📱 मॉडर्निटी और कल्चर: बदलते ज़माने की आहट 📱💻 📱 🏙️ 🥀 📉 🚫 🚶‍♂️ ⌛ 🏢 💔 📵

Started by Atul Kaviraje, January 24, 2026, 10:20:52 PM

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Atul Kaviraje

आधुनिकता में संस्कारों का पतन-

पेश है एक  कविता जो आज के ज़माने में कल्चर के पतन और इंसानी मूल्यों पर इसके असर को दिखाती है।

📱 मॉडर्निटी और कल्चर: बदलते ज़माने की आहट 📱

1.
वो पुराने ज़माने की ज़िंदगी जो खो गई
मॉडर्निटी की इस भागदौड़ में, खोई हुई सादगी, बचपन मोबाइल स्क्रीन में कैद हो गया है।
हम कल्चर की इस बड़ी देन को भूल रहे हैं, मशीनों की इस दुनिया में, अब, इंसानियत कम हो गई है।

(मतलब: आज के ज़माने में, लोगों ने मोबाइल फ़ोन की वजह से अपनी सादगी और बच्चों का बचपन खो दिया है। हम अपनी महान संस्कृति को भूल रहे हैं क्योंकि हम मशीनों के आदी हो गए हैं।) 💻📱🏙�🥀 📉🚫🚶�♂️⌛

2.
अलग हुए परिवार और टूटे रिश्ते
कभी एक परिवार था, प्यार का साया था, पर अब एक अपार्टमेंट में, वो मेरी माँ खो गई है।
WhatsApp पर बधाई तो आती है, पर मिलने की उम्मीद नहीं, रिश्तों के बीच जो अपनापन था, वो अब किसी को महसूस नहीं होता।

(मतलब: पहले जॉइंट फैमिली सिस्टम में बहुत प्यार था, पर अब लोग छोटे-छोटे फ्लैट में अलग-अलग रह रहे हैं। बातचीत सिर्फ़ सोशल मीडिया तक ही सीमित है।) 🏢💔📵🏚� 🌫�🤝👣📉

3.
त्योहारों का बदलता रूप
त्योहार अब सिर्फ़ स्टेटस और फ़ोटो के लिए रह गए हैं, थाली में रंगोली का रूप अब नहीं रहा।
पिज़्ज़ा-बर्गर की भीड़ में, खोई हुई पूरनपोली, पारंपरिक खुशी, अब नहीं रही।

(मतलब: त्योहार अब सिर्फ़ सोशल मीडिया पर फ़ोटो पोस्ट करने के लिए रह गए हैं. त्योहारों का असली मज़ा कम हो गया है क्योंकि पारंपरिक खाने की जगह अब फ़ास्ट फ़ूड ने ले ली है.) 🍕📸🚫🥣 📉📸🤳❌

4.
पश्चिमी संस्कृति का यह कहर
वो विदेशी रीति-रिवाज़, जैसे हमारे अपने हो गए हों, संतों के इन विचारों की दिशा अब बदल गई है.
अंग्रेज़ी के सामने हमारी मातृभाषा रो रही है, अब संस्कृति की नींव टूट रही है.

(मतलब: हम वेस्टर्न कल्चर की आँख बंद करके नकल कर रहे हैं, जिसकी वजह से हमारे संतों के विचार और हमारी मराठी भाषा पीछे छूटती जा रही है।) 🌍🏴🗣�📉 🏛�🥀🚫📚

5.
गुरु-शिष्य परंपरा का पतन
वो सम्मान देने वाले हाथ अब मोबाइल फ़ोन में लगे हैं, बड़ों के लिए वो सम्मान अब सिर्फ़ शब्दों में रह गया है।
पैरों में झुकने का वो रिवाज़ अब हाय-हेलो बन गया है, रस्मों की ये गांठ अब धीरे-धीरे ढीली हो गई है।

(मतलब: बड़ों के लिए जो इज़्ज़त पहले रखी जाती थी, वो अब कम हो गई है। हमारे यहां पैर झुकाने का रिवाज खत्म हो गया है और अब वेस्टर्न तरीके से नमस्ते किया जाता है।) 🤳🚫🙏👞 📉📱🙅�♂️🤐

6.
प्रकृति से टूटा संपर्क
इस सीमेंट के जंगल में, पेड़ों का कत्ल हो गया है, प्रकृति के वो गीत अब सिर्फ़ किताबों में बचे हैं।
बारिश की वो मिट्टी की खुशबू, अब सीमेंट में खो गई है, मॉडर्निटी की आहट में हम अपनी ही बर्बादी ले आए हैं।

(मतलब: तरक्की के नाम पर हमने पेड़ काट दिए हैं और प्रकृति को नुकसान पहुंचाया है। इस वजह से प्रकृति से हमारा पुराना संपर्क टूट गया है।) 🏙�🪓🌳🌫� 🏗�🚫🌿🥀

7.
संस्कृति को बचाने का संकल्प
अभी समय नहीं बीता है, आओ हम जागें, संस्कृति के इस पेड़ को भक्ति का यह पानी दें।
आधुनिकता की ज़रूरत है, लेकिन आओ हम अपनी जड़ों को बचाकर रखें, आओ हम महाराष्ट्र की इस मिट्टी का गौरव वापस लाएं।

(मतलब: अभी समय खत्म नहीं हुआ है, हमें अपनी संस्कृति और मूल्यों को बचाकर रखना चाहिए। हमें विज्ञान और संस्कृति की तरक्की के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए।) 🙏🚩🌳🤝 🌸✨🌟🧿

🌿 सिर्फ़ इमोजी समरी
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📝 सिर्फ़ शब्दों में समरी
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--अतुल परब
--दिनांक-16.01.2026-शुक्रवार.
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