अमेरिका गए। वहां उन्होंने भारतीयों के योग को फैलाया और दुनिया को शांति का रास्ता दिखाया।) 🌍 🛳� 📢 🕊� ❤️

4. क्रिया योग का महत्व
सांस लेने-छोड़ने का खेल, यही है 'क्रिया योग', ईश्वर के भीतरी मंदिर में, प्रकाश रूप देखा।
अपने मन को खुश करो, ध्यान की इस ऊर्जा से, दुख दूर भाग जाते हैं, ईश्वर की एकाग्रता से।
(मतलब: क्रिया योग सांस को कंट्रोल करने और भगवान से जुड़ने की कला है। मेडिटेशन से मन खुश होता है और दुख दूर होते हैं।) 🌬� 🔋 🧘�♂️ ⚡ 🌈

5. योगी कथामृत (एक योगी की आत्मकथा)
'योगी कथामृत' किताब ज्ञान के भंडार की तरह है, जो भी इसे पढ़ता है उसे फायदा होता है, जीवन का सार।
कई जिंदगियों को नई दिशा मिली, भक्ति और विज्ञान, गंगा में उभरे।
(मतलब: उनकी किताब 'एक योगी की आत्मकथा' ने दुनिया भर के लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी और उन्हें आध्यात्मिक दिशा दी।) 📖 ✍️ 🎓 🌊 💡

6. प्यारे गुरुमौली
जाति-पात का कोई भेदभाव नहीं था, उन्होंने कभी विश्वास नहीं किया, इंसानियत की सेवा ही उनकी समाधि थी।
उनका मुस्कुराता हुआ चेहरा हमेशा भगवान की चमक था, भक्तों के दिलों में उनका प्यार बहता है।
(मतलब: उन्होंने कभी भेदभाव नहीं किया। यह गुरु, जो मानते थे कि इंसानियत की सेवा ही सच्ची भक्ति है, उनके चेहरे पर हमेशा एक दिव्य मुस्कान रहती थी।) 🤝 😊 💖 🌺 🌟

7. अमर ज्योति
भले ही वे शरीर छोड़ दें, उनकी शिक्षाएं अमर हैं, उनकी लगातार नज़र योग के रास्ते पर है।
आज उनकी जयंती पर, आइए श्रद्धांजलि दें, आइए अपने मन में योग के इस स्वर्ग को खिलने दें।
(मतलब: भले ही योगानंदजी ने महासमाधि ले ली हो, लेकिन उनके विचार अभी भी ज़िंदा हैं। उनकी जयंती पर, आइए हम उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लें।) 🙏 🕯� ♾️ 🌳 🕉�

इमोजी समरी
🌟 👶 🙏 ✨ 🕉� 🙇�♂️ 🛐 🧬 🧘�♂️ 🕯� 🌍 🛳� 📢 🕊� ❤️ 🌬� 🔋 🧘�♂️ ⚡ 🌈 📖 ✍️ 🎓 🌊 💡 🤝 😊 💖 🌺 🌟 🙏 🕯� ♾️ 🌳 🕉�

शब्द सारांश
आध्यात्मिकता - गुरुभक्ति - क्रिया योग - विश्व शांति - ज्ञानांग - निस्वार्थ प्रेम - प्रकाश - साधना - योगी - वंदन

--अतुल परब
--दिनांक-05.01.2026-सोमवार.
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