🌊 त्रिवेणी संगम: प्रयाग स्नानारंभ महासोहाला 🌊🌊 💧 🙏 ✨ 🌞 🕒 🕉️ 🏺 🚩 🧘‍♂️

Started by Atul Kaviraje, January 21, 2026, 09:47:57 PM

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Atul Kaviraje

प्रयाग स्नानIरंभ-

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर, बुधवार, 14 जनवरी, 2026 को प्रयागराज (इलाहाबाद) में शुरू होने वाले 'प्रयाग स्नानारंभ' के अवसर पर त्रिवेणी संगम के आध्यात्मिक महत्व को समझाती एक खास भक्ति कविता:

🌊 त्रिवेणी संगम: प्रयाग स्नानारंभ महासोहाला 🌊

मकर संक्रांति के दिन, सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और इसी दिन से प्रयाग में 'माघ मेला' और पवित्र स्नान शुरू होता है। गंगा, यमुना और गुप्त सरस्वती के संगम पर स्नान करना मुक्तिदायक माना जाता है।

📜  कविता 📜

1.
गंगा, यमुना और सरस्वती का यह पावन संगम,
भक्ति का यह अनोखा रंग प्रयाग में दिखा।
मकर संक्रांति के दिन, स्नान शुरू हुआ,
पापों को धोने के लिए यह जन-सागर प्रकट हुआ। 🌊💧🙏✨

मतलब: प्रयागराज में तीन नदियाँ मिलती हैं। संक्रांति के समय यहाँ पवित्र स्नान शुरू होता है, जिससे इंसान के सारे दोष और पाप धुल जाते हैं।

2.
जब सूर्य मकर राशि में आता है,
तो त्रिवेणी में दिव्य शक्ति आती है।
यह बुधवार साल के मंगल का दिन है,
संगम के दर्शन से जीवन में मिठास आएगी। 🌞🕒🌊🕉�

मतलब: जब सूर्य मकर राशि में आता है, तो संगम का पानी औषधीय और आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली हो जाता है। इस दिन दर्शन करने से जीवन में पॉजिटिविटी आती है।

3.
इस ज़मीन पर अमृत की बूँदें गिरी थीं,
इसलिए यहाँ स्नान करने से पुण्य मिलता है।
ये योगी और संत नारंगी कपड़े पहने होते हैं,
जिनके दर्शन से यह दुख खत्म हो जाता है। 🏺🚩🧘�♂️📿

मतलब: पौराणिक कथाओं के अनुसार, यहाँ अमृत की बूँदें गिरी थीं। इसलिए, यहाँ स्नान का खास महत्व है और संतों की मौजूदगी इस इलाके को पवित्र बनाती है।

4.
कड़ाके की ठंड में आस्था की यह गर्माहट,
हरि नाम का जाप यहाँ बहुत होता है।
उत्तरवाहिनी गंगा की यह महिमा अपार है,
ऐसा लगता है जैसे भक्तों के लिए मोक्ष का द्वार खुल गया हो। ❄️🔥🙏🚶�♂️

मतलब: कड़ाके की ठंड के बावजूद, भक्त आस्था के साथ संगम में कूद पड़ते हैं। नाम के लगातार जाप से, यहाँ सचमुच वैकुंठ का अनुभव होता है।

5.
कल्पवास का यह मंत्र और संयम का मार्ग,
प्रयाग की यह धरती धरती पर स्वर्ग के समान है।
दान और धर्म से ये किस्मत चमकती है,
यहाँ न कोई अमीर है और न कोई गरीब। ⛺🤝🎁✨

मतलब: कई भक्त यहाँ एक महीने तक रहकर 'कल्पवास' (साधना) करते हैं। दान और धर्म से इंसान की किस्मत चमकती है और यहाँ सबको बराबर माना जाता है।

6.
शंख और आरती की आवाज़ से गूंजता ये तीर,
भक्ति के इस बहाव में मन स्थिर हो जाएगा।
ये संगम की रात दीपदान से जगमगाती है,
हमें सूर्य नारायण का साथ मिले। 🐚🕯�🎶🌌

मतलब: शंख और आरती की आवाज़ से किनारे पवित्र हो जाते हैं। रात में नंदी पर छोड़े गए दीयों को देखकर ऐसा लगता है जैसे आसमान के तारे ज़मीन पर उतर आए हों।

7.
यह शुभ स्नान चौदह जनवरी से शुरू होता है,
चेतना की यह नई शुरुआत हुई है।
यह शरीर प्रयाग के चरणों में अर्पित करें,
हम हमेशा विष्णु के इस पवित्र प्रेम का आनंद लें। 🙏🌊🌞🌈

मतलब: 14 जनवरी 2026 से शुरू होने वाला यह स्नान समारोह जीवन में नया उत्साह लाता है। आइए हम भगवान के चरणों में सिर झुकाएं और जीवन का आनंद लें।

📊 समरी सेक्शन

1. वर्ड समरी:
त्रिवेणी: गंगा, यमुना और सरस्वती का संगम।

स्नान शुरू: मकर संक्रांति से शुरू होने वाला पवित्र स्नान।

मोक्ष: संगम पर नहाने से मिलने वाली मुक्ति।

कल्पवास: संगम पर रहकर किया जाने वाला एक महीने का ध्यान।

दान-पुण्य: संक्रांति के दौरान किए जाने वाले खास अच्छे काम।

2. इमोजी समरी:
🌊 💧 🙏 ✨ 🌞 🕒 🕉� 🏺 🚩 🧘�♂️ 📿 ❄️ 🔥 🚶�♂️ ⛺ 🤝 🎁 🐚 🕯� 🎶 🌌 🌈

🗺� प्रयाग स्नानाराम: हॉरिजॉन्टल माइंड मैप

प्रयाग स्नानाराम (14 जनवरी 2026) ➔ लोकेशन (त्रिवेणी संगम, प्रयागराज 🌊) ➔ मुहूर्त (मकर संक्रांति 🌞 | उत्तरायण शुरू ✨) ➔ रिचुअल (पवित्र स्नान 💧 | दीप दान 🕯� | अर्घ्य दान 🏺) ➔ साधना (कल्पवास ⛺ | संत दर्शन 🧘�♂️) ➔ फल (पापों से मुक्ति 🛡� | मोक्ष प्राप्ति 🕉�)

--अतुल परब
--दिनांक-14.01.2026-बुधवार.
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