🚩 टाइटल: ग्रामदैवत पूजा - बलिराजाची अमावस्या 🚩☀️ 🚩 🙏 🚜 🛠️ 🌾 🐄 🐂 🚿 🥘

Started by Atul Kaviraje, January 27, 2026, 08:52:06 PM

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Atul Kaviraje

ग्राम देवता पूजा: ग्रामीण इलाकों में अमावस्या के मौके पर खेती के औजारों और बैलों को आराम देने और कुछ जगहों पर प्रसाद चढ़ाने की परंपरा है।

आने वाली पौष अमावस्या के मौके पर, रविवार, 18 जनवरी, 2026 को, ग्रामीण महाराष्ट्र में 'ग्रामदैवत पूजा' और 'बैल-अवजारे पूजा' की खूबसूरत परंपरा पर आधारित यह भक्ति भरी लंबी मराठी कविता:

🚩 टाइटल: ग्रामदैवत पूजा - बलिराजाची अमावस्या 🚩

कड़वे 1:
यह पौष महीने की अमावस्या है, यह रविवार का योग है,
उस ग्राम देवता का रूप, मणि मीठा है;
बलिराजा की इस संस्कृति में, आभार जताने का यही तरीका है,
भगवान को नमन करना था, अंदर के स्वर्ग का अनुभव करना था। ☀️ 🚩 🙏 🛐 🕯� ✨

मतलब: यह रविवार, 18 जनवरी, ग्राम देवता की पूजा करने का दिन है। किसानों की संस्कृति में, भगवान का आभार जताना सबसे बड़ी खुशी है।

कड़वे 2:
देखो हल के ये सारे औज़ार, आज आराम कर रहे हैं,
ये काली मिट्टी के सेवक, तुम विश्वास से नम्र रहो;
आइए हम इन लोहे के हथियारों को अपनी खुशबू और ताकत दें,
आइए हम अगली फ़सल और पानी के लिए भगवान से प्रार्थना करें। 🚜 🛠� 🌾 🏵� 📿 🎊

मतलब: आज खेती के सारे औज़ार साफ़ करके उनकी पूजा की जाती है। हम साल भर इस्तेमाल होने वाले इन औज़ारों के प्रति अपना सम्मान दिखाते हैं और अगली फ़सल के लिए प्रार्थना करते हैं।

कड़वे 3:
आज खेतों में काम कर रहे बैलों को आराम का एक पल दिया जाता है,
उनकी मेहनत से बलिराजा का यह आँगन रोशन हो गया है;
आइए हम गर्म पानी से नहाएँ और उनकी पीठ पर हाथ फेरें,
इस मूक जानवरों के रूप में, भगवान हमारे साथ रहें। 🐄 🐂 🚿 🧼 💖 🌟

मतलब: आज बैलों को काम से छुट्टी दी जाती है। हम उन्हें नहलाकर और उनकी पीठ पर हाथ फेरकर उनके प्रति अपना प्यार दिखाते हैं।

कड़वे 4:
चलो गांव के देवता को पूरन-पोली का मीठा प्रसाद चढ़ाते हैं,
चलो भक्ति से गांव की सारी परेशानियां दूर भगाते हैं;
पंचरती की यह रोशनी, गभरा फीका पड़ गया है,
किसान अब पूरी तरह से कपड़े पहनकर, भक्ति के इस रंग में नहाया हुआ है। 🥘 🥣 🕯� 🔔 🔥 💎

मतलब: भगवान को पूरनपोली का मीठा प्रसाद चढ़ाया जाता है और गांव की रक्षा के लिए प्रार्थना की जाती है। आरती की रोशनी में पूरा माहौल शुभ हो जाता है।

कड़वे 5:
यह अमावस्या की रस्म है, यही इंसानियत का धर्म है,
प्रकृति की इस पूजा में, जीवन का सार छिपा है;
आइए आज मौन धारण करके अपने भीतर की खोज करें,
श्रम के इस मंदिर में, विश्वास की ज्योति जलाएं। 🤫 🧘�♂️ 💡 🌱 🤝 🌠

मतलब: प्रकृति और जानवरों की पूजा करना ही सच्चा धर्म है। इस दिन, हमें मौन रहने और मेहनत पर विश्वास करने का संकल्प लेना चाहिए।

कड़वे 6:
18 जनवरी का यह समारोह, ग्रामीण संस्कृति की यह शान,
आइए हम बलिराजा के श्रम का हमेशा सम्मान करें;
गांव की इस मिट्टी की खुशबू कितनी ताज़ा है,
अमावस्या के इस दिन, किस्मत का यह सूरज निकला है। 🗓� ☀️ 🦁 💪 🏡 ✨

मतलब: आज गांव के मेहनती लोगों के लिए गर्व का दिन है। अमावस्या होने के बावजूद, आस्था के कारण जीवन में तरक्की की रोशनी दिख रही है।

कड़वे 7:
गांव खुशहाल हो, यही भगवान से प्रार्थना है,
आइए हम एकता के इस रिश्ते को अपने दिलों में संजोएं;
गांव के देवता की पूजा करके, जीवन धन्य हो गया है,
सफलता का यह नया शिखर आज हमारे सामने आया है। 🥳 🚩 🌟 👑 🙌 🌈

मतलब: गांव में सुख, समृद्धि और एकता बनी रहे, यही भगवान से प्रार्थना है। भगवान की कृपा से सभी तरक्की करें, यही सद्भावना है।

📋 सिर्फ़ वर्ड समरी
ग्राम देवता, पौष अमावस्या, 18 जनवरी, रविवार, बैल विश्राम, औजार पूजा, बलिराजा, पुराणपोली नैवेद्य, ग्रामीण संस्कृति, आभार, प्रकृति पूजा, समृद्धि।

📋 सिर्फ़ इमोजी समरी
☀️ 🚩 🙏 🚜 🛠� 🌾 🐄 🐂 🚿 🥘 🥣 🕯� 🤫 🧘�♂️ 💡 🗓� 🏡 🥳 🌈

--अतुल परब
--दिनांक-18.01.2026-रविवार.
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