🙏 पितृऋण मुक्ति: तर्पण और श्रद्धा का समर्पण 🙏🌅 🙇‍♂️ 📜 🚩 💧 🌾 🥣 🙏 🐦 🍲

Started by Atul Kaviraje, January 18, 2026, 03:08:20 PM

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Atul Kaviraje

✅ श्राद्ध या पितृतर्पण का कोई कर्म
पितृ देवताओं के लिए पितृतर्पण या तर्पण

मंगलवार, 13 जनवरी, 2026 को 'पौष पूर्णिमा' और 'धनुर्मास समामति' के पावन पर्व पर किए जाने वाले 'पितृतर्पण और श्राद्ध' अनुष्ठान के अवसर पर पेश है एक दिल को छू लेने वाली और रसीली मराठी कविता।

🙏 पितृऋण मुक्ति: तर्पण और श्रद्धा का समर्पण 🙏

1.
आज, यह सुबह पुरखों की याद से पवित्र हो गई है,
आस्था की यह प्यारी माला पुरखों के चरणों में अर्पित हो गई है।
मंगलवार शुभ दिन है, तर्पण का यह अनुष्ठान महान है,
कृतज्ञता की इस भावना से, रिश्ते की यह डोर मजबूत हो गई है।

(मतलब: आज हम अपने पितरों को याद करके उनके प्रति अपना आभार जता रहे हैं, जिससे हमारे पारिवारिक रिश्तों में और ज़्यादा नज़दीकी आती है।) 🌅 🙇�♂️ 📜 🚩

2.
दर्भा और तिल के तेल और पानी का यह तोहफ़ा हाथ में लेकर,
हम पितृलोक के पितरों को सम्मान देते हैं।
सभी आत्माएं संतुष्ट हों, यही ईश्वर से प्रार्थना है,
आपके आशीर्वाद से, सभी विचार पूरे हों।

(मतलब: दर्भा, तिल और पानी का इस्तेमाल करके किया गया तर्पण पितरों को संतुष्ट करता है और उनके आशीर्वाद से, हमारी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।) 💧 🌾 🥣 🙏

3.
पौष पूर्णिमा का समय पितृ कार्य के लिए ऐसा फलदायी समय है,
भोजन देने से हमें आत्मिक शांति की शक्ति मिलती है।
काक को छूते ही एक अलग ही खुशी मिलती है,
पूर्वजों के आशीर्वाद की ये खुशबू फैलती है।

(मतलब: पौष पूर्णिमा पर किया गया अन्नदान और पितृकर्म बहुत फलदायी होता है, जिससे मन को शांति और संतुष्टि मिलती है।) 🐦 🍲 ✨ 😊

4.
गया-प्रयाग या काशी, ये तीर्थ माना जाता है,
तर्पण घर पर भी किया जाए तो बेकार नहीं जाता।
सच्चे भाईयों, सच्चे मन से आज हम अपने पितरों को याद करें,
उस आत्मा को मुक्ति मिले, यही हमारी भगवान से प्रार्थना है।

(मतलब: अगर हमारे दिल में श्रद्धा हो, तो घर पर किया गया तर्पण भी तीर्थस्थल पर किए गए तर्पण जितना ही पुण्य देता है, जिससे हमारे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।) 🌊 🕉� 🏠 🕯�

5.
आइए हम कुल की इस परंपरा को आगे बढ़ाएं,
आइए हम अपने पितरों के कर्ज से मुक्त हों, और भक्ति में नहाएं।
उन्होंने हमें जो संस्कार दिए हैं, वही हमारी शान हैं,
हमारे पितरों के दिए संस्कारों से हमारी शान बढ़ती है।

(मतलब: हमारे पितरों के दिए संस्कार ही हमारी सच्ची दौलत हैं और उनकी परंपरा को बचाकर रखना हमारा कर्तव्य है।) 🌳 💎 🙌 🚩

6.
13 जनवरी का यह दिन, अंत का यह समय,
हमारे पितरों की कृपा से, सारा समय बीत गया।
आज आप धूप, दीप और नैवेद्य से तृप्त हों,
हमारे दरवाज़े पर, आपका ही भोज हो।

(मतलब: इस दिन धूप और दीप जलाकर पितरों को नैवेद्य अर्पित करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।) 🪔 🥘 🛐 🏠

7.
जो पितरे हमें छोड़कर चले गए हैं, उन्हें शांति मिले,
आपके हर बच्चे का आशीर्वाद हमेशा बना रहे।
हम आपकी याद के चरणों में सिर झुकाते हैं,
आपका पुण्य हमेशा बना रहे, हमारे इस आंगन में।

(मतलब: जो पूर्वज हमें छोड़कर चले गए हैं, उनकी पवित्र यादों को नमन करके, हम उनसे हमेशा आशीर्वाद की भीख मांग रहे हैं।) 🙏 🌟 ✨ 🚩

📑 सिर्फ़ शब्दों का सारांश:
पित्तर्पण - आभार - तिल-जल - पूर्वज - आशीर्वाद - पौष पूर्णिमा - अन्न दान - संस्कार - परंपरा - भक्ति - शांति - मुक्ति।

📑 सिर्फ़ इमोजी समरी:
🌅 🙇�♂️ 📜 🚩 💧 🌾 🥣 🙏 🐦 🍲 ✨ 😊 🌊 🕉� 🏠 🕯� 🌳 💎 🙌 🚩 🪔 🥘 🛐 🏠 🙏 🌟 ✨

--अतुल परब
--दिनांक-13.01.2026-मंगळवार.
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