॥ गैर-बराबरी की खाई: इंसानियत की लड़ाई ॥🏙️ 🏚️ 💰 😓 ⚖️ 🥘 🥣 🚫 🔥 🍽️ 🎓 📚 ✏

Started by Atul Kaviraje, January 13, 2026, 07:17:42 PM

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Atul Kaviraje

आर्थिक असमानता: बढ़ती खाई-

यह सोच-समझकर लिखी गई कविता समाज में आर्थिक गैर-बराबरी और अमीर-गरीब के बीच बढ़ते अंतर जैसे नाजुक विषय पर आधारित है:

॥ गैर-बराबरी की खाई: इंसानियत की लड़ाई ॥

1. दो छोरों की दुनिया
एक तरफ ऊंची हवेली, शीशे का महल, दूसरी तरफ गेट वाली झोपड़ी, ज़िंदगी हो गई है बेहाल।
दौलत की चकाचौंध में, दो वक्त के खाने के लिए गरीबों का ये पसीना, राम का काम है।
(मतलब: समाज में एक तरफ ऐशो-आराम की ज़िंदगी जीने वाले लोग हैं, तो दूसरी तरफ गरीब लोग हैं जो सादे खाने के लिए दिन भर मेहनत करते हैं।) 🏙� 🏚� 💰 😓 ⚖️

2. खाने का वो निवाला
यहां पांच कोर्स के खाने की प्लेट में, कितना बर्बाद होता है, वहां कोई भूखा बैठा रोता है।
एक को दावत में अपच हो जाती है, तो दूसरे के चूल्हे पर बस काली राख जलती है।
(मतलब: एक तरफ खाना बर्बाद हो रहा है, तो दूसरी तरफ कई घरों में चूल्हा नहीं है, यह असमानता की बहुत बड़ी त्रासदी है।) 🥘 🥣 🚫 🔥 🍽�

3. पढ़ाई में यह अंतर
बड़े स्कूल की फीस भरते हुए अमीरों को कुछ नहीं दिखता, गरीबों के पास पेन या पेंसिल नहीं होती।
समझदार होने के बावजूद गरीब बच्चा कैसे पीछे रह सकता है? पैसे के इस खेल में उसके सपने बह जाते हैं।
(मतलब: अमीरों के बच्चे महंगी पढ़ाई की वजह से आगे बढ़ते हैं, लेकिन गरीबों के समझदार बच्चे पैसे की कमी की वजह से पढ़ाई से ही वंचित रह जाते हैं।) 🎓 📚 ✏️ 🎒 📉

4. सेहत की यह चमक
बीमारी के संकट में, यहाँ पैसा ही इज्जत है, गरीब की जान अस्पताल जाकर कट रही है।
बड़े अस्पतालों में, सिर्फ़ पैसा ही इलाज है, लेकिन गरीबों की किस्मत में, सिर्फ़ सरकारी मदद और सहारा है।
(मतलब: हेल्थ केयर एक बेसिक ज़रूरत है, लेकिन यह पैसे पर निर्भर हो गई है, जिससे गरीबों के लिए इलाज करवाना मुश्किल हो गया है।) 🏥 💉 💊 🩺 💔

5. मेहनत का यह इनाम
जो दिन भर पसीना बहाता है, उसके पास पहनने को कुछ नहीं है, जो आरामकुर्सी पर बैठता है, उसके लिए लक्ष्मी की यह भीड़।
मेहनत की यह बेइज्ज़ती देखकर, भगवान भी पिघल जाते हैं, इंसानियत का सोता अब क्यों सूख जाता है?
(मतलब: काम करने वाले हाथों को सही मेहनताना नहीं मिलता, जबकि अमीरों की दौलत आसानी से बढ़ती है, यह आर्थिक नाइंसाफ़ी है।) ⚒️ ��🛋� 💸 📉 🥀

6. सपनों की ये राख
मखमली गद्दे पर, खुशियों के सपने आते हैं, गरीबों की इन आँखों में, डर में नींद खो जाती है।
कल की ये चिंता बड़ी है, अभी क्या खाएँ? ऐसे ही यहाँ गैर-बराबरी की ये गाथा चलती रहती है।
(मतलब: गरीबों की पूरी ज़िंदगी बस कल का इंतज़ाम करने में ही निकल जाती है, जिसकी वजह से वो बड़े सपने नहीं देख पाते।) 🛌 🛌 💤 💭 🌩�

7. बराबरी का ये जुनून
चलो अब इस दूरी को कम करते हैं, इंसानियत के नाते, गरीबों का भी साथ देते हैं, प्यार भरे हाथ से।
सभी को बराबर मौके मिलें, यही हमारा मंत्र है, तभी डेमोक्रेसी का ये सिस्टम सच में खुशहाल होगा।
(मतलब: जब सभी को आगे बढ़ने का बराबर मौका मिलेगा और गरीबों की मदद की जाएगी, तभी समाज में सच्ची खुशी और शांति होगी।) 🤝 🌍 ✨ 🙏 🏁

इमोजी समरी
🏙� 🏚� 💰 😓 ⚖️ 🥘 🥣 🚫 🔥 🍽� 🎓 📚 ✏️ 🎒 📉 🏥 💉 💊 🩺 💔 ⚒️ 🛋� 💸 📉 🥀 🛌 🛌 💤 💭 🌩� 🤝 🌍 ✨ 🙏 🏁

शब्द सारांश
आर्थिक असमानता - बढ़ता अंतर - गरीब अमीर - संघर्ष - भोजन - शिक्षा - स्वास्थ्य - कठिनाई - मानवता - समानता

--अतुल परब
--दिनांक-05.01.2026-सोमवार.
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