🚩 टाइटल: गांव का मेला और पवित्र स्नान 🚩🚩 🥁 🏘️ 📣 🏵️ 🌊 🚿 🚤 📿 🤫 👨‍🦳

Started by Atul Kaviraje, January 27, 2026, 08:50:01 PM

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Atul Kaviraje

लोकल तीर्थयात्रा: यह ग्रामीण महाराष्ट्र में कई जगहों पर खंडोबा या लोकल देवी-देवताओं के मेलों का समय होता है (पौष महीने के आखिर में)।
तीर्थ स्थलों पर भीड़: महाराष्ट्र में नासिक (रामकुंड), पैठण, पंढरपुर और वाई जैसी जगहों पर गोदावरी और कृष्णा नदियों में डुबकी लगाने वाले भक्तों की भारी भीड़ देखी जाती है।

लोकल यात्रा: यह ग्रामीण महाराष्ट्र में कई जगहों पर खंडोबा या देवी-देवताओं के लोकल मेलों का समय है (पौष महीने का आखिर)।
तीर्थ स्थलों पर भीड़: महाराष्ट्र में नासिक (रामकुंड), पैठण, पंढरपुर और वाई जैसी जगहों पर गोदावरी और कृष्णा नदियों में स्नान करने के लिए भक्तों की भारी भीड़ होती है।

पौष अमावस्या के मौके पर, जो रविवार, 18 जनवरी, 2026 को है, यह भक्ति भरी लंबी मराठी कविता महाराष्ट्र के ग्रामीण मेलों और तीर्थ स्थलों पर पवित्र स्नान के महत्व को बताती है:

🚩 टाइटल: गांव का मेला और पवित्र स्नान 🚩

कड़वे 1:
पौष महीने की यह अमावस्या, रविवार का यह योग अच्छा है,
महाराष्ट्र की मिट्टी में, मेले-त्योहार का रंग खुल गया है;
यह स्थानीय देवी-देवताओं के जागने का समय है,
भक्ति के इस त्योहार से, मुसीबतों का जाल दूर हो जाता है। 🚩 🥁 🏘� 🛐 🕯� ✨

मतलब: इस रविवार, 18 जनवरी को पौष अमावस्या आ गई है और ग्रामीण महाराष्ट्र में लोकल देवी-देवताओं के उत्सव शुरू हो गए हैं। यह त्योहार मन से डर और परेशानियों को दूर करता है।

कड़वे 2:
खंडोबा का पीला कोट और, माँ का यह जयकारा,
यही है ग्रामीण संस्कृति का असली आधार;
आज, नैवेद्य और पालकी, शान, कितनी साफ़ है,
भक्ति की इस बयार के साथ, खुशी की यह बयार आई है। 📣 🏵� 🔱 🍚 🎀 🦚

मतलब: गाँव वाले खंडोबा और कुलदेवता के नाम पर जयकारे लगाते हुए मेले में हिस्सा लेते हैं। भगवान को नैवेद्य दिखाकर पालकी की रस्म बड़े उत्साह से मनाई जाती है।

कड़वे 3:
नासिक के इस रामकुंड पर, भक्तों की यह घनी भीड़,
गोदावरी के पवित्र जल में, सौभाग्य की यह वर्दी मिले;
आज पवित्र स्नान करके आओ, तन और मन पवित्र हो जाए,
कुंभ मेले की इस याद में, पूरी श्रद्धा से स्नान करें। 🌊 🚿 🛕 🐚 💎 🎊

अर्थ: नासिक में गोदावरी नदी के तट पर स्नान के लिए बहुत भीड़ जमा हुई है। पवित्र नदियों में स्नान करने से जीवन में सुख और समृद्धि के संकेत मिलते हैं।

कड़वे 4:
पैठन और पंढरपुर में, चंद्रभागा के इस पवित्र तट पर,
कृष्णा नदी के तट पर, भक्ति का यह घाट सजाया गया है; वाई और कराड का यही पौराणिक महत्व है,
आज पवित्र जगहों पर नहाने से इंसानों को यह नई रफ़्तार मिलती है। 🚤 🌊 📿 🧘�♂️ 🚩 🌟

मतलब: महाराष्ट्र में पैठण, पंढरपुर और वाई जैसी जगहों के नदी-तटों में नहाने का बहुत महत्व है, और इससे इंसान की ज़िंदगी को एक दिशा मिलती है।

कड़वे 5:
इस अमावस्या के दिन, आइए हम अपने पुरखों को याद करें,
आइए हम तर्पण और दान-पुण्य की शरण लें;
आइए आज मौन में अपने अंदर की खोज करें,
आइए इस पवित्र तीर्थस्थल पर भगवान से बात करें। 🤫 💧 👨�🦳 🤲 🍲 🌈

मतलब: इस दिन, आइए हम अपने पुरखों को याद करें और दान-पुण्य करें। आइए हम भगवान के सामने मौन रखकर और शांत रहकर खुद को खोजें।

कड़वे 6:

18 जनवरी का यह दिन, किस्मत की यह नई रोशनी,
आस्था का यह खजाना लोकल मेलों की खुशी में मिले;
जिस भी कोने में भक्ति का यह झरना बहे,
महाराष्ट्र का यह भक्त, भगवान के चरणों में रहे। 🗓� ☀️ 🦁 💪 💖 ✨

मतलब: आज खुशी का दिन है, क्योंकि महाराष्ट्र के कोने-कोने में भक्ति की धारा बह रही है। हर भक्त पूरे मन से भगवान की सेवा कर रहा है।

कड़वे 7:
हमें खुशहाली और शांति मिले, यही भगवान से दुआ है,
आपका ठंडा प्यार हम पर बना रहे;
आइए हम मेलों और तीर्थों के इस पवित्र मेले में झुककर नहाएं,
आइए हम भक्ति के इस त्योहार के लिए निकलें। 🥳 🚩 🌟 👑 🙌 🌈

मतलब: भगवान सबको सुख और शांति दें, यही मेरी दिल से प्रार्थना है। इस मेले और पवित्र स्नान के मौके पर, आइए हम सब भक्ति में डूब जाएं।

📋 सिर्फ़ शब्दों का सारांश

स्थानीय तीर्थ, पौष अमावस्या, 18 जनवरी, रविवार, मेला समारोह, नासिक रामकुंड, पैठण, पंढरपुर, वाई, तीर्थ स्नान, ग्रामीण संस्कृति, भक्तिभाव, पुरखों को याद करना।

📋 सिर्फ़ इमोजी समरी
🚩 🥁 🏘� 📣 🏵� 🌊 🚿 🚤 📿 🤫 👨�🦳 🤲 🗓� ☀️ 🌟 🙌 🌈

--अतुल परब
--दिनांक-18.01.2026-रविवार.
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