🌺 आई जननी कुंबलजादेवी यात्रा: देवसरे गांव का त्योहार 🌺❤📅 🥥 🚩 🙏 ✨ 🕯️ 🧘‍♀️

Started by Atul Kaviraje, January 14, 2026, 02:30:51 PM

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Atul Kaviraje

श्री जननी कुंबळजादेवी यात्रा-देवसरे, तालुका-महाबळेश्वर-

यह रसीली और भक्ति से भरी कविता सतपुड़ा और सह्याद्री की गोद में बसे महाबलेश्वर तालुका के देवसरे गांव की ग्राम देवी श्री जननी कुंबलजादेवी की सालाना तीर्थयात्रा (08 जनवरी 2026) के मौके पर है:

🌺 आई जननी कुंबलजादेवी यात्रा: देवसरे गांव का त्योहार 🌺

प्रस्तावना: महाबलेश्वर के खूबसूरत इलाके में बसा देवसरे गांव आज भक्ति में डूबा हुआ है। आई जननी कुंबलजादेवी की सालाना तीर्थयात्रा परंपरा, आस्था और खुशी का त्योहार है। अपना जन्मदिन मनाने वाली और अपने भक्तों की रक्षा करने वाली आई कुंबलजादेवी आज अपने बच्चों को आशीर्वाद देने के लिए सजी-धजी हैं।

🔱 लंबी मराठी कविता 🔱

1.
तीर्थयात्रा का यह समारोह आज देवसरे गांव में है,
तीर्थयात्रा का यह जुलूस,
कुंबलजा मौली का रास्ता,
दर्शन का रास्ता।
नारियल और खनखना से ओठी भर जाती है,
आज भक्तों के दिलों में भक्ति और भी ज़्यादा उमड़ आई है। 📅 🥥 🚩 🙏

मतलब: देवसरे गांव में तीर्थ यात्रा को लेकर बहुत उत्साह है। भक्त देवी के दर्शन करने और अपनी ओठी भरने के लिए नारियल और खनखना लेकर लाइन में खड़े हैं।

2.
माँ का यह रूप, जननी कुंबलजा मौली,
आपका तेज बहुत ज़्यादा है,
आपके एक दर्शन से,
सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
कुंकवा के धुप से रूप चमकता है,
भक्तों के दिलों में, भक्ति की यह धूप। ✨ 🕯� 🧘�♀️ 🌟

मतलब: माँ, जननी कुंबलजा देवी का रूप बहुत ही तेज है। माथे पर कुंकवा का टीका देखकर भक्तों का मन खुश होता है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं।

3.
पहाड़ों में बसी है महाबलेश्वर की शान,
देवसरे की ये देवी,
भक्तों की ये परेशानी,
गांव का नाश करने वाली हो तुम।
महाबलेश्वर तालुका, तेरी शान मां,
तेरे चरणों में मुझे मिलती है, ठंडी छांव। 🏔� 🌳 🏯 👑

मतलब: सह्याद्रि के किनारे बसी ये देवी, महाबलेश्वर की शान है। जब भक्त इनके चरणों में आते हैं, तो उन्हें प्यार और ठंडक की छांव मिलती है।

4.
पालकी की रस्म ढोल-नगाड़ों के साथ होती है,
ये पालकी घंटियों की आवाज के साथ होती है,
कुंभलाजा की सवारी,
आज लाखों लोग इसे देखते हैं।
गुलाब और फूलों की, ये धूम है,
भक्तों की जुबान पर, तेरा नाम आता है। 🥁 🎺 🌸 🏮

मतलब: ढोल-नगाड़ों और झांझ की आवाज़ और गुलाब के फूलों की गूंज के बीच देवी की पालकी निकलती है। यह रस्म आंखों को सुकून देने वाली होती है और देवी का नाम भक्तों की जुबान पर होता है।

5.
मैंने तुमसे यह मन्नत मानी थी, माँ, जो मेरी मन्नत पूरी करती है,
तुम इसे अभी पूरा करो,
मुसीबत के समय,
तुम दौड़कर मेरे पास आती हो, माँ।
भक्तों के इस घर में खुशहाली आए,
कुंबलजा मौली, तुम ही हमें बुद्धि दो। 🤲 💰 🌻 🏹

मतलब: माँ कुंभलजादेवी ही मेरी मन्नत पूरी करती हैं। वह भक्तों के बुलाने पर दौड़ी चली आती हैं और घर में सुख, समृद्धि और अच्छी बुद्धि देती हैं।

6.
गाँव देवता की महिमा, तुम ही हमारी गाँव देवी हो,
तुम ही हमारी रक्षा करती हो,
तुम्हारी एक कृपा से,
हमारा भाग्य भर जाता है। आपकी कृपा बनी रहे, देवसरे, इस गांव पर,
आपका नाम आसमान में गूंजता रहे। 🏡 🛡� 🧿 🌈

मतलब: देवसरे गांव की रक्षक के तौर पर देवी सबकी रक्षा करें। उनकी कृपा पूरे गांव पर हमेशा बनी रहे और हर जगह उनकी तारीफ हो।

7.
चरणों में समर्पण करने की यात्रा खत्म होने के बाद भी,
आपकी रहेगी,
आपके भक्त आपकी अगली,
यात्रा का इंतजार करेंगे।
जननी कुंभलजादेवी, आपको यही प्रणाम है,
आपकी भक्ति जीवन का स्वर्ग बन जाए। 🙌 💐 🛐 🙇�♀️

मतलब: यात्रा खत्म होने के बाद भी, भक्तों के मन में अगली यात्रा की लालसा बनी रहे। देवी की भक्ति जीवन का सुंदर स्वर्ग बन जाए, यही कामना है।

💠 वर्ड समरी 💠
जननी कुंभलजादेवी, देवसरे, महाबलेश्वर, सालाना यात्रा, पालकी समारोह, ओटी भरने, गांव देवता, नवसाला पवनारी, भक्ति का दरवाल, सह्याद्री।

💠 इमोजी समरी (इमोजी समरी) 💠
❤📅 🥥 🚩 🙏 ✨ 🕯� 🧘�♀️ 🌟 🏔� 🌳 🏯 👑 🥁 🎺 🌸 🏮 🤲 💰 🌻 🏹 🏡 🛡� 🧿 🌈 🙌 💐 🛐 🙇�♀️

--अतुल परब
--दिनांक-08.01.2026-गुरुवार.
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