🎨 मिट्टी की खुशबू: लोक कलाओं को बचाना 🎨🎨 🚩 🏺 ✨ 🥁 💃 🎶 🎭 🗡️ 🎤 🔥 🪔 🕉️

Started by Atul Kaviraje, January 18, 2026, 03:17:54 PM

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Atul Kaviraje

लोक कला का संरक्षण-

मंगलवार, 13 जनवरी, 2026 को हमारी शानदार संस्कृति में 'लोक कलाओं को बचाए रखने' के मकसद से पेश है एक रसीली और प्रेरणा देने वाली लंबी मराठी कविता।

🎨 मिट्टी की खुशबू: लोक कलाओं को बचाना 🎨

1.
महाराष्ट्र की मिट्टी की लोक कलाएं एक अनमोल खजाना हैं,
परंपरा की यह विरासत, हमेशा दिल से सेवा करती है।
मंगलवार के इस पावन दिन पर, आइए संस्कृति की इन गुफाओं को याद करें,
आइए लुप्त होती कलाओं को एक बार फिर से ज़िंदा करें।

(मतलब: महाराष्ट्र की मिट्टी में कई लोक कलाएं छिपी हैं, वे हमारी संस्कृति का गहना हैं और उन्हें बचाए रखना हमारा फ़र्ज़ है।) 🎨 🚩 🏺 ✨

2.
ढोल की वह खनक और, घंटियों की यह मधुर आवाज़,
रोपण के इस मौके पर, सबकी यह पुकार सुनाई देती है।
तमाशे की रौनक रंगीन थी, लोक कला की शान बड़ी थी,
कला की इस दुनिया में, रिश्तों की डोर मजबूत थी।

(मतलब: लावणी और तमाशा जैसी कलाओं से ग्रामीण संस्कृति को जिंदा रखा गया है, और लोग ढोल की थाप पर एक साथ आते हैं।) 🥁 💃 🎶 🎭

3.
पोवाड़ा के वीर रस से, तन पर कांटा लगा,
इतिहास के पराक्रम का यह महान मार्ग खुल गया।
शाहीर वीर गाथा गाते हैं, यह शिव की महिमा है,
लोक कला के जरिए, सत्य को स्वीकारा जाता है।

(मतलब: पोवाड़ा के ज़रिए हमारे पूर्वजों की वीरता सुनाई देती है, जो युवाओं में वीरता की भावना भरती है।) 🚩 🗡� 🎤 🔥

4.
भारूड़ और उस कीर्तन से समाज का मन आलोकित हुआ,
उस भारूड़ा से अंधविश्वास भाग गए।
वासुदेव सवारी करके आते हैं, टप-टप और चप्पलों की ताल पर,
हर घर में रीति-रिवाजों का बीज बोया जाता है।

(मतलब: भारूड़, कीर्तन और वासुदेव, ये लोक कलाएं सिर्फ़ मनोरंजन ही नहीं करतीं, बल्कि समाज के बुरे रीति-रिवाजों पर भी प्रहार करती हैं।) 🪔 🕉� 🚶�♂️ 🌾

5.
पिंगला भविष्य बताती है, धनगर अपनी मस्ती में नाचता है,
आदिवासियों का वह करवट लेना, प्रकृति के इस सुंदर अवसर में।
पोतराज और वाघ्या-मुरली, भक्ति का यही पहला रास्ता है,
इन कलाओं को देखकर लगता है, यहाँ सचमुच स्वर्ग है।

(मतलब: पिंगला, धनगर डांस और आदिवासी डांस प्रकृति से जुड़े हैं, और इसके ज़रिए मिट्टी से रिश्ता साफ़ होता है।) 🐐 🌲 👣 🌈

6.
आधुनिकता के इस दौर में, पुराने रीति-रिवाज़ भुलाए जा रहे हैं,
चमचमाहट के इस पर्दे के पीछे, ये प्यार गायब होता जा रहा है।
चलो उठो और लोक कला की इस चुनौती को स्वीकार करो,
चलो दुनिया को अपनी संस्कृति दिखाओ, तरक्की का एक नया झोंका दो।

(मतलब: आज के डिजिटल ज़माने में हम अपनी असली लोक कला को भूल रहे हैं, हमें इसे फिर से ग्लोबल लेवल पर ले जाने की ज़रूरत है।) 📱 🚫 🏛� 🌍

7.
आइए कलाकारों का सम्मान बनाए रखें, उन्हें सही सपोर्ट दें,
तभी हमारी मिट्टी का यह सम्मान इस दुनिया में बचा रहेगा।
आइए लोक कला को बचाकर रखें, यही आज का संकल्प है,
यही महाराष्ट्र की शान का सच्चा सपना है।

(मतलब: अगर हम लोक कलाकारों को सम्मान और सपोर्ट देंगे, तभी हमारी समृद्ध परंपरा अगली पीढ़ी तक पहुंचेगी।) 🙏 🏆 💎 🚩

📑 सिर्फ़ शब्दों में:
लोक कला - लावणी - तमाशा - पोवाड़ा - भारुड़ - वासुदेव - पिंगला - धनगरी डांस - संस्कृति - बचाकर रखना - कलाकार - सम्मान - विरासत - महाराष्ट्र।

📑 सिर्फ़ इमोजी समरी:

🎨 🚩 🏺 ✨ 🥁 💃 🎶 🎭 🗡� 🎤 🔥 🪔 🕉� 🚶�♂️ 🌾 🐐 🌲 👣 🌈 📱 🚫 🏛� 🌍 🙏 🏆 💎 🚩

--अतुल परब
--दिनांक-13.01.2026-मंगळवार.
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