🏰 पन्हाल का पवित्र समारोह: हज़रत साधुबाबा उरुस 🏰🏰 ⛰️ 🙏 ✨ 🌞 🌹 🌬️ 👣 🤝 🥁

Started by Atul Kaviraje, January 21, 2026, 09:48:56 PM

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Atul Kaviraje

पन्हाळा उरूस-

बुधवार, 14 जनवरी, 2026 को कोल्हापुर ज़िले के ऐतिहासिक पन्हालगढ़ में मनाए जाने वाले 'हज़रत साधुबाबा उरुस' (पनहाला उरुस) के मौके पर भक्ति और एकता का संदेश देती एक खास लंबी  कविता:

🏰 पन्हाल का पवित्र समारोह: हज़रत साधुबाबा उरुस 🏰

पनहालागढ़ में हज़रत साधुबाबा की दरगाह आस्था की एक बड़ी जगह है। मकर संक्रांति के मौके पर यहां उरुस मनाया जाता है, जहां हिंदू-मुस्लिम भाई अपनी आस्था ज़ाहिर करने के लिए एक साथ आते हैं।

📜  कविता 📜

1.
यह जगह पन्हालगढ़ की गोद में बसी है,
साधुबाबा के दर्शन से यह इज़्ज़त और बढ़ जाती है।
यह बुधवार प्रार्थना का एक बड़ा दिन है,
यहां भक्ति का कभी न खत्म होने वाला शोर है। 🏰⛰️🙏✨

मतलब: ऐतिहासिक पन्हालगढ़ में साधुबाबा का पवित्र स्थान है। आज बुधवार को तीर्थयात्रा के मौके पर हर जगह भक्ति का माहौल बना हुआ है।

2.
संक्रांति का योग और यह उरुस,
पहाड़ के दर्रे से चढ़ी आस्था की यह राह।
गुलाब-अत्तर की खुशबू यहां आती है,
दर्शन की यह चाहत भक्तों के दिलों में भर देती है। 🌞🌹🌬�👣

मतलब: चूंकि यह उरुस मकर संक्रांति के दिन ही है, इसलिए यह दूधिया योग है। किले पर चढ़ते समय भक्तों के मन में सिर्फ बाबा के दर्शन की चाहत होती है।

3.
मन में चंदन की यह बारात निकलती है,
सभी धार्मिक भाई इस उत्सव में इकट्ठा होते हैं।
यह सांप्रदायिक सद्भाव की एक बड़ी उपलब्धि है,
यह सेवा साधुबाबा के चरणों में अर्पित की जानी चाहिए। 🤝🥁🥀🚩

मतलब: उरुस के दौरान भावना में चंदन का जुलूस शुरू होता है। हिंदू और मुस्लिम भाई इस त्योहार को मनाने के लिए एक साथ आते हैं, जो सामाजिक एकता का प्रतीक है।

4.
किले की प्राचीर पर रोशनी सजाई गई,
भक्ति की यह लौ सबके मन में जलाई गई।
लोग चादर चढ़ाकर यह दुआ मांगते हैं,
मुसीबत से मुक्ति का यह जूआ मिलता है। 🕯�🏰🤲💎

मतलब: उर्स के मौके पर किले को दीयों से सजाया जाता है। दरगाह पर चादर चढ़ाकर लोग अपनी खुशी और सलामती की दुआ मांगते हैं।

5.
सुवर्णदुर्ग और पन्हाला का यह इतिहास महान है,
इसे संतों की मौजूदगी से मजबूती मिलती है।
साधु बाबा के आशीर्वाद से दुख दूर हो जाते हैं,
इंसानियत का यह रिश्ता तब और निखरता है। 🏰🛡�📜🙏

मतलब: जैसे पन्हाला का इतिहास बहादुरों का है, वैसे ही यह संतों के आशीर्वाद से भी पवित्र है। बाबा की कृपा से भक्तों के जीवन की मुश्किलें दूर हो जाती हैं।

6.
किले पर ठंडी हवा और यह खूबसूरत शाम,
विट्ठल और पीर को याद करने का यह पवित्र समय।
वहाँ कोई भेदभाव नहीं, वहाँ कोई पराया नहीं,
एकता की यह धुन यहाँ ढोल की तरह बजती है। 🌬�🤝📿🥁

मतलब: किले के शांत माहौल में, सब एक हो जाते हैं। यहाँ कोई भेदभाव नहीं, सिर्फ़ भक्ति और इंसानियत का जश्न मनाया जाता है।

7.
14 जनवरी का यह शुभ उरुस,
हर इंसान भक्ति के रंग में नहा जाए।
पन्हाला के इस भगवान को हमारा यही प्रणाम है,
सबकी ज़िंदगी खुशियों और शांति से भर जाए। 🙏🏰🌈✨

मतलब: 14 जनवरी, 2026 का यह उरुस सबकी ज़िंदगी खुशहाल बनाए। आइए साधु बाबा के चरणों में सिर झुकाएं और सबकी भलाई के लिए दुआ करें।

📊 समरी सेक्शन

1. वर्ड समरी:
पन्हाला उरुस: हज़रत साधु बाबा की याद में मनाया जाने वाला एक धार्मिक त्योहार।

सलोखा: हिंदू-मुस्लिम एकता की ऐतिहासिक विरासत।

संदल: खुशबूदार जुलूस और भक्ति।

ऐतिहासिक जगह: शिवाजी की बहादुरी के लिए मशहूर पन्हालगढ़।

पुण्यकाल: मकर संक्रांति के दिन पड़ने वाला तीर्थयात्रा का समय।

2. इमोजी समरी:

🏰 ⛰️ 🙏 ✨ 🌞 🌹 🌬� 👣 🤝 🥁 🥀 🚩 🕯� 🤲 💎 🛡� 📜 📿 🌈

🗺� पन्हाला उरुस 2026: डिटेल्ड हॉरिजॉन्टल माइंड मैप

पन्हाला उरुस (14 Jan 2026) ➔ लोकेशन (पन्हालगढ़, कोल्हापुर 🏰) ➔ पूजा की जगह (हज़रत साधुबाबा दरगाह 🙏) ➔ स्पेशलिटी (एथनिक मेल-मिलाप 🤝 | हिस्टोरिकल बैकग्राउंड 📜) ➔ रिचुअल (सैंडल जुलूस) 🥁 | चादर चढ़ाना 👐) ➔ मेल (मकर संक्रांति त्योहार 🌞)

--अतुल परब
--दिनांक-14.01.2026-बुधवार.
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