🚩 गाँव की जात्रा और खंडोबा का जागरण: भक्ति का एक बड़ा उत्सव 🚩☀️ 🚩 🔴 🙏 ✨ 🟡

Started by Atul Kaviraje, January 18, 2026, 02:44:25 PM

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Atul Kaviraje

लोकल मेला: महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में पौष महीने में कई गांव के देवी-देवताओं के मेले (उरुली, यात्रा) लगते हैं। खासकर उन जगहों पर जहां खंडोबा की पूजा होती है, आज से 'पौष पूर्णिमा' की तैयारियां ज़ोरों पर हैं।
लोकल मेला: महाराष्ट्र के कई गांवों में इस दौरान गांव के देवी-देवताओं के मेले लगने शुरू हो गए हैं।

यहाँ रविवार, 11 जनवरी, 2026 को महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में चल रही ग्रामदेवता जात्रा और जेजुरी के खंडोबा की आने वाली पौष पूर्णिमा की तैयारियों पर आधारित एक भक्ति से भरी लंबी मराठी कविता है।

🚩 गाँव की जात्रा और खंडोबा का जागरण: भक्ति का एक बड़ा उत्सव 🚩

विशेष: पौष महीने में, महाराष्ट्र के कोने-कोने में गाँव के देवताओं के मेले शुरू हो गए हैं। आज रविवार होने के कारण, जेजुरी समेत कई जगहों पर खंडोबा के भक्तों की भीड़ है, और आने वाली पौष पूर्णिमा 'छबीना' और 'पालखी' उत्सव की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं।

कविता

1.
ये रविवार की सुबह आ गई है, मेले का ये मंच सज गया है,
गाँव के देवता के दर्शन के लिए, भक्ति की रंगीन राह देखो।
पौष महीने की बारिश है, और गुलाबों की ये बहार,
भगवान की भक्ति का ये गीत हर गांव से सुनाई दे रहा है।

मतलब:
रविवार की छुट्टी की वजह से गांव के मेले में रौनक आ गई है। ठंड के दिनों में गुलाल उड़ाते हुए गांव के देवता की पूजा बड़े जोश के साथ चल रही है। ☀️ 🚩 🔴 🙏

2.
'येलकोट येलकोट जय मल्हार', ये पुकार गूंज रही है,
खंडोबा के इन पैरों को देखो, ये सारा गुस्सा फीका पड़ रहा है।
आज भंडारा नहीं टूटा है, ये जेजुरी पीली हो गई है,
पौष पूर्णिमा के बहाव के साथ, हर घर में भक्ति भर गई है।

मतलब:
जेजुरी और खंडोबा के किलों पर 'जय मल्हार' के नारे लग रहे हैं। पीले भंडारे के उड़ने से माहौल भक्तिमय हो गया है और हर कोई आने वाली पूर्णिमा का इंतजार कर रहा है। ✨ 🟡 ⚔️ 🐎

3.
नगाड़े और शहनाई की धुन, मेले के इस आंगन में बजती है,
देवताओं की पालकी निकली है, यह रौनक छाई हुई लगती है।
टूटे हुए रिश्तों को जोड़ता है यह लोकल मेला,
परंपरा की इस रोशनी से, हमारी मिट्टी चमकती है।

मतलब:
देवताओं की पालकी वाद्य यंत्रों की धुन के साथ निकलती है। यह मेला सिर्फ एक धार्मिक त्योहार नहीं है, बल्कि गांववालों के बीच प्यार और रिश्तों को मजबूत करने का एक जरिया है। 🥁 🎊 🏘� 🤝

4.
खिलौनों, मिठाइयों और चूड़ियों से सजी हैं ये दुकानें,
बच्चे झूम उठते हैं, थामे इस सुखद आनंद से।
यह मेला बाजार बड़ा है, खुशी का यह अथाह झरना,
गांव के देवता के आशीर्वाद से, यह महाराष्ट्र जगमगाता है।

मतलब:
मेले में मिठाइयों और खिलौनों की दुकानों की भीड़ लगी रहती है। बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठते हैं और महाराष्ट्र की यह संस्कृति मन को खुशी देती है। 🎡 🍭 🧸 🛍�

5.
कुश्ती का अखाड़ा रंगीन है, पहलवानों का पक्का इरादा देखो,
शड्डू की उस आवाज़ से, रोमांच खड़ा हो जाता है।
कुश्ती के खेल के लिए प्यार, मेले में बहुत बढ़ जाता है,
जीतने वाले को इस मिट्टी में सम्मान का यह हार मिलता है।

मतलब:
मेले में कुश्ती का अखाड़ा महाराष्ट्र के मर्दाना खेल की धरोहर है। पहलवानों की ताकत का प्रदर्शन देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। 🤼�♂️ 💪 🏆 🥇

6.
पौष पूर्णिमा की यह तैयारी, घर-घर में शुरू हो गई है,
तालाब भरने की ये रस्में, रंग-बिरंगे भक्तों के दरवाज़े पर।
रविवार का यह शुभ योग, खंडोबा की इस भक्ति का,
आइए हम राह बनें, मुश्किलों पर ताकत का।

मतलब:
पौष पूर्णिमा पास है, खंडोबा के 'तालाब भरने' की रस्म की तैयारी चल रही है। रविवार और मेले का योग भक्तों को मुश्किलों से लड़ने की ताकत देता है। 🥣 🕯� 🚩 🛡�

7.
इस रविवार, 11 जनवरी को, आइए हम मेले की इन यादों को संजोएं,
आइए हम गांव के देवता के चरणों में अपना सिर झुकाएं।
हमें सुख, समृद्धि और शांति मिले, यही हमारी भगवान से प्रार्थना है,
आइए हम इस दुनिया को भक्ति के इस अमृत में नहलाएं।

मतलब:
इस शुभ दिन पर, आइए हम गांव के देवता को प्रणाम करें और सभी के कल्याण और शांति के लिए प्रार्थना करें। 🙏 🔱 🌍 🎂

इमोजी समरी

सिर्फ़ सिंबल:

☀️ 🚩 🔴 🙏 ✨ 🟡 ⚔️ 🐎 🥁 🎊 🏘� 🤝 🎡 🍭 🧸 🛍� 🤼�♂️ 💪 🏆 🥇 🥣 🕯� 🚩 🛡� 🙏 🔱 🌍 🎂

सिर्फ़ शब्द: रविवार, मेला, खंडोबा, जेजुरी, जय मल्हार, भंडारा, पालकी, गुलाल, मिठाई, पालने, कुश्ती, पहलवान, पौष पूर्णिमा, भक्ति, परंपरा, खुशहाली।

महाराष्ट्र मेला: सांस्कृतिक नज़रिया (माइंड मैप) 🗺�📊

[ग्रामीण मेले और त्यौहार]
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[धार्मिक रस्में] [मनोरंजन] [फ़ूड कल्चर] [खेल और कुश्ती] [सामाजिक महत्व]
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- पालकी समारोह - तमाशा/लावणी - जलेबी, रेवाड़ी - कुश्ती परेड - चक्रमणि तोहफ़ा
- भंडारा उद्धालन - स्काई पालने - पूरनपोली नैवेद्य - लेज़िम और दंडपट्टा - गांव की एकता
- खंडोबा तालिबहार - सर्कस और जादू - कड़कनाथ/मट्टन बेट - गदा और प्रतीक - परंपराओं का संरक्षण

येलकोट येलकोट जय मल्हार!

--अतुल परब
--दिनांक-11.01.2026-रविवार.
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