🌺 संक्रांति की महक: तिल-गुड़ की मिठास और त्योहार का उत्साह 🌺📅 🛍️ 🚩 ✨ 🥣 🍬

Started by Atul Kaviraje, January 14, 2026, 02:34:34 PM

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Atul Kaviraje

मकर संक्रांति: महाराष्ट्र में मकर संक्रांति (14 जनवरी) में सिर्फ़ 6 दिन बचे हैं, इसलिए बाज़ारों में तिल और गुड़ की भीड़ होगी और संक्रांति की खरीदारी शुरू हो जाएगी।

मकर संक्रांति के आने, बाज़ार की चहल-पहल और तिल-गुड़ की मिठास को दिखाती एक रसीली और इमोशनल लंबी मराठी कविता।

🌺 संक्रांति की महक: तिल-गुड़ की मिठास और त्योहार का उत्साह 🌺

प्रस्तावना: आज 8 जनवरी है, यानी मकर संक्रांति, बस 6 दिन बचे हैं। कड़ाके की सर्दी में सूरज डूब चुका है, और महाराष्ट्र के बाज़ार तिल-गुड़, पतंगों और खुशबू से भरे पड़े हैं। यह इस त्योहार की एक खूबसूरत तैयारी है जो रिश्तों में कड़वाहट को भुलाकर 'मीठा बोलने' का संदेश देती है।

🔱 लंबी मराठी कविता 🔱

1.
त्योहार की महक आ गई है, छह दिन में त्योहार आ गया है,
संक्रांति की यह महक,
त्योहार की तैयारियां,
कदम उठा लिए हैं। बाज़ार सज गए हैं अब, भीड़ भारी है,
खुशियों का त्योहार आया है, सबके दरवाज़े खुले हैं। 📅 🛍� 🚩 ✨

मतलब: मकर संक्रांति में सिर्फ़ छह दिन बचे हैं और हर जगह तैयारियां शुरू हो गई हैं। शॉपिंग के लिए बाज़ारों में लोगों की भारी भीड़ दिख रही है।

2.
तिल और गुड़ की मिठास तिल और गुड़ का मेल,
ये मीठा मेल है,
अब कड़वा बोलना बंद करो,
ये शुभ योग है।

"तिल और गुड़ लो और मीठा बोलो", मंत्र बड़ा बढ़िया है,
रिश्तों में मिठास ही दुनिया में इज़्ज़त बढ़ाती है। 🥣 🍬 🤝 😊

मतलब: तिल और गुड़ की तरह हमें भी मिलजुलकर रहना चाहिए और सबसे मीठा बोलना चाहिए, यही संदेश संक्रांति का त्योहार हमें देता है।

3.
धरती की खुशबूओं की ये पूजा,
पूजा का ये सम्मान,
अनाज और गन्ने से,
अच्छे से पेट भरते हैं।
नए खुशबू वालों की भागदौड़, तरह-तरह की खुशबू चुराने की चाहत,
संस्कृति की ये विरासत, कितनी मीठी लगती है। 🏺 🌾 🥕 🧡

मतलब: संक्रांति पर मिट्टी के बर्तनों की पूजा होती है। उनमें गन्ने, गाजर वगैरह जैसे गीले अनाज भरे जाते हैं। औरतें एक-दूसरे को तरह-तरह की खुशबू देकर ये त्योहार मनाती हैं।

4.
आसमान में पतंगों की ये उड़ान रंगीन है,
पतंगों का ये जमावड़ा,
काटने के खेल के लिए,
बच्चे जमा हो गए हैं।
"काट रे काट" ��की आवाज़, हर जगह गूंजती है,
खुशी की ये गर्मी लेकर, सूरज लोगों के झुंड के साथ आया है। 🪁 🌤� ✂️ 🎈

मतलब: संक्रांति पर आसमान में पतंग उड़ाने का कुछ अलग ही मज़ा है। बच्चे और बड़े जोश के साथ पतंग उड़ाते हैं और 'काट रे कट' का नारा लगाते हैं।

5.
ये हलवे के गहने छोटे से लेकर बड़े तक पहनते हैं,
और,
दुल्हन का ये जुनून,
हलवे के गहनों का,
ऐसा लगता है जैसे बारिश हो रही हो।
सारे हिस्से सफेद मोतियों से सजे होते हैं,
इस त्योहार के रंग में, महाराष्ट्र का रंग नहाया हुआ होता है। 🍬 💍 👶 👰

मतलब: संक्रांति पर बच्चों को नहलाया जाता है और दुल्हन को हलवे के गहनों से सजाया जाता है। ये सफेद गहने बहुत सुंदर लगते हैं।

6.
उत्तरायण पर सूरज मकर राशि में आता है,
उत्तरायण के इस त्योहार पर,
ये ठंडक गायब हो जाती है,
ज़िंदगी ठंडी हो जाती है। कुदरत में ये बदलाव अब, तरक्की की ये दिशा,
सूर्य देव की रोशनी से, ये रात मिट जाए। ☀️ 🏔� 🧭 🌅

मतलब: मकर संक्रांति पर सूरज मकर राशि में आता है और दिन बड़ा होने लगता है। सूरज की रोशनी से ठंड कम होती है और ज़िंदगी में नई एनर्जी आती है।

7.
आइए प्यार के इस धागे को भूल जाएं, प्यार का ये हाथ थाम लें, मन की कड़वाहट को छोड़ दें, खुशियों की ये बाती बना लें। आने वाली ये संक्रांति आपके लिए खुशियों और खुशहाली का समय हो, आपका घर तिलगुला की मिठास से भर जाए। 🤝 🔥 🏡 🛐

मतलब: इस त्योहार के मौके पर, आइए हम पुरानी दुश्मनी भूलकर एक साथ आएं। तिलगुला की मिठास हमारे घरों और दिलों में हमेशा बनी रहे।

💠 वर्ड समरी 💠
मकर संक्रांति, तिल-गुल, उत्तरायण, पतंग, सुगड़ी, हलवा के गहने, वैरायटी, मार्केट, नज़दीकी, मिठास, अपनापन, महाराष्ट्र कल्चर।

💠 इमोजी समरी 💠
📅 🛍� 🚩 ✨ 🥣 🍬 🤝 😊 🏺 🌾 🥕 🧡 🪁 🌤� ✂️ 🎈 💍 👶 👰 ☀️ 🏔� 🧭 🌅 🔥 🏡 🛐

🗺� मकर संक्रांति तैयारी माइंड मैप (हॉरिजॉन्टल माइंड मैप) 🗺�
मकर संक्रांति (14 जनवरी) ➔ 6 दिन बचे हैं (8 जनवरी) ➔ शॉपिंग: तिल-जुली और नए कपड़े ➔ परंपराएं: वैरायटी और खुशबूदार पूजा ➔ खेल: पतंगबाजी ➔ खाना: तिल-जुली पोली और हलवा

--अतुल परब
--दिनांक-08.01.2026-गुरुवार.
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