निरोप मौलीचा - मुंगे गांव की भगवती 🌺🙏🚩🌺 🚩 ✨ 😊 🥁 🎊 💖 🏵️ 🛡️ 🙏 🌊 🔱 🍯

Started by Atul Kaviraje, January 14, 2026, 02:13:19 PM

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Atul Kaviraje

देवी भगवती उत्सव समIप्त-मुंगे, तालुका-देवगड-

मुंगे (तालुका-देवगढ़) में गांव की देवी देवी भगवती के त्योहार के खत्म होने के मौके पर भक्ति से भरी यह खास मराठी कविता:

कविता: निरोप मौलीचा - मुंगे गांव की भगवती 🌺🙏🚩

1. पहली खट्टी-मीठी:
मुंगे गांव का दरबार सजा, भक्तों का यह सैलाब,
भगवती माता के दर्शन से दुख दूर,
आज बुधवार है, शुभ दिन, त्योहार का यह मीठा अंत,
मन में माया भर गई, भक्ति की यह लालसा अवर्णनीय है।

मतलब:
देवगढ़ तालुका के मुंगे गांव में देवी भगवती का बड़ा त्योहार मनाया गया। आज, बुधवार को यह त्योहार खत्म हो रहा है और भक्त अपनी मां के प्यार से भर गए हैं। 🌺 🚩 ✨ 😊

2. दूसरा कड़ावे:
नौ दिन तक देवी की चमक तेज रही,
आरती और शोरगुल से गांव जगमगा उठा,
पालकी निकली, बजती हुई, गुलाब की माला,
भक्तों के बुलाने पर, भगवती की रोज दौड़।

मतलब:
त्योहार के दिन देवी के दर्शन से गांव जगमगा उठा। ढोल-नगाड़ों के शोर के बीच पालकी निकली और गुलाब की माला भक्तों को आनंदित कर गई। 🥁 🎊 💖 🏵�

3. तीसरा कड़ावे:
कनकादित्य और भगवती, रिश्ता मां और बच्चे जैसा,
मां हमेशा रक्षा करती है, बच्चे मुसीबत में,
त्योहार भारी है, मुंगे की बड़ी महिमा,
भक्ति के इस सागर में, बस यही चेतना बची है।

अर्थ:
मुंगे गांव की इस धरती पर भगवती मां भक्तों की रक्षा करती हैं। इस त्योहार ने गांव का गौरव बढ़ाया है और सभी लोग भक्ति में डूबे हुए हैं। 🛡� 🙏 🌊 🔱

4. चौथे कड़वे:
प्रसाद और मीठी खुशबू का यह त्योहार भर गया है,
मां के आशीर्वाद से, हर पल पवित्र हो गया है,
विदाई का यह समय आया है, मेरी आंखें थोड़ी नम हो गई हैं,
मेरा मन लौटने को बेताब हो गया है, हे मां,

अर्थ:
प्रसाद भरकर और देवी को भोग लगाकर, भक्तों ने आशीर्वाद लिया है। अब, जैसे-जैसे त्योहार खत्म हो रहा है, मां को विदाई देते हुए भक्तों की आंखें आंसुओं से भर गई हैं। 🍯 🌸 💧 🧘�♀️

5. पांचवां कड़वे:
देवगढ़ की यह कोंकण भूमि, भगवती का वही सहारा,
यहां वीरता और भक्ति का विचार निरंतर बहता है,
भले ही आज त्योहार खत्म हो गया है, मेरे दिल में सिर्फ तुम्हारा स्थान है,
हमारा यह छोटा सा जंगल तुम्हारे नाम से रोशन है।

मतलब:
कोंकण के इस हिस्से में, देवी भगवती सभी के लिए पूजा की जगह है। त्योहार खत्म होने के बाद भी, मां के विचार और उनकी याद दिल में रहेगी। 🌴 🚩 ❤️ 🕯�

6. छठा कड़वे:
कोई गलत काम न हो, मुझे खुशी मिले, यही मैं आपसे मांगता हूं, हे मां,
आप मुझे खुशी और शांति का आशीर्वाद दें, मुझे यह पूरा परिवार दें,
इस बुधवार को, मैं आपके चरणों में सिर झुकाता हूं,
आपकी कृपा से, हम इस जीवन के सागर से पार हो जाएंगे।

अर्थ:
देवी सबको सद्बुद्धि और सुख-शांति प्रदान करें, और बुधवार को त्योहार के आखिर में उनकी पूजा की जाती है। 🙏 ✨ 🌈 🔱

7. सातवां कड़वा:
अगले बरस जल्दी आना, तुम्हारी कृपा ऐसे ही बनी रहे,
हमें मुसीबत से बचाना, जीवन की इस आग को दूर करना,
देवी की जय हो, मुंगई गांव गरजने की आवाज से गूंज रहा है,
भक्ति की इस आंधी में हम अपने ही एहसास भूल गए हैं।

अर्थ:
'भगवती माता की जय' के नारे के साथ त्योहार खत्म हुआ, जिसमें देवी से अगले बरस जल्दी लौटने की प्रार्थना की गई। 🚩 🙌 🔔 🕉�

इमोजी समरी
🌺 🚩 ✨ 😊 🥁 🎊 💖 🏵� 🛡� 🙏 🌊 🔱 🍯 🌸 💧 🧘�♀️ 🌴 ❤️ 🕯� 🌈 🙌 🔔 🕉�

वर्ड समरी
भगवती: मुंगे गांव की पूजा की जगह।

मुंगे: देवगढ़ तालुका में त्योहार वाला गांव।

एंडिंग: त्योहार का समापन समारोह (बुधवार)।

पालखी: देवी के घूमने और खुशी का प्रतीक।

भक्ति: माँ पर अटूट विश्वास।

आशीर्वाद: सुख और शांति की प्रार्थना।

विदाई: अगले साल फिर मिलने की उम्मीद।

मुंगे गाँव का यह भगवती उत्सव सच में कोंकण की संस्कृति और आस्था को दिखाता है।

--अतुल परब
--दिनांक-07.01.2026-बुधवार.
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