॥दशमेश गुरु: बहादुरी और भक्ति के सागर ॥✨ 👶 🏰 🌞 🕉️ ⚔️ 🚩 🦁 🛡️ ✊ 🩸 🏹 📜 🤝

Started by Atul Kaviraje, January 13, 2026, 07:10:20 PM

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Atul Kaviraje

गुरु गोबिंद सिंह जयंती (कुछ हिसाब से): सिख समुदाय के 10वें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह की जयंती इसी समय मनाई जाती है (स्थानीय कैलेंडर के आधार पर तारीख अलग हो सकती है)।

दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती के मौके पर, जो सोमवार, 5 जनवरी, 2026 को मनाई जाती है, यह एक खास मार्मिक और इमोशनल मराठी कविता है:

॥दशमेश गुरु: बहादुरी और भक्ति के सागर ॥

1. प्रकाश पर्व का उदय
दिव्य प्रकाश का उदय पटना शहर में हुआ, गुरु गोबिंद सिंह का उदय आया, भक्तों का दिल जीतकर।
दसवें गुरु सिखों के अवतार हैं, सत्य के साक्षात स्वरूप, ज़ुल्म के अंधेरे में, वे रोशनी का आधार बने।
(मतलब: गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म पटना साहिब में हुआ था। उनका जन्म अन्याय के खिलाफ लड़ने और सच्चाई को स्थापित करने के लिए हुआ था।) ✨ 👶 🏰 🌞 🕉�

2. खालसा पंथ की स्थापना
आनंदपुर की धरती पर 'वाहेगुरु' के नाम की गरज हुई, खालसा पंथ की स्थापना हुई, बहादुरी का नया जोश दिया।
'मैं गुस्से के खिलाफ लड़ूंगा', यही उनकी दहाड़ है, उन्होंने अन्याय को दफनाने की योजना बनाई।
(मतलब: उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की और आम आदमी को शेर जैसी ताकत दी और अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया।) ⚔️ 🚩 🦁 🛡� ✊

3. कुर्बानी की कहानी
उन्होंने धर्म की खातिर अपने ही बेटों की कुर्बानी दे दी, और उस समय मुस्कुराते हुए अपनी जान दे दी।
'सरबंस दानी', गुरु का यह बड़ा नाम, इंसानियत की रक्षा करने की उनकी अटूट भावना थी।
(मतलब: उन्होंने अपने चार बेटों और पूरे परिवार की कुर्बानी देकर धर्म की रक्षा की, इसीलिए उन्हें 'सर्वस्व दानी' कहा जाता है।) 🩸 🏹 📜 🤝 🕯�

4. गुरु ग्रंथ साहिब मान्या
उन्होंने खुद शरीर की इस गुरुपद को खत्म किया, गुरु ग्रंथ साहिब में उन्होंने ज्ञान की कहानी जमा की।
'सब सिखान को हुक्म है', गुरु मान्या किताब ने, हमेशा का रास्ता दिखाया, यह पंथ रोशन हुआ।
(मतलब: उन्होंने सिखों को आदेश दिया कि वे लोगों की पूजा करना बंद करें और अब से पवित्र किताब 'गुरु ग्रंथ साहिब' को ही अपना पक्का गुरु मानें।) 📖 🛐 🪔 📜 💎

5. एक संत और एक सैनिक का मेल
हाथ में तलवार और एक साथी, चेहरे पर भगवान का नाम, ऐसा था उनका एक संत और एक सैनिक के तौर पर खूबसूरत स्वभाव।
उनका सिर कभी ज़ालिम ताकत के आगे नहीं झुका, वे महान महावीर थे जिन्होंने बहादुरी से लड़ाई लड़ी।
(मतलब: गुरुजी एक महान संत और एक ही समय में एक पराक्रमी योद्धा थे, उन्होंने अन्याय के सामने कभी हार नहीं मानी।) ⚔️ 🧘�♂️ 🛡� 🚩 🎖�

6. बराबरी का संदेश
उन्होंने जाति और भेदभाव को कुचल दिया, उन्होंने पूरी दुनिया को इंसानियत का धर्म सिखाया।
लंगर की उस प्रथा के ज़रिए उन्होंने बराबरी का पाठ दिया, गुरु ने सबके लिए भक्ति का यह रास्ता बनाया।
(मतलब: उन्होंने सारे भेदभाव खत्म करके बराबरी का संदेश दिया और लंगर के ज़रिए साथ बैठकर खाने की प्रथा को मज़बूत किया।) 🤝 🥣 🍱 🌍 💖

7. यह जयंती समारोह
5 जनवरी के इस दिन, आइए हम गुरु के चरणों में सिर झुकाएं, इस जन्नत को प्रकाश पर्व की रोशनी से रोशन करें।
'वाहेगुरु जी का खालसा', 'वाहेगुरु जी की फत्ते', गुरु के इस विचार के साथ, जीवन को सच्चाई का फ़ायदा मिले।
(मतलब: आज के प्रकाश पर्व पर, आइए हम उनके विचारों पर चलने और जीवन में सच्चाई का रास्ता अपनाने का संकल्प लें।) 📅 🙏 🕯� 🎊 ✨

इमोजी समरी
✨ 👶 🏰 🌞 🕉� ⚔️ 🚩 🦁 🛡� ✊ 🩸 🏹 📜 🤝 🕯� 📖 🛐 🪔 📜 💎 ⚔️ 🧘�♂️ 🛡� 🚩 🎖� 🤝 🥣 🍱 🌍 💖 📅 🙏 🕯� 🎊 ✨

शब्द सारांश
गुरु गोविंद सिंह - प्रकाश पर्व - खालसा पंथ - बलिदान - गुरु ग्रंथ साहिब - बहादुरी - समानता - वाहेगुरु - लंगर - भक्ति

--अतुल परब
--दिनांक-05.01.2026-सोमवार.
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