🎡 समय की शान: त्योहारों का बदलता रूप 🎡🕰️ 🏠 👵 🍬 ✨ 📱 💻 🏨 ⏱️ 🤳 🛍️ 🍭 📦

Started by Atul Kaviraje, January 22, 2026, 10:14:06 PM

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Atul Kaviraje

त्योहारों का बदलता स्वरूप-

आज के तेज़-तर्रार ज़माने में 'त्योहारों का बदलता रूप' टॉपिक पर एक सोच-समझकर लिखी और मज़ेदार मराठी कविता:

🎡 समय की शान: त्योहारों का बदलता रूप 🎡

1.
पुरानी यादों की खुशबू। बीते ज़माने के वो त्योहार, बड़ी खुशी का जश्न हुआ करते थे,
घर में सब कुछ बनता था, प्यार की वो लड़ाई होती थी।
सब इकट्ठा होते थे, आँगन सजाते थे,
मिठाई और प्यार से, रिश्ते मज़बूत हुआ करते थे। 🕰� 🏠 👵 🍬 ✨

(मतलब: पहले त्योहारों का मतलब होता था कि परिवार के सभी लोग एक साथ मिलकर घर पर खाना बनाते थे और आँगन सजाते थे, जो रिश्तों में अपनापन हुआ करता था।)

2.
आधुनिकता का एक नया टच, लेकिन अब तेज़-तर्रार ज़माने में त्योहारों का रूप थोड़ा बदल गया है,
ऑनलाइन बधाई की दुनिया में, आमने-सामने मिलना थोड़ा मुश्किल हो गया है।
अब सारे त्योहार घर के बजाय होटलों में मनाए जाते हैं,
इस समय की कमी की वजह से जीने का पुराना तरीका खो गया है। 📱 💻 🏨 ⏱️ 🤳

(मतलब: आज के मॉडर्न ज़माने में हम त्योहार ऑनलाइन मनाते हैं और बिज़ी होने की वजह से एक साथ इकट्ठा होने के बजाय, बाहर जाकर मनाने पर ध्यान देते हैं।)

3.
ये रेडीमेड चीज़ों की भीड़ अब बाज़ार में मिल रही है, अब किसी चीज़ की कमी नहीं है,
हम अब घर के बने सामान का वो स्वाद ढूंढ रहे हैं।
चाहे स्नैक्स हों या सजावट का सामान, सब कुछ अब रेडीमेड मिल जाता है,
लेकिन आस्था की उस नमी का बोझ कम हो गया है। 🛍� 🍭 📦 💸 📉

(मतलब: अब बाज़ार में सारी चीज़ें और मिठाइयाँ रेडीमेड मिलती हैं, इसलिए त्योहारों की तैयारी में जो खुशी और मेहनत होती थी, वह कम हो गई है।)

4.
WhatsApp और Facebook पर सोशल मीडिया का असर, त्योहारों की बड़ी धूम,
फ़ोटो और रील के लिए, यह त्योहार अब चढ़ रहा है।
सभी के मन लाइक और कमेंट में उलझे हुए हैं,
असली खुशी से ज़्यादा ज़रूरी, यह अब दिखावा बन गया है। 📸 🌐 🤳 💬 🎭

(मतलब: आज की पीढ़ी त्योहार मनाने के बजाय सोशल मीडिया पर अपनी फ़ोटो पोस्ट करने और लोगों से तारीफ़ पाने में लगी हुई है।)

5.
पर्यावरण के प्रति बदलती जागरूकता के साथ, अब पर्यावरण के प्रति ज़्यादा जागरूक हो रहे हैं,
प्रकृति को बचाने की चाहत के साथ, त्योहारों के बारे में सोचा जा रहा है।
केमिकल रंगों को छोड़, ये नेचुरल त्योहारों का तरीका है,
अब धरती को बचाना सबको अच्छा लगता है। 🌿 🌎 ♻️ 🌸 💧

(मतलब: एक अच्छा बदलाव ये है कि अब लोग त्योहार मनाते समय इस बात का ध्यान रखते हैं कि नेचर को नुकसान न पहुंचे, जैसे इको-फ्रेंडली गणपति या नेचुरल रंग।)

6.
कमर्शियलिज्म और मार्केट के त्योहार अब इवेंट बन गए हैं, मार्केट का ये बड़ा खेल,
ये धर्म से आगे बढ़ गया है, इवेंट मैनेजमेंट का मेल।
दिखावा भक्ति से बड़ा है, DJ की वो बड़ी आवाज़,
ये आवाज़ अब शांति की उस पूजा में बस गई है। 📢 🎸 💰 🎪 📢

(मतलब: त्योहारों का रूप अब कमर्शियल हो गया है और भक्ति से ज़्यादा दिखावे और तेज़ म्यूज़िक को महत्व दिया जा रहा है।)

7.
फिर भी भक्ति बनी हुई है। रूप भले ही बदल गया हो, भक्ति का वो झरना पुराना है,
आज भी भगवान के चरणों में, सबकी ये रीढ़ झुकती है।
आओ समय के साथ बदलें, पर मूल संस्कृति को बचाकर रखें,
आओ प्यार और इंसानियत के साथ त्योहारों के इस खजाने को बचाकर रखें। 🙏 🔱 📿 🏠 ✨

(मतलब: भले ही समय के साथ त्योहार मनाने के तरीके बदल गए हों, लेकिन दिल में आस्था वही है। हमें अपनी मूल संस्कृति और प्यार को बनाए रखना चाहिए।)

🌐 सिर्फ़ इमोजी समरी

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📝 सिर्फ़ शब्दों में

परंपरा | मॉडर्निटी | ऑनलाइन | रेडीमेड | सोशल मीडिया | एग्ज़िबिशन | एनवायरनमेंट | प्रोफेशनलिज़्म | भक्ति | कल्चर | बदलाव | लगाव

आइए त्योहारों के इस बदलते सफ़र में अपनी इंसानियत और असली खुशी बनाए रखें!

--अतुल परब
--दिनांक-15.01.2026-गुरुवार.
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