वारकरी विचारसूर्य - धुंडा महाराज देगलूरकर 🙏📖🚩🙏 🚩 📅 📖 💡 🕯️ 🌊 🥁 🧘‍♂️

Started by Atul Kaviraje, January 14, 2026, 02:18:59 PM

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Atul Kaviraje

धुंडा महाराज देगलुरकर पुण्यतिथि-पंढरपुर-
धुंडा महाराज देगलुरकर पुण्यतिथि (पंढरपुर): वारकरी संप्रदाय के महान संत और कीर्तनकार, धुंडा महाराज देगलुरकर की पुण्यतिथि इस दिन पंढरपुर में मनाई जाती है।
धुंडा महाराज देगलुरकर पुण्यतिथि (पंढरपुर): वारकरी संप्रदाय के महान संत, धुंडा महाराज देगलुरकर की पुण्यतिथि इसी दौरान पड़ती है, जिस दिन पंढरपुर और देगलुर इलाकों में खास भजन प्रोग्राम होते हैं।

यह भक्ति  कविता वारकरी संप्रदाय के चमकते सितारे, महान कीर्तनकार और दार्शनिक वैकुंठवासी धुंडा महाराज देगलूरकर को उनकी पुण्यतिथि (7 जनवरी, 2026, बुधवार) पर समर्पित है:

कविता: वारकरी विचारसूर्य - धुंडा महाराज देगलूरकर 🙏📖🚩

1. पहली खट्टी-मीठी:
देगलूर की पवित्र भूमि, वहाँ रत्न पैदा हुआ,
धुंडा महाराज के नाम से, वारकरी दुनिया रोशन हुई,
बुधवार का यह दिन पवित्र है, पुण्यतिथि का यह समय,
पंढरपुरी भक्ति खिली है, आज स्वर्ण कमल है।

अर्थ:
देगलूर की पवित्र भूमि में पैदा हुए धुंडा महाराज ने अपने काम से पूरे वारकरी संप्रदाय को रोशन किया। आज, बुधवार को, पंढरपुर क्षेत्र में उनकी पुण्यतिथि मनाई जा रही है। 🙏 ✨ 🚩 📅

2. दूसरा कड़वा:
ज्ञानेश्वरी का अर्थ समझाओ, उनकी आवाज़ में रस था,
भक्ति और ज्ञान का त्रिवेणी संगम था, उनके मन में गहराई थी,
कीर्तन के ज़रिए, उन्होंने भगवद धर्म का सार प्रस्तुत किया,
अज्ञान के अंधेरे को नष्ट किए बिना, उन्होंने प्रकाश का विचार किया।

अर्थ:
महाराज ने अपनी धाराप्रवाह आवाज़ के ज़रिए ज्ञानेश्वरी के कठिन दर्शन को सरल तरीके से समझाया और कीर्तन के ज़रिए भगवद धर्म का प्रसार किया। 📖 🗣� 💡 🕯�

3. तीसरा कड़वा:
पंढर के रेगिस्तान, पहाड़ियाँ उनके नाम थीं,
विट्ठल की भक्ति शांत हो गई, मन में सारी नफ़रत,
सरलता और विद्वता के, वे साक्षात थे,
उनके चरणों में झुककर, वे पूरा ब्रह्मांड बन गए।

अर्थ:
पंढरपुर के रेगिस्तान में उनके नाम की आवाज़ गूंजती थी। वे विद्वता और सादगी के आदर्श थे, जिनका सभी लोग सम्मान करते थे। 🌊 🥁 🧘�♂️ 🤝

4. चौथा कड़ावे:
पवित्र जीवन, पवित्र मन, यही उनकी पहचान है,
परमात्मा के मार्ग पर, उनका अलग मार्ग,
देगलूर से पंढरपुर तक, भक्ति का यह अटूट पुल,
इंसान बनाना ही उनके जीवन का मकसद था।

मतलब:
बहुत ही सादा और पवित्र जीवन जीने वाले महाराज ने जीवन भर लोगों में नेकी और भक्ति पैदा करने का काम किया। 🚶�♂️ 🛤� ❤️ 🏗�

5. पांचवां कड़ावे:
आज भी उनकी याद से भक्ति की बाढ़ आती है,
वरकरी संप्रदाय के, थोर महान संत हैं,
भजन और कीर्तन के, पंढरी गजे अंबर,
धुंडा महाराज के नाम पर, पूरा पहाड़ झुकता है।

मतलब:
उनकी पुण्यतिथि के मौके पर पंढरपुर और देगलूर इलाकों में भजन प्रोग्राम होते हैं, जिससे भक्तिमय माहौल बन जाता है। 🎼 🎤 🌤� 🏔�

6. छठा कड़ावे:
वे इस नश्वर शरीर को छोड़कर वैकुंठ चले गए,
लेकिन उनके विचार, उनका अपार प्रेम ज़िंदा रहा,
अपने शिष्यों और साधकों के लिए, वे सच्चे दीपक हैं,
वे हमेशा रास्ता दिखाने आते हैं, वे भगवान के करीब हैं।

अर्थ:
भले ही वे शरीर से हमारे साथ नहीं हैं, लेकिन उनके विचार आज भी सैकड़ों साधकों और शिष्यों को सही रास्ता दिखा रहे हैं। 🕊� 🕯� 👣 🛐

7. सातवां कड़वा:
आपके चरणों में मेरा प्रणाम, धुंडा महाराज गुरुराय,
आपके आशीर्वाद की छाया हम पर बनी रहे,
हम वारकरी धर्म की इस विरासत को आगे बढ़ाएंगे,
आपकी पवित्र याद से हमारा जीवन रोशन होगा।

अर्थ:
महाराज के चरणों में प्रणाम करके, हम उनके द्वारा दी गई वारकरी धर्म की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प ले रहे हैं। 🙏 🚩 🌸 ✨

इमोजी समरी
🙏 🚩 📅 📖 💡 🕯� 🌊 🥁 🧘�♂️ 🤝 🚶�♂️ ❤️ 🎼 🎤 🏔� 🕊� 👣 🛐 🌸 ✨

वर्ड समरी
धुंडा महाराज: वारकरी संप्रदाय के महान दार्शनिक और कीर्तनकार।

डेगलूर: महाराज का जन्मस्थान और कार्यक्षेत्र।

पुण्यतिथि: बुधवार को पंढरपुर में स्मृति दिवस मनाया गया।

ज्ञानेश्वरी: वह पुस्तक जिसका प्रचार महाराज ने जीवन भर किया।

सात्विकता: महाराज की जीवनशैली का मुख्य आधार।

समृद्धि: भगवद धर्म के दर्शन को लोगों तक फैलाने का काम।

विरासत: महाराज द्वारा दी गई भक्ति और ज्ञान की विरासत।

धुंडा महाराज देगलुरकर के विचार आज भी वारकरी संप्रदाय के लिए एक प्रकाश स्तंभ की तरह हैं।

--अतुल परब
--दिनांक-07.01.2026-बुधवार.
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