"हैप्पी संडे" "गुड मॉर्निंग" - 25.01.2026- कविता: स्वर्णिम रविवार की चमक ✍️🌅 ☕

Started by Atul Kaviraje, January 25, 2026, 11:07:40 AM

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Atul Kaviraje

"हैप्पी संडे" "गुड मॉर्निंग" - 25.01.2026-

कविता: स्वर्णिम रविवार की चमक ✍️

श्लोक 1
जनवरी के आकाश में सूरज ऊँचा चढ़ता है,
उन छायाओं का पीछा करना जहां चिंताएं हैं।
साल के पच्चीस दिन बीत गए,
इस शांत सुबह में शांति का पता चलता है। ☀️ 🗓� ✨ 🕊�

छंद 2
एक कप कॉफी और दिल को आराम,
हमारे अराजक सपनों का परीक्षण करना।
बजाने के लिए कोई अलार्म नहीं, टोल के लिए कोई घंटी नहीं,
थकी हुई आत्मा के लिए बस एक सौम्य लय। ☕ 🥐 🧘 💤

श्लोक 3
पेड़ सर्दी और रोशनी के रहस्य फुसफुसाते हैं,
सोने से नहाया हुआ संसार, इतना शांत और इतना उज्ज्वल।
जहां जंगली चीजें उगती हैं, वहां लंबी सैर करें,
और अपनी आंतरिक खुशी को प्रवाहित होने दें। 🌲 🚶�♂️ 🌼 💛

श्लोक 4
बच्चों की हँसी और बूढ़ों की कहानियाँ,
चाँदी से अधिक बहुमूल्य, सोने से अधिक दीप्तिमान।
उन चेहरों और हाथों को संजोएं जिन्हें आप पकड़ते हैं,
जैसे ही रविवार की खूबसूरती सामने आने लगती है। 👨�👩�👧�👦 💬 🤝 🌈

श्लोक 5
तो इस छब्बीसवें वर्ष की आशा में सांस लें,
संदेह को दूर भगाओ और हर भय पर विजय प्राप्त करो।
आपका रविवार इतने गहरे प्यार से भरा हो,
और खुशी के वादे जो आप हमेशा रखेंगे। 🙏 ❤️ 🌟 🏁

कविता सारांश और इमोजी

यह कविता 25 जनवरी, 2026 की शांति का जश्न मनाती है। यह आराम, प्रकृति और पारिवारिक संबंध के महत्व पर जोर देती है, जिससे पाठक को नया सप्ताह शुरू होने से पहले की शांति को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

क्षैतिज इमोजी सारांश (कविता):

🌅 ☕ 🌳 👨�👩�👧�👦 🙏 💖 📖 🌈 ✅

--अतुल परब
--दिनांक-25.01.2026-रविवार.
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