🌞 मकर संक्रांति: उत्तरायण का प्रकाश और तिलगुला की मिठास 🌞🌞 🪁 ✨ 🌊 💧 🙏 🕉️

Started by Atul Kaviraje, January 21, 2026, 09:41:23 PM

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Atul Kaviraje

मकर संक्रांति-
🪁 मकर संक्रांति
महत्व: सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश — उत्तरायण की शुरुआत, जिसे धार्मिक दृष्टि से बहुत शुभ माना जाता है।
परंपरा: तिलगुल बांटने, खिचड़ी खाने, सूर्य को अर्घ्य देने, दान-पुण्य और नदी में स्नान जैसे रीति-रिवाज करके खुशी मनाई जाती है।
🌱 **पुण्य देना और परंपरा**
तिलगुल बांटने और "भगवान बोला – भगवान बोलो" कहने की परंपरा पारंपरिक खुशी को बढ़ाती है।
खिचड़ी बनाकर भगवान को चढ़ाने की परंपरा है।
मकर संक्रांति:
सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेगा।
संक्रांति का समय: दोपहर 3:13 बजे।
महापुण्य काल: दोपहर 3:13 बजे से शाम 4:58 बजे तक। (इस दौरान नहाना और दान करना बहुत शुभ माना जाता है।)
इस दिन से 'उत्तरायण' शुरू होता है।
क्योंकि इस दिन एकादशी और संक्रांति एक साथ होती हैं, इसलिए सात्विक भोजन और दान पर ज़्यादा ज़ोर दिया जाता है।
संक्रांति संक्रमण समय: दोपहर 3:13 बजे।
संक्रांति शुभ समय: दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:46 बजे तक।
महापुण्य काल: दोपहर 3:13 बजे से शाम 4:58 बजे तक (दान और स्नान के लिए बहुत शुभ)।
खास बात: इस दिन से उत्तरायण शुरू होता है।
चूंकि इस दिन एकादशी और मकर संक्रांति एक साथ होती हैं, इसलिए व्रत रखने वालों को एकादशी का व्रत रखना चाहिए और शुभ समय में संक्रांति के धार्मिक कर्म (नहाना, दान) करने चाहिए।
🌞 मकर संक्रांति
यह दिन सूर्य के उत्तरायण (उत्तर दिशा की ओर बढ़ना) की शुरुआत का प्रतीक है और इसे धार्मिक नज़रिए से बहुत शुभ माना जाता है। इस मौके पर सूर्य देव की पूजा, दान, पवित्र नदी में स्नान और खास प्रार्थना की जाती है। परंपरा के अनुसार, तिल और गुड़ बांटकर "मीठा बोला-बोला गोड़" कहने से रिश्ते मधुर होते हैं।

बुधवार, 14 जनवरी, 2026 को आने वाली 'मकर संक्रांति' के मौके पर उत्तरायण और एकादशी के सुनहरे योग पर आधारित पूरी जानकारी और एक लंबी  कविता यहाँ दी गई है:

🌞 मकर संक्रांति: उत्तरायण का प्रकाश और तिलगुला की मिठास 🌞

मकर संक्रांति सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश का त्योहार है। इस साल, संक्रांति काल बुधवार को दोपहर 03:13 बजे शुरू हो रहा है, और चूँकि इस दिन षटतिला एकादशी है, इसलिए इस दिन का महत्व दोगुना हो गया है।

📜 लंबी मराठी कविता 📜

1.
सूर्य मकर राशि में आ गया है,
उत्तरायण का शुभ समय आ गया है।
अंधकार को मात देने वाली रोशनी की यह धारा,
अब रिश्तों में शब्दों की मिठास बो दो। 🌞🪁✨🌈

मतलब: सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे 'उत्तरायण' कहा जाता है। यह समय आध्यात्मिक रूप से प्रकाश की ओर ले जाने वाला माना जाता है।

2.
दोपहर तीन से तेरह बजे का वह शुभ समय,
स्नान और दान के साथ खुशी का वह फूल।
आइए नदी किनारे पवित्र स्नान करें,
आइए सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर उनका सम्मान करें। 🌊💧🙏🌞

मतलब: दोपहर 3:13 से 4:58 बजे तक का समय बहुत शुभ है। इस समय पवित्र स्नान करके सूर्य को जल चढ़ाना बहुत फलदायी होता है।

3.
एकादशी और संक्रांति के इस मेल से
मन का सारा आलस्य और रोग दूर हो जाएंगे।
सात्विक भोजन की यह महिमा महान है,
भक्ति का यह ध्वज महान है। 🕉�🍚🥣💎

मतलब: इस साल एकादशी और संक्रांति एक साथ आए हैं, व्रत और सात्विक भोजन से भगवान की पूजा का एक दुर्लभ मेल एक साथ आया है।

4.
एक तिल लें और मीठा बोलें,
प्यार का यह संदेश दुनिया में हर जगह फैला है।
तिल में प्यार का रस जमा है,
साल का यह त्योहार कितनी मस्ती और हंसी का है। 🍯🍬🤝😊

मतलब: मिठाई बांटने और पुराने गिले-शिकवे भुलाकर रिश्तों में मिठास पैदा करने की यह खूबसूरत परंपरा हमें प्यार से जीना सिखाती है।

5.
खिचड़ी का भोग भगवान को प्रिय है,
और गरीबों को देना हमारा लक्ष्य है।
दान और धर्म से जीवन में संतुष्टि मिलती है,
संक्रांति का यह दिन सम्मान बढ़ाता है। 🍲🤲🎁🌾

मतलब: संक्रांति पर भगवान को मूंग दाल और चावल की खिचड़ी का भोग लगाकर ज़रूरतमंदों को दान किया जाता है, जिससे इंसान को मन की शांति मिलती है।

6.
ये रंग-बिरंगी पतंग आसमान में उड़ती है,
पूरी दुनिया उत्साह के रंगों से भर जाती है।
ये कटकटी का खेल आसमान में खेला जाता है,
जीत की खुशी सबके दिलों में भर जाती है। 🪁🪁🪁☁️

मतलब: आसमान में ऊंची उड़ान भरने वाली पतंगें तरक्की और उत्साह का प्रतीक हैं। यह त्योहार बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी के बीच खुशी का माहौल बनाता है।

7.
आज प्रकृति भी नए कपड़े पहनती है,
ये कड़ाके की ठंड धीरे-धीरे कम होती है।
ये मकर संक्रांति की सुहानी सुबह है,
ज़िंदगी में कामयाबी का नया रास्ता खुले। 🌱🌿☀️🌟

मतलब: संक्रांति के बाद दिन बड़े होने लगते हैं और ठंड कम हो जाती है। यह त्योहार हमारी ज़िंदगी में उम्मीद और कामयाबी के नए रास्ते खोले, यही मेरी दुआ है।

📊 समरी सेक्शन

1. वर्ड समरी:
उत्तरायण: सूरज का उत्तर की ओर जाना।

पुण्यकाल: 3:13 से 4:58 (नहाने और दान के लिए सबसे अच्छा)।

तिलगुल: प्यार और मिठास का प्रतीक।

द्विगुणित योग: एकादशी और संक्रांति का एक दुर्लभ संगम।

दान: खिचड़ी और कपड़े दान करने का महत्व।

2. इमोजी समरी:
🌞 🪁 ✨ 🌊 💧 🙏 🕉� 🍚 🥣 🍯 🍬 🤝 😊 🍲 🤲 🎁 🌾 ☁️ 🌱 ☀️ 🌟

🗺� मकर संक्रांति 2026: माइंड मैप (हॉरिजॉन्टल ब्रांच चार्ट)

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--अतुल परब
--दिनांक-14.01.2026-बुधवार.
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