🚩 विट्ठल भक्ति सोहला: वारकरी वासा और वारसा 🚩🚩 🙏 👣 📿 🪔 🌿 🕯️ ✨ 🎶 🥁 🚩

Started by Atul Kaviraje, January 21, 2026, 08:56:09 PM

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Atul Kaviraje

(भगवान विठ्ठल की पूजा में धार्मिक प्रथाएं)
श्रीविठोबा और उनके व्रत के धार्मिक कृत्य-
(भगवान विठ्ठल की पूजा में धार्मिक प्रथाएं)
(Religious Practices in the Worship of Lord Vitthal)
Religious activities of Shri Vithoba and his devotees-

यह लंबी और समृद्ध  कविता पंढरी के राणा श्री विट्ठल और उनके वारकरी भक्तों की भक्ति परंपरा पर आधारित है:

🚩 विट्ठल भक्ति सोहला: वारकरी वासा और वारसा 🚩

शीर्षक: "पौले चलती पंढरीची वात"

(1)
अट्ठाईस युगों से, ईंट पर खड़े होकर, कमर पर हाथ रखे,
पुंडलिका से मिलने के लिए, पंढरी में विठू रहे।
भक्तों की इस पूजा का, कोई संबंध नहीं है,
विट्ठल के नाम पर, अमृत शब्द की मिठास का। 🚩 🙏 👣 📿
(मतलब: विट्ठल, 28 युगों तक ईंट पर खड़े रहकर, पुंडलिका से मिलने के लिए पंढरपुर में रुके हैं। उनके नाम में अमृत जैसी मिठास है।)

(2)
उनके माथे पर नारंगी तिल है, उनके गले में तुलसी की माला है,
विट्ठल की भक्ति में, वे इस शरीर की सुध-बुध हमेशा के लिए भूल गए हैं।
एकादशी का व्रत महान है, व्रत का महत्व महान है,
विट्ठुनामा की ध्वनि में, चंद्रभागा तीरी ने स्नान किया। 🪔 🌿 🕯� ✨
(मतलब: माथे पर तिलक और गले में तुलसी की माला पहनकर भक्त अपने शरीर का ध्यान भूल जाते हैं। एकादशी का व्रत और विट्ठल के नाम का जयकारा चंद्रभागा के किनारे गूंजता है।)

(3)
ताल-मृदंग की यह धुन, पंढरी के लिए बजाई दिंडी,
पैर नाचने लगे, श्याम विट्ठल की भक्ति।
यही सच्ची साधना है, पंढरी के कदम,
विट्ठुरा से मिलने के लिए, भक्तों की यह भीड़ अपार है। 🎶 🥁 🚩 👟
(मतलब: वारकरी ताल-मृदंग की थाप पर पंढरपुर जाते हैं। घूमना एक बड़ी साधना है और विट्ठल से मिलने की चाहत बहुत ज़्यादा है।)

(4)
चांदनी में नहाना पवित्र है, रेगिस्तान में वो खेल,
अबीर-गुलाल खूब है, भक्त विट्ठल से मिलते हैं।
काल का ये कीर्तन महान है, ज्ञान का वो प्रकाश,
विट्ठल का नाम जपने से मुक्ति का साथ मिलता है। 🌊 🎭 🔴 💡
(मतलब: चांद में नहाने के बाद भक्त रेगिस्तान में भजन-कीर्तन में मगन हो जाते हैं। कला के कीर्तन से ज्ञान की रोशनी मिलती है और मोक्ष का रास्ता मिलता है।)

(5)
विठु, मेरे पिता और माता, मैं एक बच्चे की तरह दौड़ता हूं,
तुलसी की इस माला में, मैं भक्ति के इन फूलों को पिरोता हूं।
आरती का यह दीया जलता है, पांडुरंग के मंदिर में,
शांति का यह मंत्र गूंजता है, हर भक्त के अंदर। 🕯� 🌸 🔔 🧘�♂️
(मतलब: विट्ठल हमारे पिता हैं और भक्त उनसे मिलने के लिए बेताब रहते हैं। मंदिर में की जाने वाली आरती मन को बहुत शांति देती है।)

(6)
किसी फालतू चीज़ की ज़रूरत नहीं, मन पवित्र होना चाहिए,
विट्ठल की इस भक्ति में इंसान का जीवन संवर जाता है।
प्रदक्षिणा ही मंदिर है, भगवान से जोड़ने वाला रिश्ता है,
विट्ठल के इस दर पर जाने से सारे दुख दूर हो जाते हैं। 📿 🚶�♂️ 🏛� ❤️
(मतलब: विट्ठल को सिर्फ़ साफ़ मन चाहिए. मंदिर जाकर विट्ठल के दर्शन करने से इंसान के सारे दुख दूर हो जाते हैं.)

(7)
पुंडलिक वरदे हरि विट्ठल, यही नाम की पुकार है,
विट्ठल के इस दर पर जाओ तो मन को बहुत तृप्ति मिलती है.
यह वारकरी परंपरा दुनिया में महान है,
विट्ठल के चरणों में भक्ति की यह कभी न खत्म होने वाली बाढ़ बहती है. 🗣� 🙌 🌊 🚩
(मतलब: 'पुंडलिक वरदे हरि विट्ठल' मंत्र मन को संतुष्टि देता है। यह वारकरी परंपरा दुनिया में महान है और विट्ठल के लिए भक्तों का प्यार कभी खत्म नहीं होता।)
🧩 सिर्फ़ इमोजी समरी

🚩 🙏 👣 📿 🪔 🌿 🕯� ✨ 🎶 🥁 🚩 👟 🌊 🎭 🔴 💡 🕯� 🌸 🔔 🧘�♂️ 📿 🚶�♂️ 🏛� ❤️ 🗣� 🙌 🌊 🚩

📝 सिर्फ़ शब्दों में सारांश

वारी: हर साल भक्तों की पंढरपुर की पैदल यात्रा।

एकादशी: विट्ठल की पूजा में सबसे ज़रूरी व्रत।

चंद्रभागा: पंढरपुर की पवित्र नदी जहाँ भक्त स्नान करते हैं।

दिंडी: ताल-मृदंगम के साथ चलने वाले भक्तों का समूह।

तुलसीमल: वारकरी संप्रदाय और विट्ठल भक्ति का मुख्य प्रतीक।

नमस्मारन: विट्ठल के नाम का लगातार जाप।

समता: यह संदेश कि विट्ठल के दर पर सभी भक्त बराबर हैं।

पंढरी के पांडुरंग की यह कविता आपको कैसी लगी?

--अतुल परब
--दिनांक-21.01.2026-बुधवार. 
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