🚩 निवृत्तिनाथ मौली: त्र्यंबकेश्वर का भक्ति समारोह 🚩🚩 ⛰️ 🥁 👣 🙏 📖 📿 ✨ 🚶‍♂

Started by Atul Kaviraje, January 21, 2026, 09:43:01 PM

Previous topic - Next topic

Atul Kaviraje

संत निवृत्तिनाथ यात्रा-त्र्यंबकेश्वर-
संत निवृत्तिनाथ यात्रा (त्र्यंबकेश्वर): इस दिन नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर में संत निवृत्तिनाथ की एक बड़ी तीर्थयात्रा होती है।

नासिक जिले के पवित्र शहर त्र्यंबकेश्वर में बुधवार, 14 जनवरी, 2026 को मनाई जाने वाली 'संत निवृत्तिनाथ महाराज यात्रा' के मौके पर यह एक खास भक्ति कविता है:

🚩 निवृत्तिनाथ मौली: त्र्यंबकेश्वर का भक्ति समारोह 🚩

संत ज्ञानेश्वर महाराज के बड़े भाई और सद्गुरु संत निवृत्तिनाथ महाराज की यात्रा वारकरी संप्रदाय का एक अनमोल खजाना है। पौष वारि के मौके पर हजारों वारकरी लोग त्र्यंबक शहर में आराम करते हैं।

📜  कविता 📜

1.
आज त्र्यंबकेश्वर में यह मेला जमा है,
निवृत्तिनाथ की भक्ति की यह जंग।
ब्रह्मगिरी की गोद में खुशियां छा गई हैं,
वारकरी लोगों के पैरों में मृदंगम बज गया है। 🚩⛰️🥁👣

मतलब: संत निवृत्तिनाथ की यात्रा त्र्यंबकेश्वर की पवित्र धरती पर खत्म हो गई है। ब्रह्मगिरी पहाड़ के आस-पास का पूरा इलाका वारकरियों के भजनों से भरा हुआ है।

2.
ज्ञानेश्वर और गुरुराव के बड़े भाई,
जिनके चरणों में भक्तों ने यह भक्ति अर्पित की।
निवृत्ति, ज्ञानदेव, सोपान, मुक्ताबाई,
विट्ठल के नामों की गर्जना बंद नहीं हुई। 🙏📖📿✨

मतलब: निवृत्ति नाथ सिर्फ ज्ञानेश्वर के भाई ही नहीं बल्कि उनके गुरु भी थे। इन चारों भाई-बहनों की भक्ति आज त्र्यंबक शहर में मनाई जा रही है।

3.
पौष वारि का यह त्योहार इतना भव्य है,
चकोर भक्ति के रंग में नहाया हुआ है।
दीनियों और झंडों का यह सुंदर कलेक्शन,
निवृत्ति नाथ के चरणों में यह खुशियों का हिस्सा। 🚩🚶�♂️🎶🌈

मतलब: संक्रांति के समय आने वाली यह 'पौष वारि' बहुत ज़रूरी है। जो वारकरी झंडा लेकर चलता है, उसे निवृत्तिनाथ के चरणों में परम सुख मिलता है।

4.
जिन्हें गहिनीनाथ की कृपा मिली है,
निवृत्तिनाथ ने भक्ति का यह दीया जलाया।
उन्होंने इस दुनिया को अद्वैत का ज्ञान दिया,
हर परेशान मन को शांति मिली। 💡🧘�♂️🕉�🕊�

मतलब: निवृत्तिनाथ ने गहिनीनाथ से मिली शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाया। उनके दर्शन से कई लोगों के जीवन का अंधेरा दूर हुआ।

5.
इंद्रायणी का किनारा और कुशावर्त का स्नान,
भक्तों के मन को यहाँ बहुत संतोष मिले।
शरीर पवित्र हो गया है, यह पवित्र ज्योति,
हृदय में भक्ति की यह कली खिल गई है। 🌊💧🙏🪷

अर्थ: भक्त त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त तीर्थ स्थल पर स्नान करके खुद को धन्य मानते हैं। यह पवित्र स्नान भक्ति की इच्छा को और भी बढ़ा देता है।

6.
इस संक्रांति के दिन और बुधवार को,
निवृत्तिनाथ के दर्शन का उपहार है।
मुझे समाधि के दर्शन होते हैं, आत्मानंद,
विट्ठल का नाम अनंत जप बन गया है। 🗓�🏛�🙌💖

अर्थ: इस साल यह यात्रा संक्रांति के दिन ही आई है, इसलिए दूध चीनी योग एक साथ आया है। महाराज की समाधि के दर्शन करके भक्तों को अलौकिक आनंद मिलता है।

7.
जिनका नाम हमेशा ज्ञानदेव का चेहरा है,
यह निवृत्तिनाथ की भक्ति का गांव है।
हमारा सिर हमेशा आपके चरणों में रहे,
हम आपकी गौरव गाथा हमेशा गाएंगे। 🙏🚩📿🌟

मतलब: हम निवृत्तिनाथ के चरणों में सिर झुकाते हैं, जिन्हें संत ज्ञानेश्वर अपना सद्गुरु मानते हैं। हम हमेशा उनके गुण गाएंगे।

📊 समरी सेक्शन

1. वर्ड समरी:
त्र्यंबकेश्वर: संत निवृत्तिनाथ महाराज की समाधि स्थल।

सद्गुरु: ज्ञानेश्वर मौली के बड़े भाई और आध्यात्मिक गुरु।

पौष वारी: संक्रांति के समय होने वाला एक प्रमुख तीर्थ।

कुशावर्त: पवित्र स्नान के लिए एक तीर्थ स्थल।

भक्ति सोहाला: ताल-मृदंग के साथ नामों के जाप का एक उत्सव।

2. इमोजी समरी:
🚩 ⛰️ 🥁 👣 🙏 📖 📿 ✨ 🚶�♂️ 🎶 🌈 💡 🧘�♂️ 🕉� 🕊� 🌊 💧 🪷 🗓� 🏛� 🙌 💖 🌟

🗺� संत निवृत्तिनाथ यात्रा: हॉरिजॉन्टल माइंड मैप

निवृत्तिनाथ यात्रा (त्र्यंबकेश्वर) ➔ तिथि (पौष वारि / 14 जनवरी 2026 🗓�) ➔ स्थान (ब्रह्मगिरी पैठ / कुशावर्त तीर्थ 🌊) ➔ रिश्ता (ज्ञानेश्वर के सद्गुरु 🙏) ➔ परंपरा (पालकी समारोह 🚩 | भजन-कीर्तन 🥁) ➔ महत्व (आध्यात्मिक ज्ञान 💡 | समानता 🤝)

--अतुल परब
--दिनांक-14.01.2026-बुधवार.
===========================================